Indian Markets: मिडिल ईस्ट टेंशन से शेयर बाज़ार में भूचाल, फार्मा-पावर में भी दिखी नरमी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Markets: मिडिल ईस्ट टेंशन से शेयर बाज़ार में भूचाल, फार्मा-पावर में भी दिखी नरमी
Overview

मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी निकासी के चलते भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट देखी गई। बैंक निफ्टी (Bank Nifty) समेत मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी गिरावट हावी रही। हालांकि, फार्मा और चुनिंदा पावर स्टॉक्स में कुछ मजबूती दिखी, पर वो भी बाज़ार की व्यापक कमजोरी से पूरी तरह अछूते नहीं रह पाए।

मिडिल ईस्ट तनाव और बाज़ार में दहशत

भारतीय शेयर बाज़ारों में मार्च 2026 के दौरान एक ज़बरदस्त बिकवाली का दौर चला। मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव रहा। इस संकट ने लंबे क्षेत्रीय युद्ध के डर को बढ़ाया, जिसने सीधे तौर पर तेल की सप्लाई को खतरे में डाला और ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा पहुंचीं, जो मार्च के अंत तक $116.70 के इंट्राडे हाई तक छू गईं।

भू-राजनीतिक चिंताओं और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से भी बड़ी बिकवाली देखने को मिली। FIIs ने अकेले मार्च में ₹1.14 लाख करोड़ की इक्विटी बेची, जो रिकॉर्ड मासिक निकासी है। इसके चलते 2026 के लिए कुल आउटफ्लो ₹1.27 लाख करोड़ हो गया।

इस रिस्क-एवर (risk-averse) सेंटिमेंट का असर पूरे बाज़ार पर दिखा। 30 मार्च को सेंसेक्स (Sensex) में दोपहर तक 1% से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 50 (Nifty 50) 22,500 के स्तर के नीचे फिसल गया। बैंक निफ्टी (Bank Nifty) का प्रदर्शन भी कमजोर रहा, जिसमें 28 मार्च तक करीब 2.16% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। ब्रॉडर इंडेक्स भी पीछे नहीं रहे, BSE 150 मिडकैप इंडेक्स और BSE 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 30 मार्च को करीब 1.4% की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 27 मार्च को 2.23% की गिरावट देखी गई, और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स हफ्ते के अंत तक 0.63% लुढ़क गया। इंडिया VIX (India VIX) जैसे वोलैटिलिटी (volatility) इंडेक्स में तेज़ी ने निवेशकों के डर को साफ दिखाया।

डिफेंसिव सेक्टरों पर भी गिरी गाज

इस व्यापक बिकवाली के बीच, कुछ सेक्टर ऐसे थे जिन्होंने शुरुआत में कुछ राहत दी। चुनिंदा फार्मा (Pharma) और पावर (Power) सेक्टर के स्टॉक्स में कुछ हद तक मजबूती दिखी। लेकिन, गहराई से देखने पर पता चलता है कि ये डिफेंसिव सेगमेंट भी बाज़ार की नकारात्मकता से पूरी तरह बच नहीं पाए। निफ्टी फार्मा इंडेक्स, जिसने महीने की शुरुआत में कुछ ताकत दिखाई थी, 20 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में 1.28% गिरा और 30 मार्च को 2% तक लुढ़क गया। 28 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में निफ्टी आईटी (IT) और फार्मा इंडेक्स ही इकलौते साप्ताहिक गेनर (gainer) रहे, लेकिन उनकी बढ़त महज़ 1.17% और 0.11% थी।

पावर सेक्टर में भी प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कुछ रिपोर्ट्स ने एनर्जी और PSU स्टॉक्स की मजबूती का ज़िक्र किया, जो 30 मार्च की बड़ी बिकवाली से पहले के हफ्तों में ब्रॉडर इंडेक्स के मुकाबले कम गिरे थे। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन (Power Grid Corporation) जैसे बड़े नामों को मार्च की शुरुआत में एनालिस्ट्स (analysts) से 'Sell' रेटिंग मिली, हालांकि मार्च के मध्य तक उन्हें 'Hold' कर दिया गया।

वैल्यूएशन और निवेशकों की पोजीशनिंग

मार्च 2026 के अंत तक, बैंक निफ्टी (Bank Nifty) का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 14.00 था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) का P/E 27.83 था, जो पिछले 7 सालों के औसत से करीब 7% कम था, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) अपने 7-साल के औसत से थोड़ा ऊपर 30.10 पर था। निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट (Nifty Midcap Select) का P/E 26.55 था, जो अपने 7-साल के औसत से करीब 23.34% नीचे था। हालांकि, ये वैल्यूएशन (valuations) आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन मौजूदा रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट और बढ़ते इंडिया VIX (India VIX) के कारण निवेशक पैसा लगाने से हिचकिचा रहे हैं।

मंदी की आहट: बाकी बचे शेयरों के लिए भी खतरे

डिफेंसिव सेक्टरों में शुरुआती मजबूती की कहानी के बावजूद, कई बड़े खतरे बने हुए हैं। फार्मा सेक्टर के लिए, भले ही हेल्थकेयर की डिमांड स्थिर रहती है, लेकिन बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई चेन (supply chain) में रुकावटों से मार्जिन पर दबाव पड़ने की चिंताएं हैं। पावर सेक्टर के लिए, भले ही यह इकोनॉमी ग्रोथ के लिए ज़रूरी है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सरकारी नीतियों पर निर्भरता मुख्य चिंताएं हैं। ग्लोबल लेवल पर डॉलर का मजबूत होना और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (bond yields) का बढ़ना भी बड़े डोमेस्टिक मार्केट्स (developed markets) को वैश्विक पूंजी के लिए ज़्यादा आकर्षक बना रहा है, जिससे भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स (emerging markets) से FIIs की निकासी जारी रह सकती है।

आगे का रास्ता और एनालिस्ट्स की राय

एनालिस्ट्स (Analysts) की राय भी सतर्क है। वे निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अनुशासित रहें और फंडामेंटली (fundamentally) मजबूत स्टॉक्स पर ध्यान दें। बाज़ार में वोलैटिलिटी (volatility) बने रहने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक डेवलपमेंट (geopolitical developments) और कच्चे तेल की कीमतों पर होगा। कुछ एनालिस्ट्स (analysts) का मानना है कि अगर तनाव कम हुआ तो अप्रैल सीरीज में बाज़ार तेज़ी से उबर सकता है, लेकिन नज़दीकी अवधि में अनिश्चितता बनी रहेगी।

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