26 अक्टूबर को भारतीय बाजार में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। जहां एक तरफ चुनिंदा मोमेंटम स्टॉक्स में खरीदारी रही, वहीं दूसरी ओर दिग्गज कंपनियां 52-वीक लो (52-week low) के स्तर पर फिसल गईं।
मोमेंटम स्टॉक्स की धूम
बाजार में आज निवेशकों का पूरा फोकस टेक्निकल ब्रेकआउट वाले शेयरों पर रहा। Oswal Agro Mills का शेयर 9% से ज्यादा उछला। इसके साथ ही, Vakrangee और Prizor Viztech ने भी अपने मेजर मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार करते हुए निवेशकों को आकर्षित किया। इन शेयरों में खरीदारी का रुझान यह दिखाता है कि मार्केट का एक हिस्सा अभी भी रिस्क लेने के मूड में है।
ब्लू-चिप्स पर भारी दबाव
छोटी कंपनियों में तेजी के उलट, बाजार के दिग्गज शेयरों में संस्थागत बिकवाली (Institutional Selling) साफ देखी गई। Bank of India, Tata Consumer Products, Voltas, और Canara Bank जैसी दिग्गज कंपनियां अपने 52-वीक लो के स्तर पर पहुंच गईं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेक्टर को लेकर अनिश्चितता और मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताओं के कारण बड़े निवेशक इन शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं।
आगे की राह
मौजूदा स्थिति बाजार में कन्फ्यूजन को दर्शाती है। जब निवेशक इंडेक्स लीडर्स को छोड़कर छोटे और ज्यादा वोलेटाइल शेयरों की तरफ भागते हैं, तो यह मार्केट में बड़े 'कन्विक्शन' की कमी को दिखाता है। E2E Networks जैसे शेयरों में दिख रही लिक्विडिटी की समस्या भी निवेशकों के लिए एक चेतावनी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या यह स्मॉल-कैप रैली टिक पाएगी या फिर ब्लू-चिप शेयरों की कमजोरी पूरे बाजार को नीचे खींच लेगी।
