भारती एयरटेल: NBFC सेक्टर में बड़ा दांव
Bharti Airtel नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर में उतरने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए कंपनी ₹20,000 करोड़ की पूंजी डालने की योजना बना रही है। Citigroup जैसे एनालिस्ट्स इसे Airtel के लिए एक 'नेचुरल एडजसेंसी' और अगले ग्रोथ इंजन के तौर पर देख रहे हैं। कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी, डेटा और कस्टमर इनसाइट्स का इस्तेमाल करके अपने बैलेंस शीट के जरिए इस बिजनेस को स्केल करने का लक्ष्य रख रही है। अच्छी बात यह है कि कंपनी का फ्री कैश फ्लो (FCF) मजबूत है और आने वाले राइट्स इश्यू का भुगतान भी जल्द होना है, ऐसे में इस नए वेंचर से कंपनी के कर्ज या नकदी प्रवाह पर कोई बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि NBFC प्लेटफॉर्म के लिए जरूरी कैपिटल यूटिलाइजेशन और रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न हासिल करने में कई साल लगेंगे। फिलहाल, Bharti Airtel का P/E रेशियो लगभग 38.94x है और मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹11.87 लाख करोड़ है। एनालिस्ट्स इसे 'मॉडरेट बाय' रेटिंग दे रहे हैं और इसका औसत टारगेट प्राइस ₹2,355.97 है, जो इसके नए फाइनेंशियल सर्विसेज आर्म की लंबी अवधि की उम्मीदों को दर्शाता है। हाल ही में S&P Global Ratings ने कंपनी की अर्निंग्स की मजबूती को देखते हुए इसका इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग 'BBB-' से बढ़ाकर 'BBB' कर दिया है।
ITC: सिगरेट पर टैक्स का असर
ITC के लिए, CLSA ने स्टॉक पर 'आउटपरफॉर्म' की रेटिंग तो बरकरार रखी है, लेकिन सिगरेट पर फरवरी 2026 में लागू हुई बढ़ी हुई अप्रत्यक्ष करों (indirect taxes) के असर को देखते हुए टारगेट प्राइस को ₹485 से घटाकर ₹367 कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ITC को प्रति सिगरेट पर अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्सेस (EBIT) को न्यूट्रल रखने के लिए कीमतों में करीब 33% की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इस कदम से फाइनेंशियल ईयर 2027 में सिगरेट कारोबार के वॉल्यूम और EBIT पर दबाव पड़ने का अनुमान है। हालांकि, ITC ने पहले भी टैक्स बढ़ोतरी को अपने ग्राहकों पर डालने की क्षमता दिखाई है, लेकिन यह देखना होगा कि मौजूदा महंगाई के दौर में उसके प्रोडक्ट्स की डिमांड कितनी इलास्टिक (elastic) रहती है। FY28 में रिकवरी की उम्मीद है, बशर्ते कि आगे और कोई टैक्स बढ़ोतरी न हो।
ABB India: ऊंचे वैल्यूएशन और मार्जिन पर दबाव
ABB India के मामले में, Kotak Institutional Equities ने वैल्यूएशन और मार्जिन दबाव को देखते हुए स्टॉक को 'रिड्यूस' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹5,750 रखा है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में भले ही कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो में 52% की जोरदार सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई जो ₹4,100 करोड़ तक पहुंच गए, और ₹104.7 बिलियन का बैकलॉग है, लेकिन मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। ऊंचे लागत वाले इन्वेंट्री और रॉ मैटेरियल्स की वजह से ABB को मार्जिन में धीमी सुधार की उम्मीद है। कंपनी अपने अनुमानित PAT मार्जिन रेंज के निचले स्तर पर कारोबार कर रही है। इसके शेयर का फॉरवर्ड P/E लगभग 63x है, या ट्रेलिंग अर्निंग्स पर 72-76x तक पहुंच सकता है। यह वैल्यूएशन, निजी कैपेक्स साइकिल की शुरुआत के लिए काफी हद तक पहले से ही डिस्काउंटेड (priced in) लगता है। हालांकि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है, लेकिन HSIE के एनालिस्ट्स ने ₹5,905 का टारगेट दिया है (54x P/E मल्टीपल पर), जो ऑर्डर की मजबूती को तो स्वीकार करता है लेकिन मार्जिन की दिक्कतों को भी। कंपनी को 2026 तक प्राइवेट कैपेक्स से बाजार में तेजी आने की उम्मीद है और वह 12-15% के PAT मार्जिन का अनुमान लगा रही है।
अर्बन कंपनी: मुनाफा कमाने की मशक्कत
Urban Company की बात करें तो, Morgan Stanley ने 'अंडरवेट' रेटिंग और ₹120 का टारगेट प्राइस बनाए रखा है। हाल ही में कंपनी का Instahelp वर्टिकल 50,000 डेली बुकिंग्स को पार कर गया है। बावजूद इसके, कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी की राह मुश्किल बनी हुई है, और Q3 FY26 में ₹21.26 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया गया, जो पिछली तिमाही से उलट है। रेवेन्यू में 38.03% की सालाना बढ़ोतरी के साथ यह ₹382.68 करोड़ रहा, लेकिन ऑपरेटिंग मार्जिन -9.23% पर निगेटिव था। मैनेजमेंट का अनुमान है कि Q3F28 तक कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA में ब्रेकइवन हासिल किया जा सकता है, लेकिन यह Instahelp जैसे वर्टिकल्स में भारी निवेश पर निर्भर है, जिससे नियर-टर्म मार्जिन पर असर पड़ रहा है। कंपनी का P/E रेशियो लगभग 76x है और मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹18,662 करोड़ है। MarketsMojo ने इसे 'स्ट्रॉन्ग सेल' रेटिंग दी है, जो कि इसके जोखिम भरे वैल्यूएशन और बिगड़ते फाइनेंशियल ट्रेंड्स को देखते हुए है। हालिया विश्लेषक सहमति (consensus) 'न्यूट्रल' रेटिंग और औसतन ₹131.33 के टारगेट प्राइस का सुझाव देती है।
Zomato: ग्रोथ और वैल्यूएशन की दुविधा
Zomato के लिए Jefferies ने 'बाय' रेटिंग और ₹480 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस में करीब 20% की लगातार ग्रोथ और मार्जिन में मामूली सुधार की उम्मीद है। फूड डिलीवरी मार्केट के 2030 तक 22-23% के CAGR से बढ़कर 45.15 बिलियन डॉलर का होने का अनुमान है। हालांकि, क्विक कॉमर्स सेगमेंट, खासकर Blinkit, में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। मैनेजमेंट का कहना है कि प्राइसिंग को तर्कसंगत (rational) रखने की जरूरत है, जो ग्रोथ के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, भले ही मार्जिन को लेकर उच्च आत्मविश्वास हो। Q1FY26 में Blinkit का रेवेन्यू बढ़कर ₹2,400 करोड़ हो गया, जो Zomato के फूड डिलीवरी रेवेन्यू ₹2,261 करोड़ से ज्यादा है। लेकिन, Blinkit के एडजस्टेड EBITDA में घाटा बढ़ा है। Zomato का ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ P/E रेशियो 1,000x से काफी ऊपर है, जो एक बड़ा वैल्यूएशन प्रीमियम दिखाता है। भले ही कंपनी का फूड डिलीवरी बिजनेस ₹12.03 लाख करोड़ के सकल उत्पादन (gross output) में योगदान दे रहा है, लेकिन क्विक कॉमर्स की पूंजी-गहन (capital-intensive) प्रकृति के कारण निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है।