NRI Investment: गल्फ से भारत की ओर दौड़े पैसे! रियल एस्टेट बेचकर शेयर बाज़ार में लगाया दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
NRI Investment: गल्फ से भारत की ओर दौड़े पैसे! रियल एस्टेट बेचकर शेयर बाज़ार में लगाया दांव
Overview

खाड़ी देशों (GCC) में रहने वाले नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) ने अपनी निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। एक सर्वे के मुताबिक, ये निवेशक अब रियल एस्टेट से पैसा निकालकर भारतीय शेयर बाज़ार (Indian Equities) में लगा रहे हैं। सर्वे में शामिल **73%** NRIs अपने इक्विटी एक्सपोजर को बढ़ा रहे हैं, जबकि **40%** प्रॉपर्टी होल्डिंग्स से बाहर निकल रहे हैं।

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गल्फ संकट और ग्रोथ की तलाश

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अस्थिरता के बीच, गल्फ देशों में रहने वाले लगभग 8,300 एनआरआई (NRI) क्लाइंट्स का यह कदम एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। वे बेहतर रिटर्न (Yield) और स्थिरता की तलाश में हैं। यह बदलाव UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन में रहने वाले एनआरआई क्लाइंट्स के बीच देखा गया है।

प्रॉपर्टी से नफा, इक्विटी में मौका

सर्वे में 40% एनआरआई ने माना कि वे अपनी प्रॉपर्टी होल्डिंग्स को कम कर रहे हैं। वेल्थ मैनेजमेंट फर्म Equirus Wealth के अनुसार, यह रियल एस्टेट से एक 'स्ट्रक्चरल एग्जिट' यानी बड़ी निकासी है, न कि सामान्य पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट। पिछले एक साल में गल्फ रियल एस्टेट मार्केट में 5% से 10% तक की गिरावट आई है, जिसका एक कारण ओवरसप्लाई और लगातार अस्थिरता है। इन हालातों में प्रॉपर्टी की लिक्विडिटी (Liquidity) कम है और रिटर्न भी धीमा है, इसलिए निवेशक भारतीय शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं।

भारतीय शेयर बाज़ार बना पहली पसंद

दूसरी ओर, भारतीय शेयर बाज़ार एनआरआई के लिए निवेश का प्रमुख डेस्टिनेशन बन गया है। सर्वे में 73% प्रतिभागियों ने भारतीय स्टॉक्स (Stocks) और म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में अपना निवेश बढ़ाने की बात कही है। 42% एनआरआई ने नए पैसे के लिए भारतीय इक्विटी को पहली पसंद बताया, जो फिक्स्ड इनकम (Fixed Income) के 23% और 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) के 15% के मुकाबले काफी आगे है। यह सब तब हो रहा है जब निफ्टी 50 (Nifty 50) और सेंसेक्स (Sensex) जैसे प्रमुख भारतीय इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई (All-time High) के करीब ट्रेड कर रहे हैं। निफ्टी 50 का P/E रेशियो करीब 25 के आसपास है और सेंसेक्स का मार्केट कैप $5 ट्रिलियन के करीब पहुंच रहा है।

अनिश्चितता में भी मजबूत भरोसा

क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद, एनआरआई का आत्मविश्वास मजबूत बना हुआ है। सर्वे में वित्तीय आत्मविश्वास का औसत स्कोर 3.50 (5 में से) पाया गया। 86% एनआरआई ने पिछले साल की तुलना में अपने आत्मविश्वास में स्थिरता या सुधार की बात कही। लोग पैनिक सेलिंग (Panic Selling) के बजाय बचत बढ़ा रहे हैं (35%) और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग गल्फ देशों में आत्मविश्वास का स्तर थोड़ा भिन्न है।

रेमिटेंस (Remittance) के बदलते मायने

एनआरआई के पैसे भेजने (Remittance) के उद्देश्य भी बदल रहे हैं। पहली बार, भारत में निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) के लिए भेजे जाने वाले पैसे, परिवार के पारंपरिक सपोर्ट के लिए भेजे जाने वाले पैसे से लगभग आधे हो गए हैं। यह भारत को एक लॉन्ग-टर्म (Long-term) इन्वेस्टमेंट हब के रूप में देखने का संकेत देता है। सर्वे में शामिल 84% एनआरआई एक दशक से अधिक समय से गल्फ में रह रहे हैं, जो बताता है कि ये फैसले अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिए गए हैं।

जोखिम पर भी एक नजर

एनआरआई के इस बड़े निवेश प्रवाह से भारतीय बाज़ार को फायदा है, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं। जब पूंजी कुछ ही प्रमुख एसेट क्लास, खासकर इक्विटी में केंद्रित होती है, तो यह अस्थिरता (Volatility) को बढ़ा सकती है। साथ ही, भारतीय इक्विटी का वैल्यूएशन (Valuation) पहले से ही प्रीमियम पर है, जिससे गलती की गुंजाइश कम हो जाती है। किसी भी वैश्विक या घरेलू आर्थिक झटके का इस पर असर पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.