मुनाफे में भारी गिरावट की वजह?
Laxmi Dental (LAXMIDEN) के Q3 FY26 नतीजों में सबसे बड़ा झटका मुनाफे में दिखा। कंपनी का रेवेन्यू जहां बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा, वहीं EBITDA उम्मीद से 34% नीचे रहा और नेट प्रॉफिट (PAT) तो 38% तक लुढ़क गया। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह डोमेस्टिक लैब बिजनेस में आई नरमी और ऑपरेशनल लेवरेज (operational leverage) की समस्या बताई जा रही है। हालांकि, ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन में कुछ सुधार हुआ, लेकिन कंपनी अपने तय खर्चों (fixed costs) को सेल्स वॉल्यूम के हिसाब से मैनेज नहीं कर पाई। US मार्केट में टैरिफ (tariff) को लेकर जो अनिश्चितता थी, वह अब दूर हो गई है, लेकिन कंपनी की अंदरूनी परिचालन (operational) चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
विश्लेषकों का अनुमान बदला, शेयर में दबाव
इस तिमाही के नतीजों के बाद, ब्रोकरेज फर्म्स ने कंपनी के अगले फाइनेंशियल इयर्स (FY26-FY28) के लिए अर्निंग एस्टिमेट्स (earnings estimates) में भारी कटौती की है। Motilal Oswal जैसे ब्रोकरेज ने FY26-FY28 के लिए एस्टिमेट्स को 35%, 20% और 18% तक घटाया है। उन्होंने शेयर का टारगेट प्राइस (target price) भी घटाकर INR 260 कर दिया है। इसके बावजूद, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स 'Buy' की राय बनाए हुए हैं, और कंसेंसस (consensus) के अनुसार, अगले 12 महीनों में शेयर में 74% तक की तेजी का अनुमान है। लेकिन, पिछला एक साल कंपनी के लिए अच्छा नहीं रहा, और शेयर करीब 56.67% तक टूट चुका है। वर्तमान में, यह अपने 52-वीक लो (52-week low) के करीब ₹181.93 से ₹182.25 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
वैल्यूएशन पर सवाल और सेक्टर की उम्मीदें
Laxmi Dental का मौजूदा वैल्यूएशन (valuation) भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसका ट्रेलिंग 12-मंथ P/E रेश्यो (P/E ratio) 43.21x से 77.53x के बीच है, जो इंडस्ट्री के औसत 28x-37.9x और पीयर्स (peers) के 29.5x के मुकाबले काफी महंगा माना जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय डेंटल और मेडिकल इक्विपमेंट सेक्टर में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है। ओरल हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता और लोगों की बढ़ती आय के कारण इंडिया डेंटल कंज्यूमेबल्स मार्केट 2034 तक USD 2.64 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। साथ ही, US द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ कम करना कंपनी के एक्सपोर्ट्स के लिए एक सकारात्मक संकेत है।