IPO के लिए तैयार कंपनियाँ
JM Financial और Hurun India की 'Unlisted Gems' रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की बड़ी प्राइवेट कंपनियाँ मुनाफे में ज़बरदस्त उछाल के बाद पब्लिक मार्केट में लिस्टिंग (Listing) के लिए तैयार हैं। पिछले दो सालों में इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति (Financial Position) काफी मजबूत हुई है। रिपोर्ट में शामिल 100 बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों का नेट प्रॉफिट 2023 के ₹13,000 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹35,900 करोड़ हो गया है। वहीं, कुल रेवेन्यू (Revenue) ₹8.9 लाख करोड़ और EBITDA ₹1.03 लाख करोड़ रहा। यह मजबूत ग्रोथ दिखाती है कि ये कंपनियाँ अब IPO के ज़रिए कैपिटल मार्केट (Capital Market) से पैसा जुटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
वैल्यूएशन और ग्रोथ की उम्मीदें
हालांकि अनलिस्टेड कंपनियों की सीधी वैल्यूएशन (Valuation) बताना मुश्किल है, लेकिन मुनाफे में हुई इस भारी बढ़ोतरी से पब्लिक मार्केट में लिस्ट होने पर इन्हें अच्छी वैल्यू मिलने की उम्मीद है। खासकर तब, जब इनकी तुलना पब्लिक में लिस्टेड कंपनियों से की जाए। उदाहरण के तौर पर, Zerodha जैसी फिनटेक (Fintech) कंपनी ने FY25 में ₹4,200 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जो कि इसके प्रतिद्वंद्वी Upstox के ₹190 करोड़ के मुकाबले कहीं ज़्यादा है। इसी तरह, Malabar Gold and Diamonds जैसी बड़ी ज्वेलरी कंपनी ने FY24 में ₹51,000 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी ज्वेलर बन गई।
इनमें से 65% कंपनियों का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेशियो 1x से कम है, यानी उन पर कर्ज़ बहुत कम है। यह उन्हें लिस्टेड साथियों की तुलना में एक मज़बूत बैलेंस शीट (Balance Sheet) देता है, जिससे उन्हें अच्छी वैल्यूएशन मिल सकती है। भारत के लिस्टेड रिटेल (Retail) सेक्टर में Trent और Avenue Supermarts जैसी कंपनियाँ 100 से ऊपर के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रही हैं, जो बाज़ार की ग्रोथ और मुनाफे की उम्मीदों को दर्शाता है।
मंदी का डर: क्या यह ग्रोथ बनी रहेगी?
इतनी ज़बरदस्त ग्रोथ के बावजूद, कुछ चिंताएं भी हैं। ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) में अनिश्चितता, उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) में बदलाव और सप्लाई चेन (Supply Chain) में दिक्कतें इन कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती हैं। Zerodha जैसी नई उम्र की फिनटेक (New-age Fintech) कंपनियाँ तेज़ी से बदलते डिजिटल बाज़ार और रेगुलेटरी (Regulatory) बदलावों के जोखिम का सामना करती हैं।
इसके अलावा, भारतीय IPO बाज़ार में भी थोड़ा सुस्ती का माहौल देखा जा रहा है, जहाँ कई नए लिस्टिंग इश्यू प्राइस (Issue Price) से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। रिटेल सेक्टर में फिलहाल नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margin) -0.27% है, जो दर्शाता है कि मौजूदा बिजनेस स्ट्रेंथ को पब्लिक मार्केट वैल्यूएशन (Public Market Valuation) में बदलना हमेशा आसान नहीं होता, भले ही GDP ग्रोथ 7.4% से 8.1% के बीच रहने का अनुमान हो।
निवेशकों के लिए मौका?
कुल मिलाकर, इन अनलिस्टेड कंपनियों की मजबूत प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और कम कर्ज़ का स्तर भारतीय कॉर्पोरेट इकोनॉमी (Corporate Economy) के लिए एक मज़बूत भविष्य की ओर इशारा करता है। जब ये कंपनियाँ पब्लिक मार्केट में आती हैं, तो निवेशकों को भारत की ग्रोथ स्टोरी (Growth Story) में सीधे तौर पर भाग लेने का मौका मिलेगा। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बदलती बाज़ार परिस्थितियों में अपने प्रदर्शन को कैसे बनाए रखती हैं।