पिछले 3 सालों में Nifty 50 और Sensex जैसे बेंचमार्क इंडेक्स सुरक्षित माने जाने वाले बैंक और पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रिटर्न को मात देने में नाकाम रहे हैं। मार्केट में तेजी के बावजूद **56%** लिस्टेड कंपनियों का प्रदर्शन FD के मुकाबले कमजोर रहा है।
भारत के शेयर बाजार में चल रही लंबी तेजी के बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। 17 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में प्रमुख मार्केट इंडेक्स के रिटर्न पारंपरिक और रिस्क-फ्री फिक्स्ड डिपॉजिट से कम रहे हैं।
रिटर्न का अंतर (The Performance Gap)
इस तीन साल की अवधि में Nifty 50 ने 15.58% और BSE Sensex ने 9.94% का रिटर्न दिया। वहीं, इसी दौरान State Bank of India में 3 साल की FD पर करीब 21.34% और Post Office Time Deposit पर लगभग 21.56% का मुनाफा मिला। अगर हम 5 साल के नजरिए से देखें, तो भी Nifty 50 का 32.3% रिटर्न, पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट के 34.4% रिटर्न से पीछे ही रहा है।
स्टॉक सिलेक्शन क्यों बना जरूरी?
बाजार की तेजी का फायदा सबको नहीं मिला। विश्लेषण के अनुसार, 2,800 से ज्यादा कंपनियों में से 1,595 कंपनियों (करीब 56%) का प्रदर्शन FD से खराब रहा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि 1,241 कंपनियों के शेयर तो इस दौरान नेगेटिव रिटर्न में रहे। बाजार का औसत रिटर्न (Median Return) केवल 11.25% रहा, जो यह साबित करता है कि वेल्थ क्रिएशन चुनिंदा स्टॉक्स तक ही सीमित रही।
सेक्टर और दिग्गज कंपनियों का हाल
मार्केट का मूड सेक्टर के हिसाब से बंटा रहा। जहाँ डिफेंस, मेटल, हेल्थकेयर और कैपिटल गुड्स में तेजी दिखी, वहीं IT, FMCG, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के शेयर पिछड़ गए। बड़े शेयरों की बात करें तो Bharti Airtel, State Bank of India, ICICI Bank और Bajaj Finance ने FD को पीछे छोड़ा, जबकि TCS, ITC, Infosys, Hindustan Unilever, HDFC Bank और Reliance Industries जैसे दिग्गज इस मुकाबले में FD से काफी पीछे रह गए।
यह डेटा निवेशकों को एक बड़ा सबक देता है कि केवल इंडेक्स में पैसा लगाने से हर बार फायदा नहीं होता। अब समय आ गया है कि निवेशक अपनी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी पर दोबारा गौर करें और 'वैल्यूएशन डिसिप्लिन' के साथ शेयर चुनें।
