मार्च 2026 में भारतीय शेयर बाजार ने एक बड़ी गिरावट का सामना किया, जिसमें निफ्टी 50 इंडेक्स 11% से अधिक लुढ़क गया। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ने इस करेक्शन (Correction) को और गंभीर बना दिया। देश का मार्केट कैप (Market Cap) साल-दर-तारीख (Year-to-date) 533 अरब डॉलर से अधिक घट गया, जो पिछले 15 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है। इस उथल-पुथल के बावजूद, ईटीएफ (ETFs) और इंडेक्स फंड्स (Index Funds) जैसे 'पैसिव शेयर फंड्स' ने रिकॉर्ड ₹30,235 करोड़ का नेट इनफ्लो (Net Inflow) आकर्षित किया।
अकेले डोमेस्टिक शेयर ईटीएफ (Domestic Share ETFs) ने फरवरी की तुलना में लगभग छह गुना बढ़कर ₹23,820 करोड़ जुटाए, जबकि इंडेक्स फंड्स में इनफ्लो लगभग दोगुना होकर ₹6,415 करोड़ रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों ने बाजार में आई इस गिरावट को एक मौके के तौर पर इस्तेमाल किया, खासकर भू-राजनीतिक स्थिति के कारण।
यह बड़े पैमाने पर हुआ पैसिव इनफ्लो (Passive Inflow) बताता है कि भारतीय निवेशक अब परिपक्व (Mature) हो रहे हैं और लंबी अवधि के निवेश के लिए बाजार की गिरावट का फायदा उठाना सीख रहे हैं। यह सामान्य रिटेल भागीदारी (Retail Participation) के विपरीत है, जो अक्सर एक्टिव फंड्स (Active Funds) में देखी जाती है, हालांकि मार्च में एक्टिव फंड्स में भी ₹40,450 करोड़ का अच्छा इनफ्लो आया था। फिर भी, डोमेस्टिक इक्विटी ईटीएफ फोलियो (Domestic Equity ETF Folios) में मार्च में करीब 6 लाख (600,000) की बढ़ोतरी ने पैसिव ऑप्शंस में व्यक्तिगत निवेशकों की बढ़ती रुचि को साफ दिखाया। वैश्विक ईटीएफ बाजार (Global ETF Market) भी सक्रिय रहा, जहां मार्च में कुल 174.42 अरब डॉलर का इनफ्लो आया, जिसमें इक्विटी ईटीएफ ने 54.12 अरब डॉलर आकर्षित किए।
जबकि भारतीय पैसिव फंड्स में अक्सर संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) पैसा लगाते हैं, रिटेल फोलियो में वृद्धि व्यापक स्वीकार्यता का संकेत देती है। वैल्यूएशन (Valuations) भी अब ज्यादा वाजिब हो गए हैं; निफ्टी 50 का पीई रेश्यो (PE Ratio) अनुमानित फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) की कमाई के मुकाबले करीब 20-21 गुना है, और MSCI इंडिया इंडेक्स का पीई रेश्यो मार्च में 22.34 था, जो पहले के मुकाबले कम ओवरवैल्यूड (Overvalued) बाजार का संकेत देता है। वैल्यूएशन में यह नरमी, वैश्विक दबावों के बावजूद भारत के आर्थिक दृष्टिकोण (Economic Outlook) में विश्वास के साथ मिलकर पैसिव निवेश का समर्थन कर सकती है।
पैसिव इनफ्लो में इस उछाल और कुछ जानकारों के इस विचार के बावजूद कि सबसे बुरा दौर शायद बीत चुका है, कई बड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Conflict) एक बड़ी चिंता है, जो वैश्विक अस्थिरता (Global Volatility) को बढ़ा सकता है और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) पर असर डाल सकता है। इसका सीधा असर भारत की आयात लागत (Import Costs), महंगाई (Inflation) और व्यापार संतुलन (Trade Balance) पर पड़ता है।
फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने मार्च में भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड ₹1.14 लाख करोड़ की निकासी की, जो संघर्ष से जुड़े वैश्विक जोखिम से बचने (Risk Aversion) और कमजोर होते रुपए (Weakening Rupee) के कारण था। यह निकासी पहले से ही 533 अरब डॉलर से अधिक के नुकसान झेल रहे बाजार पर और दबाव डालती है। एनर्जी सेक्टर ईटीएफ (Energy Sector ETFs) में कुछ इनफ्लो आया, लेकिन अधिकांश सेक्टर्स (Sectors) में व्यापक गिरावट एक चेतावनी संकेत है। निफ्टी 50 की मार्च में 11.36% की गिरावट, पिछले छह सालों में इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन था, जो अतीत के पैनिक-सेलिंग (Panic Selling) वाले डाउनटर्न की याद दिलाता है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में कुछ और, हालांकि सीमित, गिरावट संभव है। भारत अपनी लगभग 88% तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जो इसे सप्लाई में रुकावटों और कीमतों में झटकों के प्रति संवेदनशील बनाता है।
विश्लेषक भारत की स्थिर अर्थव्यवस्था (Stable Economy) और नीतियों (Policy Actions) का हवाला देते हुए अप्रैल में बाजार में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। एसआईपी (SIP) के जरिए लगातार मजबूत योगदान, जो मार्च में रिकॉर्ड ₹32,087 करोड़ तक पहुंच गया, रिटेल निवेशकों की निरंतर प्रतिबद्धता (Commitment) को दर्शाता है। कम लागत (Low Costs) और पारदर्शिता (Transparency) के साथ-साथ बाजार के चक्रों (Market Cycles) की बेहतर समझ के कारण पैसिव निवेश की ओर झुकाव जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाएं, वैश्विक ब्याज दर नीतियां (Global Interest Rate Policies) और घरेलू आर्थिक डेटा (Domestic Economic Data) बाजार की धारणा (Market Sentiment) और इन इनफ्लो की स्थिरता को आकार देंगे।