बाजार की उथल-पुथल और 'डर के सूचकांक' का सिग्नल
मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी उथल-पुथल भरा रहा। इस दौरान निवेशकों की घबराहट को मापने वाला सूचकांक India VIX भी तेजी से बढ़ा, जो गहरे निवेशक सरोकार को दिखाता है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा आपूर्ति की चिंताएं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर रुपया, इन सबने मिलकर Nifty 50 इंडेक्स को मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दी, जिसमें इंडेक्स करीब 2,700 अंक नीचे आ गया। India VIX 23 मार्च के आसपास 27 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, हाल के दिनों में Nifty 50 के कमजोर रहने के बावजूद India VIX में आई गिरावट यह संकेत दे रही है कि बिकवाली का दबाव कम हो सकता है और बाजार एक अस्थायी निचले स्तर (temporary bottom) पर पहुंच सकता है।
India VIX के आंकड़े क्या कहते हैं?
फिलहाल India VIX 26 से 27 के दायरे में बना हुआ है। यह वैसी ही बड़ी उठा-पटक को दर्शाता है जैसी भू-राजनीतिक चिंताओं के समय CBOE VIX जैसे ग्लोबल इंडेक्स में देखी जाती है। ऐतिहासिक रूप से, India VIX में तेज उछाल के बाद अक्सर Nifty 50 में छोटी अवधि के लिए तेजी आई है। यह पैटर्न पिछले नौ में से आठ बार देखा गया है, अगर हम COVID-19 महामारी जैसी बड़ी मंदी को छोड़ दें। Nifty का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेश्यो अब लगभग 20 पर है, जो पहले के ऊंचे स्तरों से कम है और मीडियम टर्म के निवेशकों के लिए एक उचित वैल्यू (fairer value) पेश कर सकता है। मार्च में स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में भी बड़ी गिरावट देखी गई, जो लार्ज-कैप बेंचमार्क इंडेक्स के प्रदर्शन के अनुरूप है। यह एक जाना-माना तथ्य है कि बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव बाजार की अस्थिरता (volatility) को बढ़ाता है और ग्लोबल स्टॉक रिटर्न को प्रभावित करता है।
सावधानी क्यों जरूरी है?
भले ही India VIX गिर रहा हो, जो डर के कम होने का संकेत दे सकता है, लेकिन इसे बाजार में पक्के तौर पर आई रिकवरी का नहीं, बल्कि एक संभावित अस्थायी ठहराव (possible temporary pause) का संकेत मानना महत्वपूर्ण है। मुख्य भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं। मध्य पूर्व में तनाव, जिससे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है, अनिश्चितता पैदा कर रहा है। कुछ विश्लेषक यह भी बताते हैं कि बाजार के बदलते चलन, जैसे साप्ताहिक इंडेक्स ऑप्शन्स का बढ़ता महत्व, VIX की मासिक अस्थिरता को मापने की विश्वसनीयता को बदल सकते हैं। बाजार का समग्र रुझान (overall trend) अभी भी नाजुक है, Nifty शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है और इसमें मजबूत बुलिश रिवर्सल के संकेत नहीं हैं। जब तक भू-राजनीतिक चिंताएं बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तब तक बाजार में अधिक अस्थिरता संभव है।
आगे क्या उम्मीद करें?
विश्लेषक सतर्क आशावाद (cautiously optimistic) दिखा रहे हैं। उनका मानना है कि बाजार में हालिया करेक्शन ने मीडियम-टर्म के नजरिए वाले निवेशकों के लिए बेहतर खरीदारी के अवसर पैदा किए हैं, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार ने एक ठोस निचला स्तर बना लिया है। आगे चलकर मध्य पूर्व संघर्ष में नरमी, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और आगामी चुनावों के नतीजे जैसे कारक महत्वपूर्ण होंगे। बाजार की भविष्य की दिशा संभवतः इस बात पर निर्भर करेगी कि मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाएं कब तक और कितनी गंभीर रूप से बनी रहती हैं और उनका भारत पर व्यापक आर्थिक प्रभाव क्या होता है।