IT सेक्टर के दिग्गज शेयरों में जबरदस्त वापसी देखी जा रही है। अक्टूबर महीने में टॉप आईटी कंपनियों का मार्केट कैप **16.3%** बढ़ा है, जो **2008** के बाद के सबसे निचले स्तर से सुधरा है।
भारतीय आईटी सर्विस सेक्टर में इस महीने एक बड़ी और टैक्टिकल रिकवरी देखने को मिली है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), Infosys, Wipro, HCLTech और Tech Mahindra जैसी कंपनियों के मार्केट कैप में 16.3% का इजाफा हुआ है। यह उछाल उस भारी बिकवाली के बाद आया है, जिसने सेक्टर की वैल्युएशन को 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के दौर में धकेल दिया था।
वैल्युएशन का गणित
सितंबर के अंत तक, इन टॉप पांच आईटी कंपनियों का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो घटकर 12.9x रह गया था, जबकि इनका 10 साल का औसत लगभग 23.2x रहा है। यह सेक्टर BSE Sensex के मुकाबले 33% के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा था, जो 2008 और 2019 की गिरावट से भी ज्यादा गहरा था।
निवेशक क्यों लौट रहे हैं?
आईटी शेयरों में इस रिकवरी के पीछे कई ठोस कारण हैं। बड़ी कंपनियों के पास भारी कैश रिजर्व है, जिससे वे डिविडेंड और शेयर बायबैक जैसे निवेशकों के लिए फायदेमंद कदम उठा रही हैं। इसके अलावा, रुपए में आई गिरावट ने भी इन एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों को सहारा दिया है, क्योंकि डॉलर कमाई का कन्वर्जन अब बेहतर हो रहा है।
रेवेन्यू ग्रोथ पर टिकी निगाहें
सेक्टर का भविष्य फिलहाल रेवेन्यू ग्रोथ पर निर्भर है, जो अभी 2-3% के दायरे में है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस तेजी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए आईटी कंपनियों को अपनी डॉलर-टर्म रेवेन्यू ग्रोथ को 5% से ऊपर ले जाने की जरूरत है। यदि वैल्युएशन 16x से 17x के स्तर पर पहुंचती है और ग्रोथ में सुधार नहीं दिखता, तो स्टॉक की कीमतों पर दोबारा दबाव बन सकता है। अब निवेशकों को कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर कड़ी नजर रखनी होगी।
