भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता बेहद खराब रहा, Nifty लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ **23,346.40** के स्तर पर बंद हुआ है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड रेट हाइक ने निवेशकों का मूड खराब कर दिया है।
बाजार पर ग्लोबल दबाव
Nifty 50 का लगातार छठे हफ्ते लाल निशान में बंद होना यह बताता है कि भारतीय शेयर बाजार इस वक्त घरेलू खबरों के बजाय ग्लोबल संकेतों से ज्यादा प्रभावित है। बाजार में छाई निराशा की मुख्य वजह क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व का सख्त रुख है।
फेड रेट का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे दरें 3.75%-4% के दायरे में पहुंच गई हैं। इसके साथ ही, अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.03% हो गया है, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। जब अमेरिका में बॉन्ड से रिटर्न बेहतर मिलता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं।
क्रूड ऑयल की चिंता
कच्चे तेल (Brent Crude) की अस्थिरता ने भी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाला है। इसके भाव एक समय $108 प्रति बैरल तक पहुंच गए थे, जो अब $103 के आसपास स्थिर हैं। ऊर्जा लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सेक्टर का हाल
बाजार की कमजोरी के बीच निवेशक सुरक्षित पनाहगाह ढूंढ रहे हैं। यही वजह है कि FMCG और मीडिया सेक्टर में क्रमशः 0.9% और 1.1% की बढ़त दिखी। वहीं, डिफेंस सेक्टर में 3.8% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2.7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
क्या 'शॉर्ट-कवरिंग' रैली आएगी?
टेक्निकल तौर पर, Nifty का 40-वीक एवरेज के नीचे आना एक नकारात्मक संकेत है। हालांकि, गौर करने वाली बात विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की पोजीशन है। FIIs की इंडेक्स फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट पोजीशन रिकॉर्ड 288,428 पर पहुंच गई है। यह निवेशकों की भारी निराशा को तो दिखाता ही है, लेकिन साथ ही 'शॉर्ट-कवरिंग' का मौका भी बनाता है। अगर ग्लोबल संकेत थोड़े भी सुधरते हैं, तो इन निवेशकों को अपनी पोजीशन कवर करने के लिए शेयर खरीदने पड़ेंगे, जिससे बाजार में अचानक तेजी आ सकती है।
