L&T और HDFC AMC: एक्सपर्ट की पहली पसंद
Marketsmith India के एक्सपर्ट Mayuresh Joshi ने Larsen & Toubro (L&T) को अपने पोर्टफोलियो में एक अहम जगह दी है। इसकी मुख्य वजह भारत का लगातार बढ़ता कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकिल है। कंपनी के पास दिसंबर 2025 तक के लिए करीब ₹7.33 लाख करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो अगले दो साल की कमाई की गारंटी देती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में पुराने ऑर्डर्स घटने और एग्जीक्यूशन बेहतर होने से कंपनी के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। L&T इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में फैली हुई है, और ग्रीन हाइड्रोजन व डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹5.77 लाख करोड़ है, और इसका P/E रेश्यो 30-35 के बीच है।
इसी तरह, HDFC Asset Management Company (HDFC AMC) भी एक्सपर्ट्स की नजर में एक अच्छा विकल्प है। यह कंपनी रिटेल इन्वेस्टर्स की बढ़ती मार्केट पार्टिसिपेशन और वेल्थ मैनेजमेंट की बढ़ती मांग से लाभान्वित हो रही है। HDFC AMC का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.22 लाख करोड़ है और इसका P/E रेश्यो लगभग 42 के आसपास है। ICICI Prudential AMC और Nippon India AMC जैसे प्रतिस्पर्धियों के बावजूद, HDFC AMC भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है।
नई EV कंपनियों और IT सेक्टर पर सतर्कता
Marketsmith India ने Ola Electric जैसी नई EV कंपनियों से फिलहाल दूर रहने की रणनीति अपनाई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्थापित EV प्लेयर्स के पास पहले से ही सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है, जबकि Ola Electric जैसी नई कंपनियों को डीलरशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की जरूरत होगी। Ola Electric, जिसका वैल्यूएशन लगभग $4.4 बिलियन के आसपास है, IPO लाने की तैयारी में है, लेकिन अभी भी उसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी, और कंपनी ने अभी तक मुनाफा कमाना शुरू नहीं किया है।
IT सेक्टर में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़ा बदलाव ला रहा है। कंपनियों को AI के लिए नए रोडमैप बनाने होंगे, जिसके लिए अपस्किलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में अतिरिक्त कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत पड़ सकती है। इससे उनके मार्जिन, डिविडेंड और बायबैक पर दबाव आ सकता है।
ITC: कैपिटल एलोकेशन पर सवाल
ITC Limited के सिगरेट बिजनेस से स्थिर कमाई जारी रहने की उम्मीद है, भले ही कीमतों में कुछ बदलाव हों। हालांकि, एक्सपर्ट्स को कंपनी की नई प्रोडक्ट कैटेगरी और मार्केट एक्सपेंशन के लिए कैपिटल एलोकेशन (पूंजी आवंटन) रणनीति पर चिंता है। ऐतिहासिक रूप से, FMCG में विस्तार के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है और इसमें समय लगता है, जिससे रिटर्न रेशियो प्रभावित हो सकता है। ITC का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹3.93 लाख करोड़ है और इसका TTM P/E रेश्यो 19-20 के आसपास है। कंपनी का मुख्य तंबाकू बिजनेस स्थिरता प्रदान करता है, लेकिन कैपिटल-इंटेंसिव नए व्यवसायों में आक्रामक विविधीकरण पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी।
RBI का सख्त कदम: क्या मार्केट होगा स्थिर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1 अप्रैल, 2026 से सट्टा ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बदलाव लागू किए हैं। नए नियमों के तहत, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज को मिलने वाली क्रेडिट फैसिलिटी के लिए 100% कोलैटरल (जमानत) देना होगा। साथ ही, बैंक ब्रोकर्स के प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग को फाइनेंस नहीं कर पाएंगे। इन उपायों और हाल ही में डेरिवेटिव्स पर टैक्स एडजस्टमेंट का उद्देश्य बैंकों को डी-रिस्क करके और अत्यधिक लीवरेज को हतोत्साहित करके वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना है। हालांकि इससे कुछ सेगमेंट्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकता है, लेकिन यह रेगुलेटरी कदम एक अधिक स्थिर और परिपक्व मार्केट एनवायरनमेंट को बढ़ावा देगा। बैंकिंग सेक्टर का औसत P/E रेश्यो करीब 12.6x है, जो इंडस्ट्री के इन बदलावों को अपनाने के लिए तैयार होने का संकेत देता है।