Nifty Smallcap 100 इंडेक्स में आज **2%** की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह लगातार पांचवें दिन लाल निशान में बंद हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है।
स्मॉलकैप इंडेक्स में सुस्ती का दौर जारी है। बुधवार, 16 सितंबर 2026 को Nifty Smallcap 100 में 2% की बड़ी गिरावट देखने को मिली। पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंडेक्स 5% तक टूट चुका है, जबकि इसी दौरान Nifty 50 में केवल 2% की गिरावट आई है। यह साफ दिखाता है कि इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर छोटे शेयरों पर पड़ रहा है।
FIIs का दबाव और मार्केट का गणित
बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली है। 15 सितंबर 2026 को FIIs ने भारतीय बाजार से ₹2,977 करोड़ के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,686 करोड़ की खरीदारी कर सहारा देने की कोशिश की, लेकिन विदेशी निवेशकों के भारी आउटफ्लो के सामने यह नाकाफी साबित हुआ।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
मार्केट पर ग्लोबल दबाव की दो बड़ी वजहें हैं:
- कच्चा तेल (Brent Crude): कीमतें $108 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगाई का खतरा पैदा कर रही हैं।
- US बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में उछाल से वैश्विक निवेशक जोखिम भरे स्मॉलकैप मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट की ओर भाग रहे हैं।
स्टॉक्स में मची हलचल
बिकवाली के दबाव में Afcons Infrastructure का शेयर इंट्राडे में 14% तक टूट गया। वहीं Data Patterns, Welspun Corp, Tata Chemicals, Firstsource Solutions और Narayana Hrudayalaya जैसे शेयरों में 4% से 6% तक की गिरावट देखी गई। स्थिति इतनी गंभीर है कि Whirlpool of India, Ircon International और Brainbees Solutions जैसे दिग्गज स्टॉक्स अपने 52-वीक लो (52-week lows) पर आ गए हैं।
निवेशकों की नजर अब US फेडरल रिजर्व की अपकमिंग पॉलिसी पर है। जब तक ग्लोबल मैक्रो इंडिकेटर्स स्थिर नहीं होते और FIIs की बिकवाली थमती नहीं, तब तक स्मॉलकैप में वोलाटिलिटी (Volatility) बनी रहने की आशंका है।
