भू-राजनीतिक राहत से भारतीय शेयरों में आई तेजी
इस हफ्ते भारतीय इक्विटी मार्केट्स में जबरदस्त उछाल देखा गया, जिसने लगातार छह हफ्तों की गिरावट पर विराम लगा दिया। यह पिछले पांच सालों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त रही। इस तेजी का मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनावों का कम होना, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम की खबरों का आना रहा। इसने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और खरीदारी को बढ़ावा मिला। बेंचमार्क Sensex और Nifty इंडेक्स दोनों करीब 6% चढ़े, जबकि Nifty Bank और Midcap जैसे ब्रॉडर इंडेक्स 8% तक बढ़े, जो बड़े शेयरों से परे निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है।
रियलटी और ऑटो सेक्टर चमके, पर वैल्यूएशन चिंता का विषय
रियलटी (Realty) और ऑटो (Auto) स्टॉक्स इस रैली में सबसे आगे रहे, जिन्होंने हालिया गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी के कारण दोहरे अंकों में रिटर्न दिया। शुक्रवार को बाजार अपने उच्चतम स्तर पर बंद हुआ, जिसमें Sensex 919 अंक चढ़कर 77,550 पर और Nifty 276 अंक बढ़कर 24,051 पर बंद हुआ। Reliance Industries, HDFC Bank, ICICI Bank और State Bank of India जैसी बड़ी कंपनियों ने बाजार को ऊपर ले जाने में मदद की। अकेले शुक्रवार को Nifty Auto इंडेक्स में करीब 3% का इजाफा हुआ।
हालांकि, बारीकी से देखने पर पता चलता है कि सेक्टरों का प्रदर्शन अलग-अलग रहा और कुछ स्टॉक्स की ऊंची कीमतों (valuations) को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं। ऑटो सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन इसके वैल्यूएशन ऊंचे हैं। Eicher Motors का P/E लगभग 32.6 से 42.3 के बीच और TVS Motor का P/E 57.2 से 84.0 के बीच चल रहा है। Nifty Realty इंडेक्स का P/E भी करीब 31.8 से 35.3 है। दूसरी ओर, IT सेक्टर पीछे रहा, जिसके वैल्यूएशन अधिक मामूली हैं, जैसे Infosys का P/E लगभग 17.4 से 19.5 और Wipro का 15.5 से 16.7 है। लेकिन IT सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसा कि Morgan Stanley द्वारा Wipro को 'अंडरवेट' (underweight) रेटिंग देना और विश्लेषकों द्वारा सामान्य 'रिड्यूस' (reduce) रेटिंग से पता चलता है।
बाजार में उछाल के बावजूद जोखिम बरकरार
बाजार में तेज उछाल के बावजूद, कई कारक सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। भू-राजनीतिक 'युद्धविराम' की उम्मीदें नाजुक लग रही हैं, और वैश्विक तनाव केंद्रीय बैंकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी रेपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित रखी और 'न्यूट्रल' (Neutral) रुख बनाए रखा, जिसका कारण बढ़े हुए वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों से सप्लाई-साइड महंगाई का दबाव है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मामूली गिरकर 92.73 पर आना, इक्विटी रैली के बावजूद, मुद्रा की कमजोरी का संकेत देता है जो आयात लागत और विदेशी निवेशकों की भावना को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, ऑटो और रियलटी जैसे सेक्टर्स में ऊंचे वैल्यूएशन में करेक्शन आ सकता है यदि आर्थिक विकास धीमा होता है या ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची बनी रहती हैं।
मिश्रित संकेत: ग्रोथ की उम्मीदें बनाम मौजूदा चिंताएं
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतों और मौसम से जुड़े संभावित महंगाई जोखिमों को भी स्वीकार किया है। भू-राजनीतिक तनाव से मिली राहत ने सेंटिमेंट को बढ़ावा दिया है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता, करेंसी दबाव और सेक्टर वैल्यूएशन का मिश्रण बताता है कि इस रैली की निरंतरता कॉर्पोरेट आय (earnings) और बड़े भू-राजनीतिक उथल-पुथल से बचने पर निर्भर करेगी। बाजार इन मिश्रित संकेतों से कैसे निपटता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।