बाजार की बड़ी कंपनियां दबाव में हैं। Nifty 100 के करीब **30** लार्ज-कैप स्टॉक्स अपने **52-वीक लो** के करीब ट्रेड कर रहे हैं। वैल्यू और ग्रोथ इन्वेस्टर्स के बीच अब इस बात पर बहस तेज हो गई है कि क्या ये सही खरीदारी का मौका है या फिर रिस्की दांव।
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। Nifty 100 इंडेक्स का वैल्युएशन मल्टीपल गिरकर 19 के अर्निंग्स पर आ गया है, जबकि इसका 3 साल का औसत 22 के आसपास रहा है। साफ है कि लार्ज-कैप कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर बाजार का नजरिया थोड़ा सतर्क हुआ है।
आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 29 कंपनियां अपने साल के न्यूनतम स्तर के 10% दायरे में ट्रेड कर रही हैं। इसमें Reliance Industries, Hindustan Unilever, Britannia Industries, Maruti Suzuki, Trent और Power Finance Corporation (PFC) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।
वैल्यू इन्वेस्टर्स का तर्क
वैल्यू में भरोसा रखने वाले इन्वेस्टर्स का मानना है कि मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों में यह एक सुनहरा मौका है। मसलन, PFC को उसके कम प्राइस-टू-बुक रेशियो के कारण पसंद किया जा रहा है। साथ ही, PFC और REC के संभावित मर्जर से एक सरकारी पावरहाउस बनने की चर्चा भी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। वहीं, Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) जैसे शेयरों में मौजूद फिजिकल एसेट्स की वैल्यू को मौजूदा कम कीमतों में नहीं आंका गया है।
बैंकिंग सेक्टर में HDFC Bank के शेयर भी 52-वीक लो के आसपास हैं। जानकारों का कहना है कि यहां अधिकांश नेगेटिव रिस्क पहले ही प्राइस में शामिल हो चुके हैं, जिससे रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है।
ग्रोथ इन्वेस्टर्स का काउंटर-व्यू
दूसरी तरफ, कई पोर्टफोलियो मैनेजर्स का मानना है कि 'सस्ता' होना ही खरीदारी की गारंटी नहीं है। उनका तर्क है कि कई बड़ी कंपनियां अपनी मैच्योरिटी के कारण धीमी ग्रोथ का सामना कर रही हैं, जिसे देखते हुए उनका कम वैल्युएशन जायज है।
ये निवेशक मिड-कैप और स्मॉल-कैप की उन कंपनियों को चुनना बेहतर समझते हैं जो डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर में तेज ग्रोथ दिखा रही हैं। उनके मुताबिक, लंबी अवधि का वेल्थ क्रिएशन उन सेक्टरों में है जो बदलती अर्थव्यवस्था के साथ तेजी से बढ़ रहे हैं। अब सबकी नजर अगली तिमाही के नतीजों पर है, जो तय करेंगे कि क्या बड़े दिग्गजों की वापसी होगी या ग्रोथ स्टॉक्स का बोलबाला बना रहेगा।
