इंडिया-यूएस ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल किए जाने की खबर आते ही भारतीय शेयर बाज़ारों में एक ज़बरदस्त तेजी आई। इस समझौते के तहत, भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर टैरिफ 25% से घटकर 18% कर दिया गया है, जिससे निर्यात को बड़ा बूस्ट मिलेगा। इस खबर का असर यह हुआ कि BSE Sensex 2.54% चढ़कर 83,739 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty-50 भी 2.55% की बढ़त के साथ 25,728 पर पहुंच गया। इस जोरदार रैली से BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹12 लाख करोड़ से ज़्यादा बढ़कर लगभग ₹467.20 लाख करोड़ हो गया।
इस ट्रेड डील का सबसे ज़्यादा फायदा एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स को मिला, खासकर कपड़ा (Textile) और समुद्री भोजन (Seafood) निर्यात करने वाली कंपनियों को। इसके अलावा, केमिकल, फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स ने भी शानदार प्रदर्शन किया। रियलटी सेक्टर ने तो 4% से ज़्यादा की छलांग लगाई, वहीं अन्य प्रमुख सेक्टर्स 3% से ज़्यादा चढ़े। यह तेज़ी सिर्फ लार्ज-कैप तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में भी लगभग 2.7% से 2.9% की बढ़त देखी गई, जिसने बाज़ार में व्यापक भागीदारी का संकेत दिया।
हालांकि, बाज़ार की इस तेज़ी के बीच कुछ चिंताजनक पहलू भी नज़र आए। कई कम कीमत वाले शेयर्स (low-priced stocks) अपर सर्किट (upper circuit) को हिट करते दिखे, जो बाज़ार में कुछ हद तक सट्टेबाजी (speculative activity) की ओर इशारा करता है। यह पिछले साल बजट 2026 के बाद की स्थिति से थोड़ा अलग है, जब डेरिवेटिव्स पर STT (Securities Transaction Tax) में बढ़ोतरी के बाद बाज़ार में, खासकर मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में, भारी बिकवाली देखी गई थी।
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस तेज़ी की मजबूती आगे विदेशी फंड के फ्लो (foreign capital inflows) और कंपनियों के नतीजों (corporate earnings) पर निर्भर करेगी। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारतीय इक्विटी के लिए मीडियम-टर्म का आउटलुक पॉजिटिव बताया है और फाइनेंशियल ईयर 26-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान जताया है। वहीं, जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) को उम्मीद है कि 2026 की दूसरी छमाही से बाज़ार में एक और बड़ी तेज़ी आ सकती है। फिलहाल, VIX (Volatility Index) का 16.34 पर आना यह बताता है कि नज़दीकी अवधि में बाज़ार में ज़्यादा अस्थिरता की उम्मीद कम है।