AI का डर या सिर्फ बड़ी कंपनियों की धीमी चाल?
Investec Capital Services के मुकुल कोच्चर का मानना है कि भारतीय IT कंपनियों को लेकर AI को लेकर जो चिंताएं हैं, वे काफी हद तक बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं। असल में, बड़ी और स्थापित कंपनियों की ग्रोथ में आई सुस्ती और वैल्यूएशन में एडजस्टमेंट (Valuation Adjustment) की वजह AI नहीं, बल्कि उनका बड़ा आकार है। 2025 में Nifty IT इंडेक्स में 12.6% की गिरावट आई, लेकिन यह AI के डर से ज्यादा बड़ी कंपनियों के स्वाभाविक धीमी पड़ने वाले ग्रोथ रेट का नतीजा है। Infosys और Wipro जैसी बड़ी IT कंपनियों के शेयर 19-25x और 16-18x के P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि Nifty IT इंडेक्स लगभग 20x फॉरवर्ड P/E पर है। ये आंकड़े ग्लोबल AI प्रोडक्ट लीडर्स से काफी अलग हैं, जो अपना खुद का AI डेवलपमेंट कर रहे हैं। कुछ एनालिस्ट्स (Analysts) क्लाइंट्स की ओर से AI में खर्च बढ़ने के कारण IT कंपनियों के रेवेन्यू (Revenue) लक्ष्यों को चूकने की आशंका जता रहे हैं, लेकिन यह सोचना शायद जल्दबाजी होगी कि AI, IT सर्विसेज द्वारा बनाई गई वैल्यू को पूरी तरह खत्म कर देगा।
सरकारी बैंकों (PSU Banks) में दिखा 'टर्नअराउंड'
IT सेक्टर में रीकैलिब्रेशन (Recalibration) के बीच, पब्लिक सेक्टर बैंक (PSUs) एक मजबूत रिकवरी की कहानी पेश कर रहे हैं। इन बैंकों ने प्राइवेट लेंडर्स (Private Lenders) को लोन ग्रोथ (Loan Growth) में काफी पीछे छोड़ दिया है। दिसंबर 2024 तक, PSUs ने 12.4% का ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज किया, जबकि प्राइवेट बैंकों की ग्रोथ 10.5% रही। कुल लोन का 53.5% मार्केट शेयर अब PSUs के पास है। उनकी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में भी जबरदस्त उछाल आया है, अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान नेट प्रॉफिट (Net Profit) 31.3% बढ़कर ₹1.29 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह बेहतर एसेट क्वालिटी (Asset Quality) और 0.59% के नेट एनपीए (Net NPA) रेशियो से भी समर्थित है। उदाहरण के लिए, Indian Bank 9.48 के P/E और 1.45 के P/BV पर ट्रेड कर रहा है, जिसका ROE 15.35% है। फरवरी 2026 तक 1.65x के लेटेस्ट P/B रेशियो के बावजूद, Indian Bank का वैल्यूएशन अपने पीयर्स (Peers) के मुकाबले अभी भी वाजिब लगता है। State Bank of India 2.27x का उच्च P/B कमांड करता है, जबकि Punjab National Bank और Bank of Baroda 1.02x और 1.01x के P/B रेशियो पर ट्रेड कर रहे हैं। यह वापसी पॉलिसी रिफॉर्म्स (Policy Reforms) और बेहतर क्रेडिट डिसिप्लिन (Credit Discipline) से प्रेरित है।
भारत का ट्रेड (Trade) बूस्टर: एक्सपोर्ट सेक्टर में बूम!
