IPO क्यों हुए ठंडे, किधर जा रहा पैसा?
आर्थिक अनिश्चितता (Macroeconomic Uncertainties) के माहौल में, निवेशक प्राइमरी इक्विटी मार्केट की तुलना में ज्यादा अनुमानित कैश फ्लो (Predictable Cash Flows) और आकर्षक यील्ड (Attractive Yields) वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी का नतीजा है कि IPO बाजार ठंडा पड़ गया है और पैसा REITs, InvITs और NCDs की ओर बह रहा है।
निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी
हाल के समय में, बाजार में कई NCD इश्यू, दो InvIT लॉन्च और एक SM REIT आए हैं। अगले हफ्ते ₹3,400 करोड़ का Bagmane Prime Office REIT IPO खुलने जा रहा है। निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस महीने Citius TransNet Investment Trust IPO 20 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ, वहीं मार्च में NHAI-Backed Raajmarg InvIT भी 5 गुना सब्सक्राइब हुआ।
REITs और InvITs क्यों हैं खास?
REITs और InvITs आय की विजिबिलिटी (Income Visibility) और कैपिटल एप्रिसिएशन (Capital Appreciation) दोनों का वादा करते हैं। नियमों के मुताबिक, इन ट्रस्टों को अपने नेट डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो का कम से कम 90% बांटना पड़ता है, जिससे आय की नियमितता सुनिश्चित होती है।
क्या मिल रहा है रिटर्न?
वर्तमान में, लिस्टेड REITs 7% से 9% तक का यील्ड दे रहे हैं, जबकि InvITs 9% से 12% तक का यील्ड प्रदान करते हैं। सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों में कमी के कारण, ये इंस्ट्रूमेंट्स पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम (Fixed-Income) रिटर्न की कमी को पूरा कर रहे हैं और महंगाई से बेहतर रिटर्न दे रहे हैं।
NCDs भी बने आकर्षण का केंद्र
Nuvama Wealth के मुताबिक, ये इंस्ट्रूमेंट्स इक्विटी और ट्रेडिशनल डेट से कम कोरिलेशन (Low Correlation) के साथ डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के फायदे भी देते हैं। वहीं, फाइनेंशियली मजबूत कंपनियों के हाई-क्वालिटी NCDs, तीन से पांच साल की अवधि के लिए 9.5% से 10.5% तक का यील्ड दे रहे हैं, जो बैंक डिपॉजिट और डेट म्यूचुअल फंड्स से काफी बेहतर है।
टैक्सेशन और इंडेक्स परफॉरमेंस
डेट म्यूचुअल फंड टैक्सेशन (Debt Mutual Fund Taxation) में हालिया बदलावों ने भी इन विकल्पों को और भी प्रतिस्पर्धी बना दिया है। Nifty REIT-InvIT इंडेक्स ने भी पारंपरिक निवेश साधनों को पीछे छोड़ा है। जुलाई 2019 से मार्च 2026 तक इसने 12% का एनुआलाइज्ड रिटर्न (Annualized Return) दिया है, जबकि Nifty 50 ने 11.1% और डेट फंड्स ने 7.5%।
संभावित जोखिम
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। Nifty REITs & InvITs इंडेक्स का P/E रेश्यो 44.62 है (मार्च 24, 2026 तक), जो इसके 7-साल के मीडियन 30.67 से काफी ऊपर है। यह संकेत देता है कि वैल्यूएशन प्रीमियम पर है और बाजार में गिरावट के प्रति यह अधिक संवेदनशील हो सकता है। REITs और InvITs में इक्विटी की तुलना में कैपिटल एप्रिसिएशन की संभावना मध्यम रहती है। InvITs को ट्रैफिक, रेगुलेशन और प्रोजेक्ट डिले जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। NCDs में मुख्य जोखिम इश्यूअर की क्रेडिटworthiness (Issuer's Creditworthiness) का है।
भविष्य की राह
इसके बावजूद, इन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेशकों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। 2019 में जहां लगभग 19,000 निवेशक थे, वहीं 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 8 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
