IT सेक्टर में 'रेंज-बाउंड' ट्रेडिंग का दौर
एनालिस्ट सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, भारत का IT सेक्टर, जिसमें Tata Consultancy Services (TCS) जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, निकट भविष्य में एक तय दायरे में ही कारोबार करता रह सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की रफ्तार तेज हो रही है, लेकिन शुरुआती फायदा मुख्य रूप से ग्राहकों को लागत बचाने में मदद कर रहा है। इसका सीधा मतलब है कि घरेलू IT फर्मों के लिए रेवेन्यू और मार्जिन में तत्काल बड़ा बूस्ट कम दिखेगा, जो उनके मौजूदा मुनाफे को सीमित कर सकता है। हालांकि, खेमका का मानना है कि लंबे समय के निवेशकों के लिए IT सेक्टर के वैल्यूएशन (Valuation) आकर्षक हो रहे हैं। TCS जैसी प्रमुख IT कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 30 है, जो इसके प्रीमियम स्टेटस को दर्शाता है। इस साल IT सेक्टर इंडेक्स ने मामूली बढ़त हासिल की है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम में मजबूती की कमी इस ओर इशारा करती है कि निकट भविष्य में बड़े ब्रेकआउट की उम्मीद कम है, और कंसोलिडेशन (Consolidation) जारी रह सकता है।
रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर में दिख रहे मौके
टेक्नोलॉजी से हटकर, खेमका ने रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर में नए मौके देखे हैं। हाल की कीमतों में गिरावट के बाद रियल एस्टेट मार्केट, खासकर रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर फोकस करने वाले डेवलपर्स के लिए आकर्षक एंट्री पॉइंट (Entry Point) दे रहा है। इसकी वजह लगातार डिमांड और शहरीकरण है। वहीं, मेटल सेक्टर में लंबी अवधि की मजबूत डिमांड रहने की उम्मीद है, जो ग्लोबल और डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में बड़े निवेश से जुड़ी है। ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन (Green Energy Transition) से भी कॉपर और एल्युमिनियम जैसे मेटल्स की मांग बढ़ रही है। हालांकि, रियल एस्टेट में बढ़ती ब्याज दरें और कमर्शियल प्रॉपर्टी पर रिमोट वर्क का असर रिकवरी को धीमा कर सकता है। मेटल्स सेक्टर का प्रदर्शन कमोडिटी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव, जियो-पॉलिटिकल मुद्दों और सप्लाई चेन समस्याओं से प्रभावित हो सकता है।
श्रीराम फाइनेंस: रिस्क के बावजूद आकर्षक
Shriram Finance को हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर देखा जा रहा है, जो इसके मुख्य बिजनेस फंडामेंटल्स (Fundamentals) के मजबूत होने का संकेत देता है। इसका P/E रेश्यो करीब 12 है, जो Bajaj Finance (P/E करीब 40) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी कम है। निवेशकों को इसके लेवरेज (Leverage) पर ध्यान देना चाहिए। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो लगभग 4.5 है और इंटरेस्ट कवरेज (Interest Coverage) रेश्यो लगभग 3.0 है, जो बढ़ती फंडिंग कॉस्ट्स के प्रति इसे संवेदनशील बनाता है। इसलिए, ऊंची फंडिंग कॉस्ट्स और लोन क्वालिटी में नरमी जैसे जोखिम इसके वैल्यूएशन अपील को कम कर सकते हैं।