सबसे महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल डेवलपमेंट (Structural Development) भारत के बढ़ते ग्लोबल ट्रेड रिलेशनशिप्स (Global Trade Relationships) हैं। हाल के ट्रेड एग्रीमेंट्स और सप्लाई चेन (Supply Chain) को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने की वैश्विक कोशिशें भारत को एक मैन्युफैक्चरिंग हब (Manufacturing Hub) के तौर पर स्थापित कर रही हैं। इस बदलाव से एक्सपोर्ट-लिंक्ड सेक्टर्स (Export-Linked Sectors) को जबरदस्त फायदा होने की उम्मीद है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2025 में $47 बिलियन को पार कर गया, जो 37% की छलांग है। इसका मुख्य कारण प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग है, जिसमें अकेले स्मार्टफोन से लगभग $30 बिलियन का योगदान है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 2024 में $204 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $610 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है। ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने FY2025 में $80.2 बिलियन का टर्नओवर हासिल किया, जिसमें लगभग $23 बिलियन एक्सपोर्ट शामिल हैं। 2030 तक यह $100 बिलियन के लक्ष्य को छूने का अनुमान है। टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 2025 तक $45 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि डोमेस्टिक मार्केट $225 बिलियन का है। जेम्स और ज्वैलरी (Gems & Jewellery) सेक्टर में, अमेरिका को एक्सपोर्ट में 45% से अधिक की गिरावट आई, लेकिन UAE, हांगकांग और यूरोप में डाइवर्सिफिकेशन से ओवरऑल स्थिरता बनी रही। अप्रैल-जनवरी 2025-26 के लिए कुल एक्सपोर्ट $23.19 बिलियन रहा। भारत-अमेरिका के बीच हालिया ट्रेड फ्रेमवर्क से इस सेक्टर को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्या हैं जोखिम?
इन सकारात्मक मैक्रो ट्रेंड्स (Macro Trends) के बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। भारतीय IT सेक्टर, AI से खत्म होने का खतरा न होने के बावजूद, धीमी वैश्विक मांग के प्रति संवेदनशील है और उच्च P/E वैल्यूएशन्स (Valuations) इसके अपसाइड (Upside) को सीमित कर सकते हैं। 2025 में Nifty IT इंडेक्स का 12.6% गिरना इन कमजोरियों को उजागर करता है। अमेरिका के टैरिफ (Tariff) की अनिश्चितता और वीजा संबंधी चिंताओं ने 2025 में IT स्टॉक्स से रिकॉर्ड विदेशी आउटफ्लो (Foreign Outflows) में योगदान दिया है। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए, रिटेल लेंडिंग (Retail Lending) में बढ़ती प्रतिस्पर्धा उनके रिटर्न पर दबाव डाल सकती है। जेम्स और ज्वैलरी एक्सपोर्ट को अमेरिका में टैरिफ और प्राइसिंग डिसएडवांटेज के कारण भारी नुकसान हुआ है, और लैब-ग्रोन डायमंड्स (Lab-grown Diamonds) से प्रतिस्पर्धा के कारण पॉलिश डायमंड एक्सपोर्ट 7.46% गिर गया है। व्यापक भारतीय इक्विटी मार्केट (Indian Equity Market) ने H2 2025 में अमेरिकी टैरिफ और म्यूटेड अर्निंग्स (Muted Earnings) के कारण अंडरपरफॉर्म (Underperform) किया है।
आगे का रास्ता
आगे देखते हुए, Nifty Index के लिए कंसेंसस अर्निंग्स ग्रोथ (Consensus Earnings Growth) का अनुमान मजबूत है, जो FY2025-2027 के लिए लगभग 13% है। ब्रोकरेज (Brokerages) 2026 तक AI मोमेंटम (Momentum) के बढ़ने और डिमांड को बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर में 2025 में रिकवरी देखने की उम्मीद है क्योंकि मैक्रोइकोनॉमिक कंडीशंस (Macroeconomic Conditions) सुधरेंगी और US फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) रेट्स (Rates) में कटौती करेगा। टेक्सटाइल मार्केट 2034 तक $213.75 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 3.83% CAGR से बढ़ रहा है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट को 2030 तक $610 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। टैरिफ और करेंसी फ्लक्चुएशन्स (Currency Fluctuations) जैसे वैश्विक कारकों से अल्पावधि में उतार-चढ़ाव के बावजूद, घरेलू फंडामेंटल्स (Domestic Fundamentals), अकोमोडेटिव मॉनेटरी पॉलिसी (Accommodative Monetary Policy) और बेहतर कॉर्पोरेट अर्निंग्स 2026 में मार्केट परफॉर्मेंस को सपोर्ट करने की उम्मीद है।