1 सितंबर, 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 24,030 के स्तर पर संघर्ष कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते बाजार में भारी गिरावट का डर बना हुआ है, जिससे 24,000 का सपोर्ट लेवल अब सबसे अहम हो गया है।
भारतीय शेयर बाजार की सितंबर महीने की शुरुआत काफी सुस्त रही है। Nifty 50 इंडेक्स 24,030 के स्तर पर बना रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, 24,000 का आंकड़ा एक बेहद मजबूत सपोर्ट लाइन है, जिस पर हर निवेशक की नजर है। अगर यह स्तर टूटता है, तो इंडेक्स 23,800 के निचले स्तर तक गिर सकता है।
क्यों दबाव में है बाजार?
बाजार के गिरते मिजाज की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव है। इस अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $90 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है, जिससे सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों (Interest Rates) से जुड़ी नीतियां प्रभावित हो सकती हैं। निवेशक अब इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं।
FII की बिकवाली का असर
बाजार पर दबाव इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) जमकर बिकवाली कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 अगस्त को ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगभग ₹8,000 करोड़ निकाल लिए हैं। बड़ी मात्रा में पूंजी की निकासी से लिक्विडिटी कम हो रही है और बाजार में सेंटिमेंट कमजोर पड़ रहा है।
सेक्टर का हाल
फिलहाल रियल एस्टेट, फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है, क्योंकि ट्रेडर्स ऐसे सेक्टर्स से अपना पैसा निकाल रहे हैं जो आर्थिक चक्र और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं। हालांकि भारत की GDP ग्रोथ आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन फिलहाल ये ग्लोबल रिस्क के आगे फीके पड़ गए हैं।
अब बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या Nifty 24,000 के ऊपर टिक पाता है या नहीं। यदि रिकवरी आती है, तो ऊपर की ओर 24,200 से 24,300 का रेजिस्टेंस लेवल देखने को मिल सकता है। जब तक मिडिल ईस्ट से तनाव कम नहीं होता और FII की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी संभावना है।
