बाजार में लौटी रौनक, Sensex-Nifty 0.8% ऊपर
सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजारों ने जोरदार वापसी की। तीन दिनों की लगातार गिरावट के बाद, बेंचमार्क इंडेक्स Sensex 0.8% की उछाल के साथ 77,304 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 भी 0.8% की तेजी के साथ 24,093 पर बंद हुआ। इस रैली ने BSE लिस्टेड कंपनियों की मार्केट कैप में ₹6.6 ट्रिलियन का इजाफा किया, जो अब बढ़कर ₹468 ट्रिलियन हो गया है।
Sun Pharma की बड़ी डील और Reliance का प्रदर्शन
इस बाजार में जान फूंकने वाली सबसे बड़ी खबर Sun Pharmaceutical Industries से आई, जिसके शेयर 7.03% चढ़ गए। यह जुलाई 2021 के बाद उनकी सबसे बड़ी एकदिनी (single-day) तेजी थी। दरअसल, कंपनी ने अमेरिकी फर्म Organon को $11.75 बिलियन में नकद (all-cash deal) खरीदने का ऐलान किया है। इस डील के 2027 की शुरुआत में पूरा होने की उम्मीद है। Sun Pharma का अनुमान है कि इस अधिग्रहण से अगले चार सालों में $350 मिलियन से ज्यादा की सिनर्जी (synergies) मिलेगी और संयुक्त कंपनी का रेवेन्यू लगभग $12.4 बिलियन हो जाएगा, जो इसे दुनिया की टॉप 25 फार्मा कंपनियों में शामिल कर देगा।
वहीं, Reliance Industries के शेयर भी 2.9% चढ़े।
मिडिल ईस्ट से शांति की उम्मीदें और तेल की चाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक माहौल रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक अंतरिम डील का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव अमेरिकी पोर्ट प्रतिबंधों में ढील के बदले में हो सकता है। इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है। हालांकि, सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent crude) $107 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो सप्लाई को लेकर जारी चिंताओं को दर्शाता है।
स्मॉल और मिडकैप में भी जोश, सेक्टरों की बहार
बड़ी कंपनियों के अलावा, छोटे और मझोले शेयरों (Midcap और Smallcap) में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 1.5% और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 1.9% की उछाल के साथ बंद हुए। सभी सेक्टरों में खरीदारी दिखी। Nifty Pharma इंडेक्स 2.6% की बढ़त के साथ टॉप पर रहा, जिसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (+2.53%) का नंबर आया। Nifty IT इंडेक्स में भी 2.2% का सुधार देखा गया। बाजार में कुल 3,023 शेयर चढ़े, जबकि 1,345 शेयरों में गिरावट आई।
Reliance और Sun Pharma: आगे की रणनीति और वैल्यूएशन
Sun Pharma की Organon डील महिलाओं के स्वास्थ्य (women's health) और बायोसिमिलर (biosimilars) सेगमेंट में ग्लोबल पैठ बनाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य बायोसिमिलर में टॉप-10 ग्लोबल खिलाड़ी बनना है। इस अधिग्रहण के बाद कंपनी पर $8.6 बिलियन का नेट कर्ज आने की उम्मीद है, जिससे उसका नेट डेट टू EBITDA रेश्यो 2.3x तक पहुंच सकता है।
वहीं, Reliance Industries ने Q4 FY26 में ₹16,971 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 12.6% कम था। हालांकि, जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) जैसे कंज्यूमर बिजनेस के दम पर रेवेन्यू 12.9% बढ़कर ₹325,290 करोड़ पर पहुंच गया। ओ2सी (O2C) और ऑयल एंड गैस सेगमेंट में चुनौतियों के कारण प्रॉफिट प्रभावित हुआ, जिस पर पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी दिखा। Reliance का P/E रेश्यो 20.4-22.28 के बीच है, जो साथी कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम (~5.2x) और भारत पेट्रोलियम (~5.5x) से ज्यादा है। यह वैल्यूएशन कंपनी के विविध मॉडल पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
Sun Pharma का ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ (TTM) P/E रेश्यो लगभग 32.03x है, जो Dr. Reddy's Laboratories (19.68x) और Cipla (21.6x) जैसे पीयर्स से ऊपर है।
जोखिम अभी भी बरकरार: भू-राजनीतिक तनाव और डील का एग्जीक्यूशन
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अभी भी एक बड़ी चिंता है। फरवरी 2026 के अंत से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए एक संरचनात्मक खतरा पैदा हो गया है। सिटीग्रुप (Citigroup) का अनुमान है कि अगर यह बंद रहा तो ब्रेंट क्रूड $150 प्रति बैरल तक जा सकता है। भारत जैसे तेल आयात पर भारी निर्भर देश के लिए, लगातार उच्च कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं और ट्रेड डेफिसिट को चौड़ा कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव किसी भी स्थायी बाजार रैली को सीमित कर सकते हैं।
Sun Pharma के Organon अधिग्रहण में इंटीग्रेशन (integration) और $8.6 बिलियन के कर्ज के प्रबंधन जैसे एग्जीक्यूशन जोखिम (execution risks) भी शामिल हैं। फार्मा सेक्टर को वैश्विक मूल्य निर्धारण दबाव और बढ़ते R&D खर्चों का भी सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर, बाजार की भावना "सतर्क आशावाद" (cautious optimism) की है, जो मैक्रो-इकोनॉमिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को स्वीकार करती है।
