संवत 2083 में भारतीय शेयर बाजार एक नई उम्मीद के साथ प्रवेश कर रहा है। Nifty 50 पिछले साल करीब **10%** की गिरावट झेलने के बाद अब रिकवरी की राह पर है, जहां एनालिस्ट्स वैल्यूएशन और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
भारतीय बाजार के लिए संवत 2083 का आगाज 'सावधानी के साथ आशावाद' (Cautious Optimism) के साथ हुआ है। बीते संवत 2082 में निवेशकों ने काफी उतार-चढ़ाव देखे, जिसमें इंडेक्स 10% तक टूटा। हालांकि, 2 नवंबर 2026 तक इंडेक्स 23,440.80 पर स्थिर होता नजर आ रहा है, जो नए फाइनेंशियल ईयर के लिए एक संकेत है।
वैल्यूएशन में सुधार और बाजार का रुख
नए साल में सबसे बड़ी राहत मार्केट वैल्यूएशन में आई करेक्शन है। Nifty 50 का Price-to-Earnings (P/E) रेशियो इस समय 19.3 से 19.4 के दायरे में है। गौर करने वाली बात यह है कि यह ऐतिहासिक मिडियन (23 से 24) से काफी नीचे है, जिसका मतलब है कि शेयर अब पहले के मुकाबले सस्ते और निवेश के लिए बेहतर स्तर पर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब रैली लिक्विडिटी के दम पर नहीं, बल्कि कंपनियों की ठोस अर्निंग्स ग्रोथ के आधार पर आएगी। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर संस्थागत निवेशकों की नजर बनी हुई है।
रिस्क और चुनौतियां
बाजार की रिकवरी के रास्ते में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें $105 से $115 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना सकती हैं। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का असर भी इंडेक्स पर दिख रहा है, जिसे फिलहाल घरेलू निवेशकों (DIIs) का सपोर्ट मिल रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों और महंगाई पर आने वाली पॉलिसी भी निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मॉनिटरेबल पॉइंट रहेगी।
