सितंबर महीने में बाजार का हाल बेहद सुस्त रहा है। Nifty 50 इंडेक्स **6.65%** की गिरावट के बाद अब **22,500** के अहम सपोर्ट लेवल पर खड़ा है। क्रूड ऑयल के दाम कम होने के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भारतीय शेयरों पर भारी पड़ रही है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है। इंडेक्स जिस तरह से 22,500 के लेवल का टेस्ट कर रहा है, उसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। तकनीकी चार्ट्स पर देखें तो गिरावट काफी तीखी रही है, लेकिन खरीदार अभी भी बाजार में पूरी हिम्मत के साथ उतरते नहीं दिख रहे हैं।
अहम लेवल और रेजिस्टेंस
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 22,200 से 22,500 की रेंज को फिलहाल आखिरी उम्मीद माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इसके नीचे फिसलता है, तो बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 22,800 से 23,000 के लेवल एक मजबूत रेजिस्टेंस का काम करेंगे, जिन्हें पार करने के लिए बाजार को तगड़े वॉल्यूम की जरूरत होगी।
ग्लोबल दबाव की असली वजह
क्रूड ऑयल के दामों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर थी, लेकिन यह असर फीका पड़ गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिका में बढ़ती 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड, जो 5.2% के पार पहुंच गई है। जैसे-जैसे अमेरिका में रिटर्न सुरक्षित और आकर्षक होता है, विदेशी निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे इंडेक्स पर लगातार दबाव बना हुआ है।
बैंकिंग सेक्टर का हाल
Bank Nifty का हाल भी कुछ खास नहीं है। इंडेक्स ने 54,000 का साइकोलॉजिकल सपोर्ट तोड़ दिया है, जो ट्रेडर्स के लिए खतरे की घंटी है। अब सबकी नजरें 53,300 के लेवल पर टिकी हैं, जो एक एंकर पॉइंट का काम कर सकता है। बाजार में फिर से पॉजिटिव सेंटिमेंट लाने के लिए इंडेक्स का 55,300 के रेजिस्टेंस के ऊपर निकलना अनिवार्य है।
अगले कुछ दिनों में निवेशकों को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों (FIIs) के फ्लो पर पैनी नजर रखनी होगी। जब तक बाजार एक ठोस बेस नहीं बना लेता, तब तक छोटी अवधि के शोर से बचकर कंपनी के नतीजों और मैक्रो डेटा पर फोकस करना ही समझदारी है।
