Indian Equities vs Gold: 2026 में कौन मारेगा बाजी? फंड मैनेजरों की राय, सोने में दिख रही बड़ी चमक!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Equities vs Gold: 2026 में कौन मारेगा बाजी? फंड मैनेजरों की राय, सोने में दिख रही बड़ी चमक!
Overview

Moneycontrol Mutual Fund Summit में शामिल हुए अनुभवी फंड मैनेजर्स ने 2026 के लिए इक्विटी (Equities) को पसंद बताया है, लेकिन उनकी उम्मीदें मुनाफे (Earnings) में बढ़ोतरी और स्थिर कॉर्पोरेट खर्च (Corporate Capex) पर टिकी हैं। वहीं, ग्लोबल अनिश्चितताओं के चलते सोने (Gold) में तगड़ी तेजी का अनुमान है।

इक्विटी पर 'कंडीशनल' भरोसा

Moneycontrol Mutual Fund Summit में जुटे फंड मैनेजर्स 2026 के लिए इक्विटी को पसंद कर रहे हैं, लेकिन उनकी उम्मीदें कुछ शर्तो पर टिकी हैं। Axis Mutual Fund के CIO, आशीष गुप्ता के मुताबिक, पिछले साल निफ्टी (Nifty) ने करीब 10% का रिटर्न दिया था, जो उम्मीद से बेहतर है। हालांकि, उनका मानना है कि कम महंगाई के दौर में 15-20% सालाना रिटर्न की उम्मीद रखना ठीक नहीं होगा। मैनेजर्स का मानना है कि 2026 के अंत तक निफ्टी 50 का लक्ष्य लगभग 27,200 से 28,850 के बीच रह सकता है। 2025-26 कैलेंडर ईयर के लिए भारतीय कंपनियों के मुनाफे (Earnings) में 13-16% की ग्रोथ का अनुमान है। 2026 में निफ्टी 50 कंपनियों के मुनाफे में डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। फिलहाल, निफ्टी का P/E रेश्यो 22.5 के आसपास है, जो 3 साल के औसत 25.2x के करीब है। लेकिन सेंसेक्स (Sensex) का P/E अपने 15 साल के औसत से ऊपर है, ऐसे में शेयर की वैल्यूएशन (Valuation) बढ़ाने के लिए मुनाफे में तेजी बहुत जरूरी होगी।

सोने (Gold) का मजबूत आउटलुक

इक्विटी के मुकाबले सोने का नज़रिया काफी बुलिश (Bullish) है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना $4,000 से बढ़कर $6,200 प्रति औंस के पार जा सकता है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक तनाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते डेफिसिट (Deficit) हैं। सेंट्रल बैंक की ओर से सोने की मांग (Demand) भी कीमतों को सहारा दे रही है। सोना हमेशा से एक सेफ-हेवन (Safe-Haven) एसेट रहा है और मुश्किल वक्त में इक्विटी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है। पिछले 2000 से अब तक, सोने ने रुपये के टर्म्स में निफ्टी 50 को पीछे छोड़ा है।

घरेलू मजबूती और रिस्क फैक्टर

भारत की अर्थव्यवस्था भले ही मजबूत दिख रही हो और GDP ग्रोथ दुनिया में सबसे ज्यादा रहने का अनुमान है, लेकिन भारतीय इक्विटी के लिए कुछ रिस्क भी हैं। कुछ सेगमेंट में वैल्यूएशन काफी बढ़ी हुई है, खासकर सेंसेक्स (Sensex) का P/E अपने 15 साल के औसत से ऊपर है। इसके अलावा, गिरता हुआ भारतीय रुपया (Rupee) विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर असर डाल सकता है। सबसे बड़ा रिस्क यह है कि अगर ग्लोबल अनिश्चितताएं बढ़ीं तो उम्मीद के मुताबिक मुनाफे (Earnings) में ग्रोथ नहीं आई, तो शेयर कीमतों पर दबाव आ सकता है। हालांकि, भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री (Mutual Fund Industry) मजबूत बनी हुई है। जनवरी 2026 तक AUM (Assets Under Management) ₹81.01 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, जो लगातार SIP इनफ्लो (SIP Inflows) से संभव हुआ है।

आगे का अनुमान

2026 में इक्विटी के लिए रिटर्न वैल्यूएशन बढ़ने से नहीं, बल्कि मुनाफे (Earnings) में बढ़ोतरी से आएगा। कॉर्पोरेट केपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में तेजी और लगातार मुनाफे का प्रदर्शन इक्विटी के लिए बहुत जरूरी होगा। दूसरी ओर, सोना अपने सेफ-हेवन स्टेटस और मैक्रो (Macro) डिमांड के चलते बेहतर रिटर्न दे सकता है। निवेशकों को वैल्यूएशन, करेंसी में उतार-चढ़ाव और मुनाफे की ग्रोथ पर निर्भरता जैसे कारकों को ध्यान में रखना होगा। कुल मिलाकर, 2026 में सभी एसेट क्लास (Asset Classes) से मॉडरेट रिटर्न की उम्मीद है, जिसके लिए अनुशासित निवेश रणनीति (Investment Strategy) और डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो (Diversified Portfolio) की जरूरत होगी।

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