NMS Global: **₹84** करोड़ जुटाने की तैयारी, नए डायरेक्टर की भी होगी नियुक्ति

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NMS Global: **₹84** करोड़ जुटाने की तैयारी, नए डायरेक्टर की भी होगी नियुक्ति
Overview

NMS Global Limited ने **28 फरवरी, 2026** को एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई है। कंपनी का प्लान है कि वह नॉन-प्रमोटर्स को **₹72** प्रति वारंट के हिसाब से **1.17 करोड़** कन्वर्टिबल वारंट्स जारी कर करीब **₹84.27 करोड़** जुटाए।

NMS Global लिमिटेड अपने भविष्य के प्लान्स को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फंड जुटाने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी ने 28 फरवरी, 2026 को एक एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) रखी है। इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा नॉन-प्रमोटर्स को 1,17,03,500 कन्वर्टिबल इक्विटी वारंट्स जारी करना है। इन वारंट्स की इश्यू प्राइस ₹72 प्रति वारंट तय की गई है, जिसमें ₹10 फेस वैल्यू और ₹62 का प्रीमियम शामिल है। इस तरह कंपनी का लक्ष्य करीब ₹84.27 करोड़ जुटाना है।

फंड का इस्तेमाल कैसे होगा?

कंपनी इस जुटाई गई रकम का 50% हिस्सा अपने वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करेगी। वहीं, 25% राशि कंपनी एक्वीजिशन (दूसरी कंपनियों को खरीदने) में निवेश करेगी और बाकी बचे 25% का इस्तेमाल जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेस के लिए किया जाएगा।

फंड जारी करने की समय-सीमा:

कंपनी मार्च 2026 तक जुटाई गई राशि का 25% तक इस्तेमाल कर सकती है, जबकि बची हुई राशि का इस्तेमाल जून 2027 तक कर लिया जाएगा। इन वारंट्स की वैधता अलॉटमेंट के 18 महीने तक रहेगी। कंपनी ने यह वैल्यूएशन 29 जनवरी, 2026 की एक इंडिपेंडेंट वैल्युअर रिपोर्ट के आधार पर किया है।

बोर्ड में नए चेहरे की एंट्री:

फंड जुटाने के साथ-साथ, कंपनी अपने बोर्ड को भी मजबूत कर रही है। EGM में मीनाक्षी गुप्ता को नॉन-इंडिपेंडेंट नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर पांच साल के लिए नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी वोटिंग होगी।

पिछला अनुभव और शेयरहोल्डिंग पर असर:

आपको बता दें कि कंपनी इससे पहले भी इसी तरह के इश्यू के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल ले चुकी थी, लेकिन कुछ अलॉटीज़ के पीछे हटने के कारण उसे वापस लेना पड़ा था। इस नए इश्यू के बाद नॉन-प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़ेगी, लेकिन कंपनी का कंट्रोल किसी एक पक्ष के हाथ में नहीं जाएगा।

निवेशकों के लिए क्या हैं चिंताएं?

प्रेफरेंशियल इश्यू, खासकर नॉन-प्रमोटर्स को, मौजूदा शेयरधारकों के लिए डाइल्यूशन (हिस्सेदारी का कम होना) का कारण बन सकते हैं। इसलिए निवेशकों को यह देखना होगा कि यह इश्यू वैल्यूएशन के हिसाब से कितना सही है। साथ ही, कंपनी के पिछले इश्यू के अप्रूवल को वापस लेने का इतिहास एग्जीक्यूशन रिस्क की ओर इशारा करता है। जनरल कॉर्पोरेट पर्पसेस के लिए बड़ी रकम का आवंटन पारदर्शिता के नजरिए से जांच का विषय हो सकता है। निवेशकों को EGM के नतीजों, फंड अलॉटमेंट, इस्तेमाल और एक्वीजिशन से मिलने वाले नतीजों पर कड़ी नजर रखनी होगी।

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