शेयरों का सैलाब: IPO लॉक-अप एक्सपायरी का बड़ा असर
भारतीय शेयर बाज़ार में अगले कुछ महीनों में शेयरों का सैलाब आने वाला है। 15 अप्रैल से कई नई लिस्ट हुई कंपनियों के IPO लॉक-अप पीरियड (IPO Lock-up Period) खत्म होने शुरू हो जाएंगे, जिससे बड़ी संख्या में शेयर ट्रेड के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। Nuvama Alternative & Quantitative Research का अनुमान है कि अप्रैल 2024 से जुलाई 2026 के बीच 81 कंपनियों के ₹5.6 लाख करोड़ (लगभग $67 बिलियन) के शेयर मार्केट में आ सकते हैं। यह समय उन कंपनियों के लिए काफी अहम है जिनके शेयर लिस्टिंग के बाद से तेजी से बढ़े हैं, क्योंकि शेयरों की इतनी बड़ी सप्लाई उनके भाव में भारी गिरावट और वोलैटिलिटी (Volatility) ला सकती है।
शुरुआती कंपनियां और उनके लॉक-अप एक्सपायरी
सबसे पहले 15 अप्रैल को लॉक-अप एक्सपायरी (Lock-up Expiry) के बड़े मामले देखने को मिलेंगे। Rubicon Research के 10 करोड़ शेयर ट्रेड के लिए उपलब्ध होंगे, जो कंपनी के कुल स्टॉक का 60% है। यह कंपनी फिलहाल ₹779 पर ट्रेड कर रही है और इसका P/E 55x है। इसी दिन LG Electronics India के लॉक-अप एक्सपायरी से 44.1 करोड़ शेयर (कुल स्टॉक का 65%) मार्केट में आ जाएंगे। यह स्टॉक अपने IPO प्राइस ₹1,140 से बढ़कर ₹1,387 पर ट्रेड कर रहा है, और इसका मार्केट कैप ₹1.5 लाख करोड़ है। Bharat Coking Coal के भी 5.9 करोड़ शेयर अनलॉक होंगे, जो उसके कुल स्टॉक का केवल 1% है। इसके शेयर IPO प्राइस ₹23 से बढ़कर ₹32 पर ट्रेड कर रहे हैं।
बड़ी IPOs और शेयरों की बड़ी उपलब्धता
अप्रैल के मध्य और अंत तक यह सिलसिला जारी रहेगा। Garuda Construction & Engineering और Canara Robeco AMC जैसी कंपनियों के लॉक-अप पीरियड भी खत्म होंगे। 20 अप्रैल तक Hyundai Motor India के लॉक-इन एक्सपायरी से 16.3 करोड़ शेयर (कुल स्टॉक का 20%) ट्रेड के लिए उपलब्ध होंगे। यह कंपनी अपने IPO प्राइस ₹1,960 से नीचे ₹1,716 पर ट्रेड कर रही है, जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹2 लाख करोड़ और P/E 25x है। मई और जून में और भी बड़े अनलॉक होने हैं। 13 मई को Pine Labs के 92.36 करोड़ शेयर (कुल स्टॉक का 80%) और 8 मई को Lenskart Solutions के 104.74 करोड़ शेयर (कुल स्टॉक का 60%) ट्रेड हो सकेंगे। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho के लिए 10 जून को एक बड़ी अनलॉक डेट है, जहाँ 308.33 करोड़ शेयर, यानी उसके कुल स्टॉक का 68%, बेचने के लिए उपलब्ध होंगे। इन बड़ी कंपनियों के लिए इतने बड़े परसेंटेज का अनलॉक ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ा सकता है और कीमतों में बड़ी हलचल मचा सकता है।
मार्केट पर असर और पिछला अनुभव
यह लॉक-अप एक्सपायरी की लहर ऐसे समय में आ रही है जब 2026 की शुरुआत में भारतीय इक्विटी मार्केट (Indian Equity Market) में मिली-जुली चाल देखने को मिल रही है। टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर, जहाँ ऐसी नई लिस्टिंग ज़्यादा हैं, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) और पहले से ही ऊंचे वैल्यूएशन (Valuations) का सामना कर रहे हैं। 