Middle East में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों ने भारतीय शेयर बाज़ार को नई उड़ान दी है। खासकर, इस क्षेत्र में शांति की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट आई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इस सकारात्मक माहौल का असर ये हुआ कि बाज़ार के लगभग सभी सेक्टर तेज़ी दिखाने लगे, जिनमें फाइनेंशियल और रियल एस्टेट (Realty) शेयरों ने खास तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया।
बाज़ार की बड़ी छलांग और अहम स्तर
आज के कारोबार में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाने में कामयाब रहे। BSE Sensex 1,134 अंकों की लंबी छलांग लगाकर 75,000 के पार बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 372 अंक चढ़कर 23,285 पर बंद हुआ। इस तेज़ी की मुख्य वजह Middle East में जारी कूटनीतिक प्रयासों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी को माना जा रहा है। बाज़ार में आई इस बहार से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा इज़ाफ़ा हुआ, BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹8.6 लाख करोड़ बढ़कर ₹430.85 लाख करोड़ पर पहुँच गया।
सेक्टरों का प्रदर्शन और वैल्यूएशन
यह तेज़ी ब्रॉड-बेस्ड रही, यानी ज़्यादातर शेयरों में खरीदारी हुई। 30 Sensex कंपनियों में से 27 शेयर हरे निशान में बंद हुए। HDFC Bank, Axis Bank, Kotak Mahindra Bank और Bajaj Finserv जैसे फाइनेंशियल शेयरों में 2% से ज़्यादा की उछाल देखी गई। इसके अलावा L&T, IndiGo, Tata Steel, ITC और Hindustan Unilever जैसे शेयरों ने भी अच्छा दम दिखाया। हालांकि, IT सेक्टर थोड़ा सुस्त रहा, जहां Tech Mahindra, Infosys और TCS जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Nifty Realty इंडेक्स 4% के करीब चढ़कर सेक्टरों में सबसे आगे रहा, जिसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मीडिया सेक्टरों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।
अगर वैल्यूएशन की बात करें तो Nifty 50 इंडेक्स का P/E रेश्यो फिलहाल लगभग 20.0 है, और BSE Sensex का 20.3-20.6 के आसपास है। ये आंकड़े Nifty 50 के 10 साल के औसत (24.79) के आसपास दिख रहे हैं, लेकिन कुछ शेयरों में स्थिति अलग है। उदाहरण के लिए, Infosys और HDFC Bank अपने ऐतिहासिक औसत से नीचे ट्रेड कर रहे हैं (P/E रेश्यो 16-17 और 15-21)। वहीं, Tata Steel और Bajaj Finance जैसे शेयर 25-36 और 26-35 के ऊंचे मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि कुछ सेक्टर अभी भी आकर्षक हैं, जबकि कुछ महंगे हो सकते हैं।
निवेशकों की चिंता: FII की बिकवाली और जोखिम
बाज़ार में इस सकारात्मक चाल के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली एक बड़ी चिंता बनी हुई है। FIIs पिछले 18 कारोबारी सत्रों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं और 24 मार्च तक ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा के शेयर बेच चुके हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते यह बिकवाली जारी है, जो इस रैली की मजबूती पर सवाल खड़े करती है। FIIs के निवेश के रुख में बदलाव और भारतीय रुपये की स्थिरता इस तेज़ी को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी होगी।
इसके अलावा, Middle East में तनाव के फिर से बढ़ने की कोई भी खबर वर्तमान आशावाद को पल भर में उलट सकती है और बाज़ार में बड़ी गिरावट ला सकती है, खासकर वर्तमान वैल्यूएशन और तेल की कीमतों पर क्षेत्रीय संघर्षों के असर को देखते हुए। IT सेक्टर का सुस्त प्रदर्शन, जहां Infosys और TCS जैसे शेयर नीचे गए, यह संकेत दे सकता है कि बाज़ार ग्रोथ से वैल्यू स्टॉक्स की ओर बढ़ रहा है।
आगे की राह और रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि छोटी और मझोली (Mid- and Small-cap) कंपनियां आने वाले समय में लार्ज-कैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि उन पर FIIs की बिकवाली का सीधा असर कम पड़ता है। हालांकि, वैश्विक घटनाओं और विदेशी निवेश पर बाज़ार की संवेदनशीलता एक महत्वपूर्ण बात बनी रहेगी। टेक्निकल एनालिस्ट्स नई लॉन्ग पोजीशन लेने से पहले Nifty के 24,500 के स्तर को निर्णायक रूप से पार करने का इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं। मौजूदा रिकवरी की निरंतरता अंततः FIIs की बिकवाली कम होने और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में स्थिरता पर निर्भर करेगी।