Nifty 50: 8 हफ्ते की लगातार गिरावट के बाद क्या 22,600 का स्तर बचा पाएगा बाजार?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nifty 50: 8 हफ्ते की लगातार गिरावट के बाद क्या 22,600 का स्तर बचा पाएगा बाजार?

लगातार 8 हफ्तों की भारी बिकवाली के बाद Nifty 50 अब **22,421** के अहम सपोर्ट लेवल पर खड़ा है। हालांकि मार्केट 'ओवर्सोल्ड' जोन में है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें और US बॉन्ड यील्ड का दबाव बरकरार है। अब सबकी नजरें **5-7 अक्टूबर** को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं।

भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। 1 अक्टूबर को 22,421.95 पर बंद हुआ Nifty 50 एक बड़े टेक्निकल सपोर्ट पर है। बाजार के लिए पहली चुनौती 22,600 से 22,800 के रेजिस्टेंस जोन को पार करने की है, जहां से पहले भी बिकवाली का दबाव देखा गया है।

RSI और टेक्निकल सपोर्ट

बाजार में अब कमजोरी चरम पर है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) गिरकर 22.57 पर आ गया है। टेक्निकल भाषा में 30 से नीचे का RSI 'ओवर्सोल्ड' माना जाता है, जो अक्सर शॉर्ट-टर्म रिकवरी का संकेत होता है। ट्रेडर्स की नजर 200-वीक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज पर है, जो 22,378–22,400 के करीब है। अगर इंडेक्स 22,200 के नीचे फिसलता है, तो गिरावट 22,000 तक बढ़ सकती है।

ग्लोबल प्रेशर पॉइंट्स

मैक्रो लेवल पर दबाव बना हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे और महंगाई पर खतरा बढ़ गया है। वहीं, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के चलते विदेशी निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर में थोड़ी मजबूती दिख रही है, लेकिन ग्लोबल संकेतों के बिना सेंटिमेंट अभी भी कमजोर है।

RBI पॉलिसी का बड़ा ट्रिगर

अब निवेशकों की निगाहें 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने वाली RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग पर हैं। महंगाई, लिक्विडिटी और ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक का रुख ही तय करेगा कि बाजार किस दिशा में जाएगा। जब तक पॉलिसी से कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी संभावना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.