2022-2023 के ऐतिहासिक आंकड़ों से पता चलता है कि महत्वपूर्ण लॉक-अप एक्सपायरी के बाद अक्सर वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ी है और कीमतों में 5-15% तक की गिरावट देखी गई है। Pine Labs (80% अनलॉक) और Meesho (68% अनलॉक) जैसी कंपनियों से बड़ी मात्रा में शेयर उपलब्ध होने की संभावना उनके मौजूदा भाव और वैल्यूएशन पर भारी दबाव डाल सकती है। Hyundai Motor India, जो पहले से ही IPO प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही है, को और अधिक बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि शुरुआती निवेशक बाहर निकलना चाहेंगे। इन अनलॉक्स का पैमाना, जो अक्सर कुल शेयरों का एक बड़ा हिस्सा होता है, निवेशकों को बढ़ी हुई वोलैटिलिटी और वैल्यूएशन एडजस्टमेंट (Valuation Adjustments) के लिए तैयार रहने का संकेत देता है।
नए लिस्टेड स्टॉक्स में निवेशकों के लिए जोखिम
आने वाले समय में उपलब्ध शेयरों की यह बढ़ती संख्या उन निवेशकों के लिए एक सीधा जोखिम है जिन्होंने IPO प्राइस पर खरीदारी की थी, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने भारी सब्स्क्रिप्शन (Highly Subscribed) के दौरान ऊंचे वैल्यूएशन पर निवेश किया था। जिन कंपनियों के शेयरों का बड़ा हिस्सा अनलॉक हो रहा है, जैसे Pine Labs (80%) और LG Electronics India (65%), वे कीमतों में तेज गिरावट के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हैं, क्योंकि शुरुआती निवेशक और प्रमोटर्स (Promoters) बेचना चाह सकते हैं। स्थापित कंपनियों के विपरीत, जिनके मालिकाना हक में विविधता होती है, इन नई लिस्टिंग में सट्टा जोखिम (Speculative Risk) ज़्यादा होता है, जो बड़ी मात्रा में शेयरों की अचानक उपलब्धता से और बढ़ जाता है। इन कंपनियों का प्रदर्शन टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर खर्च के आउटलुक पर भी बहुत निर्भर करता है। किसी भी आर्थिक मंदी या सेक्टर-विशिष्ट समस्या का सामना सप्लाई बढ़ने के साथ मिलकर कीमतों पर दबाव को और बढ़ा सकता है। प्रमोटर्स के पास बड़ी संख्या में शेयर होते हैं, और थोड़ी सी भी बिकवाली गंभीर मार्केट रिएक्शन का कारण बन सकती है, खासकर यदि बिक्री जल्दी होती है या मार्केट का सेंटिमेंट (Market Sentiment) नकारात्मक हो जाता है। निवेशकों को उन कंपनियों की जांच करनी चाहिए जो IPO प्राइस की तुलना में काफी प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं, क्योंकि लॉक-अप एक्सपायर होने के बाद उनमें करेक्शन (Correction) की सबसे अधिक संभावना है।
सप्लाई सरज के बीच बाजार का रुख सतर्क
हालांकि इन नई लिस्टेड कंपनियों के लिए एनालिस्ट्स के स्पेसिफिक प्राइस टारगेट (Price Targets) अभी विकसित हो रहे हैं, 2026 की शुरुआत में टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर सेक्टर के लिए सामान्य आउटलुक वैल्यूएशन पर ध्यान देने के साथ सावधानीपूर्ण आशावाद (Cautious Optimism) का सुझाव देता है। ब्रोकरेज (Brokerages) लॉक-अप एक्सपायरी की तारीखों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, जो बढ़ी हुई वोलैटिलिटी के संभावित ट्रिगर (Triggers) हैं, और वे क्लाइंट्स को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले शेयर रिलीज का बड़ा पैमाना यह मतलब है कि मार्केट को पर्याप्त नई सप्लाई को सोखना होगा, जिससे इनमें से कई IPOs के लिए कंसॉलिडेशन (Consolidation) या प्राइस एडजस्टमेंट (Price Adjustment) का दौर आने की संभावना है। मैनेजमेंट टीमों से अर्निंग कॉल (Earnings Calls) के दौरान भविष्य के मार्गदर्शन (Future Guidance) से इस सप्लाई सरज (Supply Surge) और बदलती मार्केट कंडीशंस के बीच ग्रोथ प्रोस्पेक्ट्स (Growth Prospects) का आकलन करने में मदद मिलेगी।