भारतीय शेयर बाज़ारों ने गुरुवार, **20 अगस्त 2026** को अपनी सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा। BSE Sensex **628** अंक चढ़कर **77,538** पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty **24,200** के पार निकल गया। घरेलू निवेशकों की खरीदारी और RailTel, Saatvik Green Energy जैसी कंपनियों को मिले बड़े ऑर्डर्स ने बाज़ार को सहारा दिया। हालांकि, RBI की हालिया बैठक के मिनट्स से बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की चिंता बाज़ार की सतर्कता को बढ़ा रही है।
सात दिनों की गिरावट पर ब्रेक
भारतीय शेयर बाज़ारों ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को ज़बरदस्त वापसी की। लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद, बाज़ार में आज चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। BSE Sensex 628 अंकों की बढ़त के साथ 77,538 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty 50 इंडेक्स 24,232 पर बंद हुआ, जिसने 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर को फिर से हासिल कर लिया। बैंकिंग, ऑटो और आईटी (IT) शेयरों में अच्छी खरीदारी रही, जिसने बाज़ार को सहारा दिया।
घरेलू निवेशकों का दम
इस रिकवरी में घरेलू संस्थागत निवेशकों (Domestic Institutional Investors) का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने बाज़ार में लगभग ₹3,537 करोड़ का निवेश किया, जिसने विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) की बिकवाली के दबाव को कुछ हद तक कम किया। विदेशी निवेशक ग्लोबल ब्याज दरों में अस्थिरता के चलते मुनाफावसूली कर रहे थे।
RailTel और Saatvik को मिले ऑर्डर
कॉर्पोरेट जगत से भी सकारात्मक खबरें आईं। RailTel Corporation of India ने बताया कि उसे Western Coalfields Limited से ₹164.79 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह प्रोजेक्ट अगले 60 महीनों में MPLS VPN नेटवर्क की स्थापना से जुड़ा है।
इसके अलावा, Saatvik Green Energy की सहायक कंपनी Saatvik Solar Industries को ₹190 करोड़ का सोलर PV मॉड्यूल सप्लाई करने का ऑर्डर मिला है। कंपनी को उम्मीद है कि यह ऑर्डर मार्च 2027 तक पूरा हो जाएगा। इन ऑर्डर से कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होगी, लेकिन निवेशकों की नज़र एग्जीक्यूशन टाइमलाइन पर भी रहेगी। हालिया नतीजों में यह भी देखा गया है कि इस तरह के कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव का जोखिम रहता है, इसलिए कॉस्ट कंट्रोल एक अहम फैक्टर होगा।
RBI की चिंताओं का असर
बाज़ार में तेजी के बावजूद, मैक्रो इकोनॉमिक संकेत निवेशकों को सतर्क कर रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 19 अगस्त 2026 को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के मिनट्स जारी किए। इन दस्तावेज़ों से पता चला कि जहां रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा गया, वहीं कई सदस्यों ने बढ़ती महंगाई (Inflation) पर चिंता जताई।
सदस्यों का मानना था कि अगर महंगाई का दबाव बना रहा या सप्लाई-साइड शॉक आए, तो सेंट्रल बैंक को अपनी न्यूट्रल पॉलिसी से हटकर भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार करना पड़ सकता है। यह संकेत निवेशकों के लिए एक सावधानी भरा माहौल बनाते हैं, क्योंकि उच्च ब्याज दरें कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ा सकती हैं और बाज़ार की लिक्विडिटी को प्रभावित कर सकती हैं।
आने वाले सत्रों में, निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह रिकवरी लगातार मांग और स्थिर ग्लोबल संकेतों के साथ बनी रह सकती है। निवेशक आने वाले महंगाई आंकड़ों और फॉरेन फंड फ्लो पर भी नज़र रखेंगे, जो हाल के दिनों में बाज़ार में अस्थिरता का कारण रहे हैं।
