Indian Markets: जियोपॉलिटिकल डर से निवेशकों में घबराहट! मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भारी बिकवाली

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Markets: जियोपॉलिटिकल डर से निवेशकों में घबराहट! मिड और स्मॉल कैप शेयरों में भारी बिकवाली
Overview

ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और जियोपॉलिटिकल (Geopolitical) टेंशन के कारण आज, 19 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार में पिछले तीन दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया। निवेशक सतर्क दिखे, जिसके चलते Nifty Midcap 100 करीब **0.9%** और Nifty Smallcap 100 लगभग **0.5%** गिर गए। Persistent Systems के शेयर करीब **4%** और Paytm के शेयर **3%** से ज़्यादा टूटे।

बाज़ार में क्यों आई गिरावट?

19 फरवरी 2026 को भारतीय इक्विटी बाज़ार बिकवाली के दबाव में आ गया, जिससे पिछले तीन सेशन से जारी तेजी पर रोक लग गई। Nifty Midcap 100 इंडेक्स में लगभग 0.9% की गिरावट आई और यह 59,655.35 पर बंद हुआ, जबकि Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 0.5% से ज़्यादा टूटकर 17,151.65 पर आ गया। यह गिरावट निवेशकों के सेंटिमेंट में बड़े बदलाव का संकेत देती है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और प्रॉफिट बुकिंग के चलते अधिक सतर्क हो गए हैं। Persistent Systems करीब 4% गिरकर ₹5,325 के आसपास ट्रेड कर रहा था। वहीं, Paytm में 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

बिकवाली की वजहें

बाज़ार में यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब जियो-पॉलिटिकल तनाव और मैक्रोइकॉनॉमिक चिंताएं बढ़ रही हैं। हालांकि बड़े आईटी (IT) स्टॉक्स ने हाल में कुछ मजबूती दिखाई थी, लेकिन मिड और स्मॉल कैप सेगमेंट में बिकवाली यह दर्शाती है कि निवेशक अब जोखिम भरे एसेट्स से दूर जा रहे हैं। Nifty Smallcap 100, जिसका P/E रेश्यो 30.7 है, और Nifty Midcap 100, जिसका P/E 33.45 है, दोनों में गिरावट देखी गई। यह दिखाता है कि इस समय मिड और स्मॉल कैप सेगमेंट में निवेशक अधिक घबराए हुए हैं। पिछले साल फरवरी 2025 में भी ऐसे ही जियोपॉलिटिकल कारणों से बड़ी गिरावट आई थी, जब Nifty Smallcap 100 13.07% और Nifty Midcap 100 10.8% गिरे थे।

सेक्टोरल डायवर्जेंस और वैल्यूएशन का खेल

मिड-कैप आईटी कंपनी Persistent Systems के शेयर में करीब 4% की गिरावट आई, भले ही ग्लोबल टेक रैली के कारण बड़े आईटी प्लेयर्स के लिए माहौल सकारात्मक बना हुआ था। कंपनी का P/E रेश्यो वर्तमान में 51.26 के आसपास है, जो आईटी सेक्टर के औसत 38.57 से काफी ऊपर है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन ऐसे समय में दबाव में आ सकता है जब बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ती है। 5 फरवरी 2026 तक MarketsMojo ने इसे 'होल्ड' रेटिंग दी थी, लेकिन कंपनी के वैल्यूएशन को महंगा बताया था।

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी Paytm के शेयर में 3% से ज़्यादा की गिरावट देखी गई। हालिया सुधारों के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स ने 'बाय' रेटिंग दी थी और रेगुलेटरी आउटलुक में सुधार से बड़े अपसाइड की उम्मीद जताई थी। हालांकि, कंपनी को PhonePe से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जो EBITDA-नेगेटिव होने के बावजूद भारी वैल्यूएशन रखती है। Paytm का P/E, लगभग 19 गुना एडजेस्टेड फर्स्ट-हाफ रेवेन्यू है, जो PhonePe के 37-43 गुना से काफी कम है। Paytm SEBI के साथ डिस्क्लोजर वॉयलेशन को लेकर सेटलमेंट में भी शामिल रही है।

रियल एस्टेट सेक्टर में भी बदलाव दिख रहा है, जहां वेयरहाउस (Warehouses) ऑफिस की तुलना में पसंदीदा निवेश बन रहे हैं। रेसिडेंशियल मार्केट में तेजी जारी है, लेकिन मांग प्राइस सेगमेंट के हिसाब से अलग-अलग है।

मार्केट में चिंताएं बरकरार

कुछ सेगमेंट्स में हालिया सकारात्मक विकास के बावजूद, बाज़ार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आईटी जैसे सेक्टर्स में हाई वैल्यूएशन, जैसा कि Persistent Systems के P/E रेश्यो से पता चलता है, एक जोखिम है अगर अर्निंग ग्रोथ धीमी पड़ती है या आर्थिक मंदी बढ़ती है। Persistent Systems के शेयर ने पिछले एक हफ्ते में 2.50% की गिरावट दर्ज की है। Paytm के लिए, रेगुलेटरी जांच और PhonePe से प्रतिस्पर्धा चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य पूर्व और अमेरिका-चीन व्यापार तनाव जैसे लगातार जियोपॉलिटिकल जोखिमों से इमर्जिंग मार्केट्स से फंड का आउटफ्लो (Fund Outflow) बढ़ सकता है, जिससे भारतीय बाज़ार प्रभावित हो सकता है।

आगे की राह

एनालिस्ट्स सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं और बाज़ार में करेक्शन के दौरान फंडामेंटली मजबूत स्टॉक्स पर ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश कर रहे हैं। Nifty का 26,000 के स्तर से ऊपर सस्टेंड ब्रेकआउट बाज़ार की भावना में विश्वसनीय सुधार के लिए ज़रूरी माना जा रहा है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि बाज़ार में थोड़ी पॉजिटिविटी के साथ कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है, लेकिन जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट और इन्फ्लेशनरी प्रेशर को देखते हुए तत्काल आउटलुक थोड़ा अनिश्चित बना हुआ है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल मनी का लगातार इनफ्लो (Inflow) एक सपोर्ट दे रहा है, लेकिन फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है।

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