नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने नए वित्त वर्ष की दमदार शुरुआत की है। एक्सचेंज ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में 7% बढ़कर ₹3,120 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। यह मजबूती ट्रांजेक्शन इनकम में आई जोरदार बढ़ोतरी के कारण संभव हुई है।
आय में 9% का उछाल, ट्रांजेक्शन चार्ज बने मुख्य सहारा
NSE की कुल आय 9% बढ़कर ₹5,252 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹4,819 करोड़ थी। इस ग्रोथ का सबसे बड़ा श्रेय मार्केट में होने वाले ट्रांजेक्शन से वसूले जाने वाले शुल्कों को जाता है। पहली तिमाही में, ट्रांजेक्शन चार्जेज ₹3,623 करोड़ रहे, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹3,154 करोड़ से काफी ज्यादा हैं। इसके अलावा, डेटा कनेक्टिविटी, डेटा फीड सेवाएं और ऑपरेटिंग इन्वेस्टमेंट जैसे अन्य आय स्रोतों ने भी कंपनी के टॉप-लाइन में योगदान दिया।
खर्चों की बात करें तो, एक्सचेंज ने प्रभावी लागत प्रबंधन का प्रदर्शन किया है। तिमाही के लिए कुल खर्च ₹1,129 करोड़ दर्ज किया गया। यह ध्यान देने योग्य है कि NSE सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कर संग्रहकर्ता के रूप में भी कार्य करता है, जिसने जून तिमाही में ही विभिन्न करों और शुल्कों के रूप में ₹20,579 करोड़ जुटाए और हस्तांतरित किए, जिसमें सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT), स्टाम्प ड्यूटी और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) शामिल हैं। इक्विटी डेरिवेटिव्स STT और CTT प्रवाह का 57% हिस्सा बनाते हैं।
को-लोकेशन केस का समाधान, IPO की ओर बढ़ा कदम
बाजार के लिए एक बड़ी खबर यह है कि NSE ने अपने लंबे समय से चले आ रहे नियामक मुद्दों को सुलझा लिया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों को निपटाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कुल सेटलमेंट राशि ₹1,491.21 करोड़ तय की गई है। इसमें से ₹776.47 करोड़ का भुगतान पहले ही नियामक के पास जमा किया जा चुका है, और NSE बोर्ड ने 30 जुलाई, 2026 को शेष ₹714.74 करोड़ के भुगतान को मंजूरी दे दी है। यह सेटलमेंट एक्सचेंज की बहुप्रतीक्षित पब्लिक लिस्टिंग के रास्ते से एक बड़ी बाधा को दूर करता है।
₹30,000 करोड़ के IPO की तैयारी
नियामक स्पष्टता मिलने के साथ, NSE अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक्सचेंज ने जून 2026 में SEBI के पास अपने ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। यह IPO 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के रूप में संरचित है, जिसमें मौजूदा शेयरधारक लगभग 14.89 करोड़ शेयर, यानी 6% हिस्सेदारी बेचेंगे। अनुमानित ₹30,000 करोड़ के मूल्यांकन के साथ, यह पब्लिक इश्यू भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक घटना साबित हो सकता है।
निवेशकों को अब IPO के लिए अंतिम मंजूरी और नियामक को बकाया भुगतान की समय-सीमा पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, ट्रांजेक्शन चार्ज से होने वाली आय की स्थिरता, जो एक्सचेंज के राजस्व का मुख्य स्रोत बनी हुई है, बाजार की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव के बीच एक प्रमुख फोकस बिंदु रहेगी।
