HFCL और IIFL Finance ने आज, 21 अगस्त को अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर को छुआ। दोनों कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। HFCL के एक्सपोर्ट-आधारित रेवेन्यू में उछाल से प्रॉफिट में वापसी हुई, वहीं IIFL Finance ने सिक्योर लेंडिंग पर फोकस बढ़ाकर प्रॉफिट बढ़ाया है।
HFCL: एक्सपोर्ट से मुनाफा,
HFCL के शेयर में आज जबरदस्त तेजी देखी गई, जिससे वे 52-हफ्ते के नए हाई पर पहुंच गए। यह उछाल कंपनी के FY27 की पहली तिमाही के शानदार नतीजों के बाद आया है। पिछले साल इसी अवधि में हुए घाटे के मुकाबले, कंपनी ने इस तिमाही में ₹229 करोड़ से ₹246 करोड़ के बीच नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस टर्नअराउंड की एक बड़ी वजह कंपनी का इंटरनेशनल मार्केट्स पर फोकस रहा है। तिमाही के दौरान कुल बिक्री में 55% से अधिक का योगदान एक्सपोर्ट-ड्रिवन रेवेन्यू का रहा।
निवेशक अब कंपनी के बड़े ऑर्डर बुक को बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे। टेलिकॉम इक्विपमेंट सेक्टर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और ग्लोबल डिमांड के प्रति काफी संवेदनशील होता है, जो कंपनी की भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी को सीधे प्रभावित करेंगे।
IIFL Finance: सिक्योर लेंडिंग का फायदा
IIFL Finance ने भी Q1 FY27 के लिए अपने मुनाफे में 14% का सीक्वेंशियल इजाफा दर्ज किया, जो ₹713 करोड़ रहा। इस शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी के शेयर भी 52-हफ्ते के नए हाई पर पहुंच गए। कंपनी ने अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव करते हुए अब अपने लोन पोर्टफोलियो का लगभग 90% सिक्योर लेंडिंग में शिफ्ट कर दिया है। यह कदम निवेशकों द्वारा क्रेडिट रिस्क को कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, कंपनी को कुछ खास इंडस्ट्री चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 12.24% के CET1 कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो के साथ, फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बनाए रखना एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा। इसके अलावा, कंपनी के लेंडिंग बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा गोल्ड से जुड़ा है, इसलिए सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे कंपनी के लोन-टू-वैल्यू रेशियो और एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है। गोल्ड लेंडिंग स्पेस में कॉम्पिटिशन भी एक ऐसा फैक्टर है जिस पर एनालिस्ट्स बारीकी से नजर रख रहे हैं।
दोनों कंपनियां ऐसे माहौल में काम कर रही हैं जहां सेक्टर-स्पेसिफिक नीतियां और मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर, जैसे इंटरेस्ट रेट साइकल्स और NBFC व टेलीकॉम इंडस्ट्री में रेगुलेटरी बदलाव, भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। इन स्टॉक्स की मौजूदा तेजी कितनी टिकाऊ रहेगी, यह आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के ऑपरेशनल टारगेट्स को पूरा करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा।
