Jefferies के स्ट्रैटेजिस्ट Christopher Wood ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में AI और सेमीकंडक्टर शेयरों की ओर पूंजी शिफ्ट होने से भारत में निवेश का फ्लो प्रभावित हो रहा है।
घरेलू ग्रोथ की मजबूती
Jefferies के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट Christopher Wood का मानना है कि भारत की इकोनॉमिक फंडामेंटल्स अभी भी सही ट्रैक पर हैं। बढ़ती क्रेडिट डिमांड और प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में शुरुआती रिकवरी इसके मुख्य इंजन हैं। हालांकि, भारतीय शेयर बाजार अभी एक चुनौतीपूर्ण ग्लोबल एनवायरनमेंट से गुजर रहा है।
ग्लोबल कैपिटल का शिफ्ट
Wood ने गौर किया है कि इंटरनेशनल इन्वेस्टर फिलहाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े सेमीकंडक्टर शेयरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसकी वजह से ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में पूंजी का प्रवाह बढ़ा है, जिसका सीधा असर भारत में आने वाले विदेशी फंड्स पर पड़ा है।
कच्चे तेल की कीमतों का डर
भारतीय बाजार के लिए 'क्रूड ऑयल' की कीमतें सबसे बड़ा बाहरी रिस्क बनी हुई हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को हवा दे सकती हैं और चालू खाता घाटे (Current Account) पर दबाव डाल सकती हैं। हालांकि, पहले की तुलना में भारत अब ऊर्जा लागत को संभालने में बेहतर स्थिति में है, फिर भी इसमें उतार-चढ़ाव कॉर्पोरेट मुनाफे को प्रभावित कर सकता है।
बैंकिंग बनाम NBFC
सेक्टर स्ट्रैटेजी की बात करें तो Wood का नजरिया काफी अलग है। वे ट्रेडिशनल बैंकों की तुलना में NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों) को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। उनका मानना है कि बैंक शायद पिछले दो दशकों जैसी ग्रोथ न दिखा पाएं। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उन्हें अभी भी स्थिरता नजर आ रही है।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार में बढ़ती इक्विटी इश्यू (Equity Issuance) की संख्या इंडेक्स की बड़ी तेजी को सीमित कर सकती है। मौजूदा माहौल में 'बेंचमार्क' के बजाय 'स्टॉक सिलेक्शन' यानी सही शेयरों को चुनना सबसे ज्यादा जरूरी है। निवेशकों को विदेशी निवेश के रुझान और कच्चे तेल की कीमतों पर खास नजर रखनी चाहिए।
