बाजार में क्यों आई नरमी?
मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Nifty 50 इंडेक्स का अपने 20-दिन के मूविंग एवरेज को तोड़ना, यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी का जोर कमजोर पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह अब करेक्शन से कहीं बढ़कर है और निवेशकों को अब मंदी वाले सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
टेक्निकल चार्ट्स क्या कहते हैं?
19 फरवरी को Nifty 50 इंडेक्स अपने 20-दिन के मूविंग एवरेज के नीचे बंद हुआ, जो अक्सर नज़दीकी अवधि में कमजोरी का संकेत देता है। फिलहाल इंडेक्स 25,400-25,450 के आसपास कारोबार कर रहा है, और पिछला हाई 26,020 अब अहम रेजिस्टेंस का काम करेगा। नीचे की तरफ, 25,100 पर पहला सपोर्ट है, जबकि 24,718 एक बड़ा मासिक होल्ड लेवल है। अगर Nifty इस स्तर को तोड़ता है, तो यह 22,750 के स्तर तक भी गिर सकता है।
दूसरी ओर, बैंक निफ्टी अपने 20-दिन के एवरेज 60,086 को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके मोमेंटम इंडिकेटर्स मंदी के संकेत दे रहे हैं। बैंक निफ्टी के लिए 58,500 के आसपास सपोर्ट दिख रहा है। बाजार की घबराहट को मापने वाला इंडिया VIX (Volatility Index) हाल ही में लगभग 13.46 तक बढ़ गया है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।
कौन से सेक्टर्स में लगाएं पैसा?
बाजार की मौजूदा सावधानी भरी चाल को देखते हुए, अब तेजी वाले सेक्टर्स को चेज़ करने के बजाय, कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स की पहचान करने की रणनीति अपनाई जा रही है। एनालिस्ट्स ने हाल के एक महीने और एक साल के प्रदर्शन के आधार पर Information Technology (IT), Real Estate, और Fast-Moving Consumer Goods (FMCG) सेक्टर्स को सबसे कमजोर बताया है।
- IT सेक्टर: वैश्विक खर्च में कमी और AI के बढ़ते प्रभाव के कारण इस सेक्टर पर दबाव है।
- Real Estate सेक्टर: हाल के महीनों में fuerte rally के बाद Nifty Realty इंडेक्स में गिरावट आई है। बढ़ती कीमतें affordability को प्रभावित कर रही हैं, और मांग अब कीमत-आधारित हो गई है।
- FMCG सेक्टर: Nifty FMCG इंडेक्स का प्रदर्शन भी बाजार से कमजोर रहा है। हाई वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों का इस डिफेंसिव सेक्टर से पैसा निकालना इसके पीछे के कारण हैं।
पोर्टफोलियो को कैसे बचाएं? (Hedging)
जो निवेशक बाजार से बाहर निकले बिना अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखना चाहते हैं, उनके लिए हेजिंग (Hedging) की सलाह दी जाती है। वर्तमान माहौल में, जहाँ इंडिया VIX बढ़ा है लेकिन अभी अत्यधिक स्तर पर नहीं है, हेजिंग अपेक्षाकृत सस्ती पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, 25,000 स्ट्राइक प्राइस वाले दिसंबर 2026 के पुट ऑप्शन्स को खरीदने पर पोर्टफोलियो वैल्यू का लगभग 2% खर्च आ सकता है, जो संभावित बड़ी गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा।
वैश्विक संकेत और बढ़ता जोखिम
भारतीय शेयर बाजार वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा रहा है, जिससे जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk-off sentiment) देखी जा रही है और भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा निकल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के बारे में अनिश्चितता भी इसमें आग में घी का काम कर रही है।