पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता की वजह से बाजार में थोड़ी घबराहट जरूर है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूती दिखा रही है। यह माहौल 2027 के फाइनेंशियल ईयर (FY27) तक कंपनी की कमाई (earnings) में बड़े उछाल का रास्ता बना सकता है। यह निवेशकों के लिए 'वोलैटिलिटी डिस्काउंट' का एक खास मौका हो सकता है, जहां बाजार की चिंताएं अंदरूनी आर्थिक ताकत पर भारी पड़ रही हैं।
वोलैटिलिटी डिस्काउंट का मतलब?
हाल ही में, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ी तनातनी ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। इसी वजह से, महज दो दिनों में भारतीय शेयर बाजार में करीब 4% की गिरावट देखी गई। इस घटना ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को फिर से पैसा निकालने पर मजबूर किया है। मार्च 2026 के पहले हफ्ते में करीब ₹21,000 करोड़ का पैसा बाहर गया, जबकि फरवरी में ₹22,615 करोड़ का इनफ्लो (inflow) आया था। आम तौर पर, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, FPI के पैसे निकालने से जुड़ी रही हैं। हालांकि, इस अल्पकालिक जोखिम को देखकर लंबी अवधि की कमाई की संभावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अनुमान है कि भारत की टॉप 100 कंपनियों की कुल कमाई FY26 में 16.7% रहने के मुकाबले FY27 में बढ़कर 27.4% तक पहुंच सकती है। यह मज़बूत घरेलू मांग और FY27 में 7% से ज़्यादा रहने वाले GDP ग्रोथ के अनुमानों पर आधारित है। निफ्टी 50 का शेयर वर्तमान में FY27 की कमाई के हिसाब से लगभग 21.39-21.67 गुना P/E पर ट्रेड कर रहा है, जो कि इन मजबूत अनुमानों को देखते हुए काफी वाजिब माना जा रहा है।
सेक्टरों में दिख रही तेज़ी की उम्मीद
फार्मा और CDMO: भारत का कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) सेक्टर, ग्लोबल सप्लाई चेन को विविधता देने और आउटसोर्सिंग के बढ़ते रुझानों का बड़ा फायदा उठा रहा है। अनुमान है कि 2033 तक इस सेक्टर का वैल्यूएशन दोगुना हो जाएगा। कुशल मैनपावर और लागत में फायदे के दम पर, भारतीय कंपनियां बायोलॉजिक्स और कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स जैसे क्षेत्रों में लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए तैयार हैं।
ऑटोमोबाइल: जनवरी 2026 में कारों की रिटेल बिक्री में पिछले साल के मुकाबले अच्छी ग्रोथ दिखी है। हालांकि, FY27 के लिए इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि GST रेट कट के बाद बेस इफेक्ट के चलते पैसेंजर व्हीकल्स की वॉल्यूम ग्रोथ घटकर 3-6% रह सकती है। फिर भी, प्रीमियम उत्पादों (premiumization) की मांग और एक्सपोर्ट के अवसर इसे सहारा दे सकते हैं।
BFSI: बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर को आने वाले समय में बेहतर हो रही मैक्रो कंडीशन और रिटेल, SME व कॉर्पोरेट सेगमेंट में क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों का सीधा फायदा मिलेगा।
कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग: सरकार द्वारा कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) पर बड़ा आवंटन (₹11.2 लाख करोड़ FY26 के लिए) और प्राइवेट सेक्टर में बढ़ती तेजी के चलते, कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार ग्रोथ के लिए तैयार हैं। 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल और 'चाइना+1' (China+1) स्ट्रैटेजी, इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट और सर्विसेज की मांग को और बढ़ा रही हैं।
इमर्जिंग मार्केट में रीबैलेंसिंग और भारत की अपील
जैसे-जैसे अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर होंगी, इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) में फिर से निवेश आने की उम्मीद है। हालांकि भारत ने वैल्यूएशन के अंतर के कारण चीन जैसे देशों से कुछ समय तक पिछड़कर प्रदर्शन किया है, लेकिन अब यह गैप कम हो रहा है। भारत की स्ट्रक्चरल ग्रोथ, नीतियों में स्थिरता और घरेलू लिक्विडिटी (liquidity) की मजबूती इसे आकर्षक बनाती है। मार्च 2026 में कुछ खास दिनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बावजूद, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने लगातार पैसा लगाकर बाजार को संभाला है, जो भारत के लंबी अवधि के भविष्य पर विश्वास दिखाता है।
कमाई के अनुमानों में बड़ा रीसेट
FY27 के लिए कमाई की उम्मीदें तेजी से बढ़ रही हैं। अनुमानों के मुताबिक, कंपनी की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। यह ग्रोथ मुख्य रूप से बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस और नॉमिनल GDP ग्रोथ से आएगी, खासकर बड़े शेयरों (large caps) के लिए। उम्मीद है कि FY27 में कमाई के साथ वैल्यूएशन मल्टीपल्स (valuation multiples) में थोड़ी कमी आएगी, जिससे बाजार की संरचना और मजबूत होगी।
AI और IT सेक्टर का दोहरा नज़रिया
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर एक मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहा है। एक तरफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से ऑटोमेशन और नौकरियों के जाने का बड़ा खतरा है। कुछ रिपोर्ट्स 2028 तक बिजनेस मॉडल में बड़ी गड़बड़ की चेतावनी दे रही हैं। दूसरी ओर, ऐतिहासिक रूप से तकनीकी बदलावों ने भारतीय IT सेवाओं के लिए बाजार का दायरा बढ़ाया है। चुनिंदा कंपनियां जिनके पास मजबूत डिजिटल पोर्टफोलियो और लागत प्रबंधन (cost management) है, वे एक कंट्रेरियन (contrarian) अवसर पेश कर सकती हैं, क्योंकि AI को लागू करने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा संगठन और इंटीग्रेशन सेवाओं की ज़रूरत पड़ेगी।
सबसे बड़ा खतरा: मिड और स्मॉल-कैप का वैल्यूएशन
मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट्स में शेयरों का प्रीमियम वैल्यूएशन (premium valuation) एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। NSE मिडकैप इंडेक्स FY27 की कमाई के हिसाब से लगभग 32.16 गुना P/E पर और NSE स्मॉलकैप इंडेक्स 29.45 गुना P/E पर ट्रेड कर रहा है, जबकि निफ्टी 50 का P/E सिर्फ 21.67 गुना है। ये सेगमेंट्स ऐतिहासिक औसत से 30-50% ज़्यादा महंगे हैं, जिनमें गलती की गुंजाइश कम है और इनमें भारी गिरावट का जोखिम ज़्यादा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा सकता है, जिससे महंगाई, करेंसी की स्थिरता और FII सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है। मार्च 2026 की शुरुआत में FIIs की बिकवाली इसी चिंता को दर्शाती है। IT बिज़नेस मॉडल पर AI का लंबे समय का खतरा भी एक स्ट्रक्चरल जोखिम (structural risk) है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
आगे का नज़रिया
FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.0-7.4% के बीच रहने का अनुमान है, जिसे घरेलू कैपिटल एक्सपेंडिचर और कंजम्पशन (consumption) का सहारा मिलेगा। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाओं और मार्च की शुरुआत में FIIs की बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, लेकिन अंदरूनी कमाई की ग्रोथ का रास्ता फाइनेंशियल ईयर 2027 तक पूरे बाजार को सहारा देने की उम्मीद है।