2024 के अंत से विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से $65 अरब की भारी निकासी की है। हालांकि, हर महीने आने वाले ₹30,000 करोड़ के SIP इनफ्लो ने बाजार को बड़े झटके से बचा रखा है।
भारतीय शेयर बाजार में 2024 के अंत से बड़ा बदलाव देखने को मिला है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने अब तक करीब $65 अरब की रकम भारतीय बाजार से निकाली है, जिसने मार्केट के पूरे लैंडस्केप को बदल दिया है। इस निकासी की वजह से MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी गिरकर 10% के आसपास रह गई है।
क्यों बाजार छोड़ रहे हैं विदेशी निवेशक?
इस बिकवाली के पीछे कई कारण हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर अब अपना पैसा उन बाजारों में लगा रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ग्रोथ का फायदा उठा रहे हैं, जैसे कि साउथ कोरिया और ताइवान। साथ ही, भारतीय बाजार का महंगा वैल्यूएशन भी निवेशकों की चिंता का सबब बना हुआ था। क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें, सोने का बढ़ा हुआ इम्पोर्ट और सुस्त विदेशी निवेश (FDI) ने रुपये पर दबाव डाला, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण हो गया।
डोमेस्टिक लिक्विडिटी बनी ढाल
एक समय था जब भारतीय बाजार पूरी तरह विदेशी पैसों पर निर्भर था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की ताकत सामने आई है। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने आने वाले ₹30,000 करोड़ का फंड एक 'शॉक एब्जॉर्बर' की तरह काम कर रहा है। पिछले दो सालों में घरेलू खरीदारों ने लगभग $100 अरब की इक्विटी सप्लाई को सोख लिया है, जिसने इंडेक्स को बड़ी गिरावट से बचाए रखा है।
अब क्या है आउटलुक?
हालिया करेक्शन के बाद, फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल्स अब अपने 10 साल के औसत पर वापस आ गए हैं। मार्केट के एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह री-कैलिब्रेशन जरूरी था। अब भविष्य की तेजी ग्लोबल फंड फ्लो पर नहीं, बल्कि कंपनियों की अर्निंग्स (Earnings) पर निर्भर करेगी। बाजार अब उस स्थिति में है जहां सिर्फ विदेशी निवेश नहीं, बल्कि कंपनियों का प्रॉफिट ही शेयर की कीमतों को सही ठहरा पाएगा।
