Hybrid Funds: इक्विटी जैसा रिटर्न, रिस्क बहुत कम! भारतीय स्टडी का बड़ा खुलासा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Hybrid Funds: इक्विटी जैसा रिटर्न, रिस्क बहुत कम! भारतीय स्टडी का बड़ा खुलासा
Overview

भारतीय बाज़ार पर हुई एक 23 साल की स्टडी में बड़ा खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, एक 80% इक्विटी (Equity) और 20% डेट (Debt) वाला हाइब्रिड फंड (Hybrid Fund), SIP निवेशकों के लिए Nifty 100 इंडेक्स के बराबर ही रिटर्न देने में कामयाब रहा, लेकिन इसमें **23%** कम वोलेटिलिटी (Volatility) देखी गई।

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इक्विटी जैसा रिटर्न, वो भी कम रिस्क के साथ!

भारतीय बाज़ार में 23 सालों (जनवरी 2003 से) के एक गहन विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि अगर कोई निवेशक 80% इक्विटी और 20% डेट में निवेश करता है, तो उसे Nifty 100 इंडेक्स के बराबर ही रिटर्न मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि यह सब 23% कम वोलेटिलिटी के साथ संभव हुआ है।

क्या रहे स्टडी के मुख्य नतीजे?

एसआईपी (SIP) यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (Systematic Investment Plan) के ज़रिए निवेश करने वाले निवेशकों के लिए, इस हाइब्रिड फंड ने 12.77% का इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (IRR) दिया, जो Nifty 100 के बराबर है। वहीं, हाइब्रिड फंड की वोलेटिलिटी 16.22% रही, जबकि Nifty 100 की वोलेटिलिटी 21.06% थी। यानी, 23% की कमी।

अगर किसी निवेशक ने एकमुश्त (Lump Sum) निवेश किया होता, तो भी नतीजे लगभग वैसे ही रहे। हाइब्रिड फंड से 15.29% का रिटर्न मिला, जबकि Nifty 100 ने 15.35% का रिटर्न दिया। इसका मतलब है कि रिस्क को थोड़ा कम करने पर भी रिटर्न में कोई बड़ा समझौता नहीं करना पड़ा।

रीबैलेंसिंग और एसआईपी का कमाल

इस हाइब्रिड फंड की सफलता का राज है इसका सालाना रीबैलेंसिंग (Annual Rebalancing)। यह अपने आप ही 'कम पर खरीदें, ज़्यादा पर बेचें' की रणनीति पर काम करता है। इसमें उन एसेट्स (Assets) से एक्सपोजर कम किया जाता है जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है और उन एसेट्स में निवेश बढ़ाया जाता है जो पिछड़ रहे हैं।

यह डिसिप्लिन्ड तरीका एसआईपी निवेशकों के लिए और भी फायदेमंद साबित हुआ। लम्पसम निवेशकों ने जहां 23 साल में प्योर इक्विटी से प्योर डेट के मुकाबले 5.85 गुना ज़्यादा वैल्यू देखी, वहीं एसआईपी निवेशकों के लिए यह मल्टीप्लायर घटकर 2.21 गुना रह गया। इससे पता चलता है कि रेगुलर निवेश करने वालों के लिए डेट कंपोनेंट को शामिल करना ज़्यादा सुरक्षित है।

बाज़ार की चाल और हाइब्रिड फंड की भूमिका

इस 23 साल की अवधि में भारतीय इक्विटी मार्केट ने बड़े उतार-चढ़ाव देखे। Nifty 100 ने लंबी अवधि में ज़बरदस्त मुनाफ़ा तो दिया, लेकिन वोलेटिलिटी भी काफी ज़्यादा थी। सरकारी बॉन्ड (G-Secs) ने कम और ज़्यादा स्थिर रिटर्न दिए।

स्टडी से पता चला है कि डेट में रणनीतिक निवेश करने से निवेशकों को मार्केट में गिरावट के दौरान इक्विटी के मुकाबले कम नुकसान होता है। उदाहरण के लिए, 100% इक्विटी से 60% इक्विटी पर आने पर रिटर्न में 13% की गिरावट आई, लेकिन वोलेटिलिटी में 41% की भारी कमी दर्ज की गई।

हाइब्रिड फंड्स के रिस्क और ज़रूरी बातें

हालांकि, यह स्टडीज़ शानदार नतीजे दिखाती हैं, लेकिन असल निवेश में कुछ रिस्क ज़रूर होते हैं। डेट पोर्शन (आमतौर पर सरकारी बॉन्ड) में इंटरेस्ट रेट रिस्क होता है – यानी ब्याज दरें बढ़ने पर बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं, जिससे फंड की वैल्यू भी कम हो जाती है। यह नुकसान को और बढ़ा सकता है अगर स्टॉक और बॉन्ड दोनों एक साथ गिरें।

इसमें क्रेडिट रिस्क भी है, जो सरकारी बॉन्ड के मामले में कॉर्पोरेट डेट की तुलना में कम होता है। डिफॉल्ट या डाउनग्रेड होने पर कैपिटल का नुकसान हो सकता है। सालाना रीबैलेंसिंग भी तब फायदेमंद नहीं रहती जब मार्केट ट्रेंड उम्मीद से ज़्यादा लंबा चले।

इसके अलावा, डेट पर 7% का अनुमानित रिटर्न भी शायद ज़्यादा सरल है, क्योंकि भारतीय G-Sec यील्ड (Yield) इन्फ्लेशन और मॉनेटरी पॉलिसी के आधार पर घट-बढ़ सकती है। निवेशकों को एक्सपेंस रेश्यो (Mutual Funds द्वारा लिया जाने वाला फीस) को भी ध्यान में रखना चाहिए, जो नेट रिटर्न को कम करता है। 2020 में हुए फ्रेंकलिन टेम्पलटन डेट फंड क्राइसिस (Franklin Templeton debt fund crisis) याद दिलाता है कि डेट फंड भी पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं होते।

निष्कर्ष

इन जोखिमों के बावजूद, कई एक्सपर्ट अब डिसिप्लिन्ड एसेट एलोकेशन (Disciplined Asset Allocation) और हाइब्रिड फंड स्ट्रक्चर के महत्व पर सहमत हैं। एग्रेसिव हाइब्रिड फंड (Aggressive Hybrid Funds) अक्सर उन निवेशकों के लिए सुझाए जाते हैं जो मैनेज्ड वोलेटिलिटी के साथ इक्विटी में एक्सपोजर चाहते हैं। अब फोकस सिर्फ सबसे ज़्यादा रिटर्न हासिल करने से हटकर रिस्क-एडजस्टेड परफॉरमेंस को बेहतर बनाने पर है। एक अच्छी तरह से स्ट्रक्चर्ड पोर्टफोलियो, जिसे समय-समय पर रीबैलेंस किया जाए, लंबे समय में वेल्थ बनाने का एक मज़बूत आधार प्रदान करता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.