Nifty, Bank Nifty की वापसी! 7 दिन की गिरावट थमी, पर इन लेवल्स पर रखें नज़र

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nifty, Bank Nifty की वापसी! 7 दिन की गिरावट थमी, पर इन लेवल्स पर रखें नज़र

भारतीय शेयर बाज़ार में 20 अगस्त 2026 को निवेशकों को कुछ राहत मिली। बेंचमार्क Nifty 50 और Bank Nifty ने लगातार सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा। हालांकि, 21 अगस्त को बाज़ार की शुरुआत फ्लैट रहने के संकेत मिल रहे हैं, और ट्रेडर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस ज़ोन पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं। ग्लोबल फैक्टर जैसे क्रूड ऑयल की कीमतें और बॉन्ड यील्ड सेंटीमेंट पर असर डाल रहे हैं।

7 दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक

20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। Nifty 50 इंडेक्स 0.64% चढ़कर 24,232 पर बंद हुआ, जबकि Bank Nifty 0.45% की बढ़ोतरी के साथ 57,496 पर निपटा। इस उछाल के बावजूद, 21 अगस्त के लिए बाज़ार का मिजाज सतर्क बना हुआ है। GIFT Nifty के शुरुआती संकेतों के अनुसार, बाज़ार की शुरुआत फ्लैट रहने की उम्मीद है।

Nifty 50 के लिए बड़े रेजिस्टेंस लेवल

Nifty 50 के सामने 24,300 से 24,400 का ज़ोन एक बड़ी चुनौती है। यह ज़ोन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इंडेक्स फिलहाल अपने 20-दिन मूविंग एवरेज (24,304) और 200-दिन मूविंग एवरेज (24,377) से नीचे कारोबार कर रहा है। अगर इंडेक्स इन लेवल्स से ऊपर सस्टेन करने में नाकाम रहता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। वहीं, नीचे की ओर 24,000 से 24,150 का ज़ोन मुख्य सपोर्ट का काम कर रहा है, जहां इंडेक्स को पहले भी स्थिरता मिली थी।

Bank Nifty का प्रदर्शन और अहम स्तर

Bank Nifty में भी सुधार देखने को मिला, लेकिन यह भी अपने टेक्निकल रेज़िस्टेंस का सामना कर रहा है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स 57,700 से 57,900 के ज़ोन पर नज़र रखे हुए हैं, जो इमीडिएट रेजिस्टेंस का काम कर रहा है। एक क्लियर अपट्रेंड के लिए, इंडेक्स को इन लेवल्स के ऊपर क्लोजिंग देनी होगी। अगर ट्रेंड पलटता है, तो 57,000 से 57,100 का ज़ोन एक महत्वपूर्ण सपोर्ट बेस के तौर पर देखा जा रहा है। इस बेस के नीचे इंडेक्स का गिरना बैंकिंग सेक्टर में फिर से कमजोरी का संकेत दे सकता है।

ग्लोबल और मैक्रो इकोनॉमिक चिंताएं

टेक्निकल लेवल्स के अलावा, निवेशक ग्लोबल डेवलपमेंट पर भी बारीकी से नज़र रख रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव और बढ़ी हुई क्रूड ऑयल की कीमतें चिंता का प्रमुख कारण बने हुए हैं। ये फैक्टर्स ग्लोबल मार्केट में वोलेटिलिटी बढ़ाते हैं, जो अक्सर भारत में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के रिस्क लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।

चूंकि हालिया रिकवरी अभी शुरुआती दौर में है और इंडेक्स महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, इसलिए व्यापक ट्रेंड अभी तक निर्णायक रूप से पॉजिटिव नहीं है। मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि जैसे-जैसे इंडेक्स रेजिस्टेंस लेवल के पास पहुँच रहे हैं, ट्रेडिंग वॉल्यूम मजबूत बने रहते हैं या नहीं। वर्तमान रिकवरी की सस्टेनेबिलिटी आने वाले सेशंस में इन टेक्निकल हर्डल्स को कैसे पार किया जाता है, इस पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.