India Stocks: विदेशी निवेशक AI में कर रहे निवेश, भारतीय शेयर बेचकर हो रहे हैं बाहर!

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Stocks: विदेशी निवेशक AI में कर रहे निवेश, भारतीय शेयर बेचकर हो रहे हैं बाहर!
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का दौर जारी है, जिसकी वजह से Nifty 50 पिछले **18 महीनों** से एक दायरे में दिख रहा है। इस बिकवाली के पीछे मुख्य कारण ग्लोबल फंड्स का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित बाज़ारों की ओर जाना और रुपये का कमजोर होना है।

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विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से लगातार पैसे निकाल रहे हैं, जिसका अनुमान 2025 की शुरुआत से करीब $38 अरब तक लगाया जा रहा है। इस बिकवाली के कारण MSCI India Index अपने क्षेत्रीय साथियों से पिछड़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ग्लोबल फंड्स का पैसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आगे माने जाने वाले दक्षिण कोरिया (South Korea) और ताइवान (Taiwan) जैसे बाज़ारों की ओर जा रहा है। इन देशों में AI से जुड़े क्षेत्रों में भारी निवेश हो रहा है, जिसके 2026 तक $527 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, भारत के शेयर बाज़ार, जिसका कुल मार्केट कैप लगभग ₹1.96 लाख करोड़ है, को कुछ निवेशक फिलहाल AI ग्रोथ स्टोरी में कमज़ोर मान रहे हैं।

इसके अलावा, विदेशी निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय भारतीय रुपये (INR) का लगातार कमजोर होना और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ रहा दबाव है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब INR 93 के स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में, नए नियमों के कारण विदेशी बॉन्ड निवेशकों के लिए करेंसी हेजिंग (currency hedging) का खर्च एक साल में 70 बेसिस पॉइंट तक बढ़ गया है। कमजोर रुपया डॉलर में मिलने वाले रिटर्न को कम कर देता है, जिससे और निवेशक बिकवाली का रुख कर सकते हैं। साथ ही, कंपनी की कमाई पर भी दबाव दिख रहा है। भले ही देश की GDP ग्रोथ अच्छी है, लेकिन ऊंची लागत, खासकर तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों का मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रहा है। तेल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले करीब 34% ज़्यादा हैं। Nomura के एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो कमाई के अनुमान 10-15% तक ज़्यादा आंकी गई हो सकती हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने Nifty 50 का टारगेट 15% घटाकर 24,600 कर दिया है।

भारतीय शेयर अभी भी अन्य उभरते बाज़ारों (emerging markets) की तुलना में महंगे दिख रहे हैं। Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फिलहाल लगभग 21.2x है, जो सितंबर 2024 के लगभग 24x से कम है। हालांकि, यह MSCI Emerging Markets Index के P/E रेश्यो 16.3x से काफी ज़्यादा है। भले ही यह अंतर कम हुआ है, और भारत के मजबूत गवर्नेंस और बड़े बाज़ार को सराहा जा रहा है, लेकिन करेंसी हेजिंग की ऊंची लागत विदेशी निवेशकों के लिए अन्य उभरते देशों की तुलना में वैल्यू ढूंढना मुश्किल बना रही है।

तेल आयात से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों को ज़्यादातर एक अस्थायी मसला माना जा रहा है। हालिया खबरों के अनुसार, जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के खुले रहने और शांति प्रयासों में प्रगति से कच्चे तेल की कीमतों में $90 प्रति बैरल से नीचे की गिरावट आई है, जिससे तत्काल आपूर्ति की चिंता कम हुई है। हालांकि, तेल की कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले काफी ज़्यादा हैं। दूसरी ओर, भारत में AI पर स्पष्ट और बड़े घरेलू फोकस की कमी को एक स्थायी कारण माना जा रहा है, जिसकी वजह से ग्लोबल निवेशक अपना पैसा कहीं और ले जा रहे हैं। भारत IT सर्विसेज में मजबूत है, लेकिन मौजूदा निवेश भारी रूप से AI हार्डवेयर और चिप मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित है, जिस क्षेत्र में अन्य एशियाई देश फिलहाल आगे दिख रहे हैं।

भारतीय शेयरों में और गिरावट की आशंका करेंसी की लगातार कमजोरी और हेजिंग की बढ़ती लागत पर टिकी है। इससे बॉन्ड निवेश कम आकर्षक हो सकते हैं और शेयर रिटर्न में उतार-चढ़ाव आ सकता है। एक बड़ा जोखिम कंपनी के मुनाफे के अनुमानों में और कटौती की संभावना है, खासकर अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ीं या मांग कमज़ोर हुई। जबकि अन्य उभरते बाज़ारों में शुरुआती बिकवाली के बाद विदेशी पैसा वापस लौटा है, भारत में लगातार नेट आउटफ्लो (net outflows) देखने को मिल रहा है। यह दर्शाता है कि निवेशक AI ट्रेंड और उच्च लागतों के कारण दूसरे बाज़ारों को तरजीह दे रहे हैं। बाज़ार में करीब 15% की गिरावट यह संकेत देती है कि यह सिर्फ उद्योगों के बीच का बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक बाज़ार सुधार (market correction) है, जिसका मतलब है कि विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर जोखिम से बच रहे हैं।

हालांकि, मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, भारत की लंबी अवधि की विकास क्षमता एक बड़ी सकारात्मक बात है। अनुमान है कि भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। बेहतर आर्थिक संकेत और स्थानीय मांग पर ध्यान, जो सरकारी कदमों से प्रेरित है, 2026 की दूसरी छमाही से कंपनी के मुनाफे को बढ़ा सकता है। विदेशी निवेशक अभी भी अल्पावधि के आर्थिक समाचारों और वैश्विक धन के प्रवाह पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन भारत के मजबूत फंडामेंटल – जैसे कि इसकी युवा आबादी, स्पष्ट नियम और गहरा बाज़ार – लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इसे आकर्षक बनाए रखेंगे। मौजूदा शेयर की कीमतें, हालांकि अभी भी ऊंची हैं, उन स्तरों के करीब पहुंच रही हैं जहां से अक्सर रिकवरी देखी गई है, जिससे धैर्यवान निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.