भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें हफ्ते दबाव में है। Nifty 50 के 23,000 के नीचे फिसलने के बाद निवेशक अब अहम सपोर्ट लेवल पर नजरें गड़ाए बैठे हैं, जबकि F&O एक्सपायरी के करीब बढ़ती वोलेटिलिटी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है।
भारतीय बाजार फिलहाल एक कठिन दौर से गुजर रहा है, जहाँ लगातार 7 हफ्तों से बिकवाली का सिलसिला जारी है। Nifty 50 के 23,000 के स्तर से नीचे आने के बाद अब यह इंडेक्स 22,500 और 23,000 की नई ट्रेडिंग रेंज में सिमट गया है। बाजार के गिरते मिजाज के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FIIs) की रणनीति है, जिन्होंने नेट इंडेक्स शॉर्ट पोजीशन को बढ़ाकर 3.10 लाख से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स कर दिया है। यह संकेत है कि बड़े खिलाड़ी फिलहाल बाजार में और गिरावट देख रहे हैं।
तकनीकी स्तरों पर नजर
टेक्निकल फ्रंट पर, Nifty के लिए 22,750 के स्तर को बचाना मुश्किल हो रहा है। यदि इंडेक्स इसके ऊपर टिकने में नाकाम रहता है, तो यह 22,500 और फिर 22,200 तक फिसल सकता है। दूसरी ओर, 23,000 का स्तर अब एक मजबूत रेजिस्टेंस बन चुका है। इंडिया VIX का हाई लेवल इस बात की गवाही दे रहा है कि बाजार में डर का माहौल अभी कायम है।
बैंकिंग सेक्टर का हाल
बैंकिंग स्टॉक्स पर बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों का दोहरा दबाव है। Bank Nifty फिलहाल 54,400 के सपोर्ट जोन की परीक्षा ले रहा है। यदि यह लेवल टूटता है, तो इंडेक्स 54,000 या 53,800 के स्तर तक जा सकता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि 55,200–55,300 के जोन में आने वाली किसी भी रैली को शॉर्ट करने का मौका माना जाना चाहिए।
मंथली F&O एक्सपायरी नजदीक है, ऐसे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का एडवांस-डिक्लाइन रेशियो बता रहा है कि बिकवाली किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि चौतरफा है, जो साफ संकेत देता है कि बाजार में खरीदारी का दम फिलहाल खत्म सा दिख रहा है।
