मार्केट की मजबूती बरकरार
शुक्रवार को Nifty इंडेक्स ने गुरुवार की रिकवरी को जारी रखा और सेशन के ऊपरी स्तरों के करीब बंद हुआ। यह मजबूती ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल भू-राजनीतिक अस्थिरता (geopolitical instability) लगातार बनी हुई है, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आक्रामक दखल ने भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती लाई है।
बाजार की यह टेक्निकल मजबूती (technical strength) एक चुनौतीपूर्ण ग्लोबल माहौल के बिल्कुल विपरीत है, जो इसके अंतर्निहित गतिशीलता (underlying dynamics) पर करीब से नज़र डालना ज़रूरी बनाती है।
भारतीय इक्विटी वैल्यूएशन (Indian Equities Valuation)
भारत के Nifty 50 का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 22-24 के बीच है, जिससे भारतीय इक्विटी मार्केट का मूल्य लगभग $4.5-$5 ट्रिलियन आंका जा रहा है। यह वैल्यूएशन इसे अन्य एशियाई बाजारों जैसे Nikkei 225 या Shanghai Composite की तुलना में प्रतिस्पर्धी बनाता है, हालांकि कभी-कभी प्रीमियम पर भी। यह दर्शाता है कि भारतीय शेयर (Indian equities) ग्रोथ के लिए अच्छी तरह से प्राइस किए गए हैं, लेकिन बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील प्रीमियम भी रखते हैं। शुक्रवार को Nifty 22,750 पर बंद हुआ, जो गुरुवार के 22,713 से ऊपर है। हालांकि, इस चाल में कितनी मजबूती थी, यह ट्रेडिंग वॉल्यूम से पता चलेगा।
टेक्निकल मजबूती और RBI का एक्शन
बाजार की टेक्निकल मजबूती के पीछे कई अहम कारक हैं। Nifty इंडेक्स एक महत्वपूर्ण अपवर्ड-स्लोपिंग ट्रेंडलाइन के ऊपर बना हुआ है, जिसने पहले 22,296 के पास सपोर्ट का काम किया था। इस मजबूती को भारतीय रुपये की 2013 के बाद की सबसे बड़ी रैली से और बल मिला है।
RBI के कड़े उपायों, जिनमें नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स पर रोक और संबंधित फर्मों के साथ फॉरेन एक्सचेंज डील्स को सीमित करना शामिल है, ने कैपिटल फ्लाइट (capital flight) के आम रास्तों को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।
मार्च टैक्स-लॉस सेलिंग पीरियड का अंत भी एक मौसमी ओवरहैंग को दूर करता है, जो री-इन्वेस्टमेंट के लिए पूंजी मुक्त कर सकता है। डेली चार्ट्स पर, एक बुलिश रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) डाइवर्जेंस - जहां इंडेक्स ने नया निचला स्तर बनाया लेकिन RSI ने नहीं - एक टिकाऊ ऊपर की ओर सुधार (upward correction) की संभावना का संकेत देता है, जो अक्सर मार्केट में वापसी से पहले देखा जाता है।
जोखिम और ग्लोबल हेडविंड्स (Persistent Risks and Global Headwinds)
हालांकि, टेक्निकल संकेतों और करेंसी को स्थिर करने के प्रयासों के बावजूद, महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। RBI का आक्रामक हस्तक्षेप, जो रुपये को सहारा दे रहा है, महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि यह फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (foreign exchange reserves) को खत्म कर सकता है और अंतर्निहित आर्थिक दबावों की ओर इशारा कर सकता है।
ग्लोबल भू-राजनीतिक जोखिम (global geopolitical risks) अभी भी ऊंचे बने हुए हैं, Brent और WTI क्रूड ऑयल की कीमतें $85-$90 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं। इससे महंगाई (inflationary pressures) बढ़ रही है और ग्लोबल कंज्यूमर डिमांड (global consumer demand) कमजोर हो रही है। भारत ऊर्जा का एक बड़ा आयातक है, जो उसे तेल की कीमतों के झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।
डेरिवेटिव्स पर रेगुलेटरी सख्ती, कैपिटल फ्लाइट को रोकने के बावजूद, मार्केट लिक्विडिटी (market liquidity) को कम कर सकती है और हेजिंग गतिविधियों (hedging activities) को प्रभावित कर सकती है, जिससे लंबी अवधि में बाजार अधिक नाजुक हो सकता है। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे संकटों के बाद प्रारंभिक लचीलेपन के बाद गंभीर गिरावट आ सकती है, यदि मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता है।
आगे क्या?
बाजार विश्लेषक (Market watchers) इस बात पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि Nifty मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच अपनी ऊपर की ओर चाल बनाए रख पाता है या नहीं। विश्लेषकों की राय बंटी हुई है; कुछ घरेलू मांग (domestic demand) और सेक्टर ग्रोथ से अवसर देख रहे हैं, जबकि अन्य ग्लोबल हेडविंड्स, महंगाई और RBI के हस्तक्षेप की वापसी से जुड़े बड़े डाउनसाइड जोखिमों की चेतावनी दे रहे हैं।
वर्तमान अनुमानों के अनुसार, 22,325 पर Nifty सपोर्ट और 22,941 व 23,862 पर रेजिस्टेंस के साथ, बाजार में लगातार अस्थिरता (volatility) बने रहने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक खबरों पर बाजार की प्रतिक्रिया और RBI के करेंसी बचाव के मध्यम अवधि के प्रभाव भविष्य के प्रदर्शन के मुख्य निर्धारक होंगे।