कच्चे तेल का झटका और बाजार में दहशत
यह गिरावट पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे जिओ-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tension) के कारण आई है। तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तूफानी तेजी आई है, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और एक समय तो यह $116.70 के ऊंचे स्तर पर भी पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गई हैं।
रुपया कमजोर, महंगाई की मार
विश्लेषकों का अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में हर $10 का उछाल, भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 30-40 बेसिस पॉइंट बढ़ा सकता है। तेल की कीमतें $100-$105 के दायरे में रहने पर CAD के जीडीपी के 1.9% - 2.2% तक पहुंचने का अनुमान था। इससे भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर भारी दबाव पड़ा और यह $1 के मुकाबले ₹93.50 के करीब आ गया। बढ़ती तेल कीमतों ने इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (Imported Inflation) का खतरा भी बढ़ाया है, जिससे CPI और WPI दोनों प्रभावित हो सकते हैं और GDP ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
सोने में आई चमक, 'सेफ हेवन' बना
इस अनिश्चितता के माहौल में, निवेशकों ने सोने (Gold) को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर देखा। 2026 की शुरुआत से ही सोने की कीमतों में इजाफा देखा गया है। यह सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और निवेशकों की दिलचस्पी के कारण हुआ। हालांकि, जब बाजार में तेज गिरावट आती है, तो निवेशक तत्काल नकदी या एनर्जी एसेट्स को प्राथमिकता देते हैं, जिससे सोने के 'सेफ हेवन' स्टेटस पर सवाल उठ सकते हैं।
शेयर बाजार में वैल्यू बाइंग के मौके?
बाजार में भारी गिरावट के बावजूद, कई सॉलिड कंपनियों के शेयर उनकी असली कीमत से काफी कम पर ट्रेड हो रहे हैं। ऐसे में, यह समय उन निवेशकों के लिए वैल्यू बाइंग (Value Buying) का मौका हो सकता है जो छोटी अवधि की चिंताओं को नजरअंदाज कर सकते हैं। ICICI डायरेक्ट के विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में ज्यादातर गिरावट शायद खत्म हो गई है और अप्रैल में एक शार्प रिकवरी (Sharp Recovery) देखने को मिल सकती है। IMF ने भी भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर FY27 के लिए 6.5% कर दिया है।
आगे क्या?
फिलहाल, बाजार की दिशा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और इमर्जिंग मार्केट्स (Emerging Markets) में निवेशकों की रुचि वापस आने पर निर्भर करेगी। विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, फरवरी 2026 से $20 बिलियन से ज्यादा का पैसा बाहर जा चुका है। ऑटो जैसे सेक्टर फ्यूल की बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में रुकावटों से प्रभावित हो सकते हैं।