ग्लोबल उथल-पुथल के बीच भारत की बढ़त, Quant MF CIO का खास नज़रिया
Quant Mutual Fund के CIO संदीप टंडन का मानना है कि दुनिया भर के शेयर बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच भारत एक ऐसी जगह है जहाँ निवेशक पैसा लगा सकते हैं। जहाँ एक तरफ AI (Artificial Intelligence) से जुड़ी चिंताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते ग्लोबल इक्विटी मार्केट में गिरावट देखी जा रही है, वहीं भारत इन दिक्कतों से निपटने और कैपिटल रीएलोकेशन (capital reallocation) का एक बेहतर डेस्टिनेशन (destination) बन सकता है। टंडन के अनुसार, यह 'सेलिंग एग्जॉशन' (selling exhaustion) का फेज है, जिसका मतलब है कि बिकवाली का सबसे बुरा दौर शायद बीत चुका है।
6 फरवरी 2026: मार्केट ने कैसे किया क्लोज, RBI का क्या है रुख?
शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। BSE Sensex 266.47 अंक चढ़कर 83,580.40 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 50.90 अंकों की तेजी आई और यह 25,693.70 पर बंद हुआ। इस तेजी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के उस फैसले से भी बल मिला, जिसमें उन्होंने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और GDP के अनुमानों को बढ़ाया। यह घरेलू स्तर पर एक पॉजिटिव माहौल बनाता है।
सेक्टर रोटेशन: कहाँ लगाया जा रहा है पैसा, और कहाँ बरतनी है सावधानी?
संदीप टंडन की रणनीति में प्राइवेट बैंक्स पर खास फोकस दिख रहा है। Quant MF का इन पर 'ग्रॉसली ओवरवेट' (grossly overweight) पोजीशन है, जो उनकी हालिया स्ट्रेंथ को दर्शाता है। Nifty प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी पॉजिटिव मूवमेंट रहा। इसके उलट, Nifty IT इंडेक्स दिन के दौरान 1.77% तक गिर गया, जो AI की वजह से इंडस्ट्री पर पड़ने वाले संभावित असर को दिखाता है। दिन के आखिरी घंटे में आई रिकवरी (recovery) बताती है कि सेक्टर परफॉरमेंस मिली-जुली होने के बावजूद, अंडरलाइंग बाइंग इंटरेस्ट (underlying buying interest) यानी खरीदारी में दिलचस्पी बनी हुई है।
वैल्यूएशन, ग्लोबल फ्लोज़ और सेक्टर की बारीकियां
भारत का मौजूदा P/E रेश्यो (Price to Earnings ratio) करीब 22.21 है, जो MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स के औसतन 17.03 से काफी ऊपर है। टंडन का मानना है कि यह प्रीमियम भारत की रिलेटिव स्टेबिलिटी (relative stability) यानी सापेक्ष स्थिरता के कारण जायज है। वहीं, चीन, कोरिया और ताइवान जैसे देशों के मार्केट 12-18x के मल्टीपल्स (multiples) पर ट्रेड कर रहे हैं और AI-ड्रिवन टेक सेक्टर की कमजोरी के कारण हाल ही में भारी गिरावट देख चुके हैं। ग्लोबल टेक सेल-ऑफ (sell-off) और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती, टंडन के इस थीसिस (thesis) को और बल देती है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार और गिरते हैं, तो पैसा भारत की ओर आ सकता है।
2025 में विदेशी निवेशकों ने AI के डर से भारतीय IT स्टॉक्स से करीब $8.5 बिलियन का निवेश निकाला था। टंडन का मानना है कि इस स्थिति ने एक 'अंडरवैल्यूड ज़ोन' (undervalued zone) बना दिया है, भले ही आगे कुछ और गिरावट की संभावना हो।
डिफेंस स्टॉक्स की बात करें, तो यूनियन बजट (Union Budget) में बढ़ी कैपिटल आउटले (capital outlay) के बावजूद, टंडन इन्हें 'ग्रॉसली ओवरवैल्यूड' (grossly overvalued) मानते हैं। डिफेंस सेक्टर इंडेक्स अपने ऑल-टाइम हाई (all-time high) पर है। इस पर मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने HAL जैसी कंपनी के लिए रेटिंग डाउनग्रेड (downgrade) भी की है।
आगे क्या? सेक्टर पर क्या है राय?
टंडन की रणनीति से यह भी पता चलता है कि उनका मानना है कि पिछले छह तिमाहियों से जारी भारत का आउटपरफॉर्मेंस (outperformance) अब एब्सोल्यूट गेन्स (absolute gains) यानी पक्के मुनाफे में बदलेगा। एनालिस्ट्स (analysts) भारतीय IT सर्विसेज को लेकर AI डिस्प्शन (disruption) के जोखिमों के कारण अभी भी सतर्क हैं। हालांकि, कुछ जैसे कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) का कहना है कि हाल की बिकवाली थोड़ी ज्यादा हो सकती है।
बैंकिंग सेक्टर, खासकर प्राइवेट बैंक्स, पसंदीदा इन्वेस्टमेंट थीम बने रहने की उम्मीद है। इंश्योरेंस कंपनियों को 'सनराइज इंडस्ट्री' (sunrise industry) माना जा रहा है, और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (asset management companies) में ग्रोथ की लगातार संभावनाएं दिखती हैं। डिफेंस सेक्टर का भविष्य, यूनियन बजट के एक्सपोर्ट (export) फोकस को देखते हुए, एक्जीक्यूशन (execution) और इंटरनेशनल सेल्स (international sales) पर निर्भर करेगा।