कैपिटल गुड्स और फाइनेंशियल सर्विसेज में बहार
हाल की बिकवाली के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटीज़ में फिर से दम दिखाया है। फरवरी के पहले 15 दिनों में FPIs ने भारतीय शेयर बाज़ार में ₹19,675 करोड़ का भारी भरकम निवेश किया है। इस नए पैसे का बड़ा हिस्सा उन सेक्टर्स में गया है जो भारत की मज़बूत आर्थिक ग्रोथ का फायदा उठा रहे हैं। सबसे ज़्यादा ₹8,032 करोड़ कैपिटल गुड्स स्टॉक्स में आए, इसके बाद ₹6,175 करोड़ फाइनेंशियल सर्विसेज में और ₹4,678 करोड़ ऑयल एंड गैस सेक्टर्स में लगे। विश्लेषकों को उम्मीद है कि 2026 तक FPIs का यह फ्लो बना रहेगा, जिसकी वजह भारत की बेहतर मैक्रो इकोनॉमिक कंडीशन और स्ट्रक्चरल मौके हैं। फरवरी की शुरुआत में आए US-India ट्रेड डील फ्रेमवर्क ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिससे ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितता कम हुई है और ग्रोथ से जुड़े सेक्टर्स में सेंटिमेंट सुधरा है।
AI के डर से IT सेक्टर में भारी बिकवाली
जहां बाज़ार के दूसरे सेक्टर्स में विदेशी पैसा आ रहा है, वहीं इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली है। FPIs ने IT स्टॉक्स से ₹10,956 करोड़ निकाल लिए हैं। इस बिकवाली का असर Nifty IT इंडेक्स पर साफ दिख रहा है, जो इस साल की शुरुआत से अब तक लगभग 15% गिर चुका है। इसकी तुलना में Nifty 50 इंडेक्स में मामूली गिरावट आई है। इस बिकवाली की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ी से बढ़ते एडवांस्ड फीचर्स को लेकर चिंता है, जिससे पारंपरिक लेबर-इंटेंसिव IT सर्विसेज मॉडल पर खतरा मंडरा रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि जनरेटिव AI, ट्रेडिशनल एप्लीकेशन डेवलपमेंट, टेस्टिंग और मेंटेनेंस रेवेन्यू का 25-30% तक प्रभावित कर सकता है, जिससे अगले तीन से चार सालों में कुल सेक्टर रेवेन्यू में 10-12% की कमी आ सकती है।
वैल्यूएशन गैप और बाज़ार में चौकाने वाला अंतर
मौजूदा बाज़ार की स्थिति एक बड़े अंतर को दर्शाती है। जहां भारतीय अर्थव्यवस्था में 2026 तक 6.9% GDP ग्रोथ का अनुमान है और कंपनियों के मुनाफे में रिकवरी की उम्मीद है, वहीं IT सेक्टर एक बड़े री-असेसमेंट से गुज़र रहा है। Nifty Oil & Gas इंडेक्स का P/E रेश्यो करीब 10.2-10.77 के आसपास है, जो इसे थोड़ा अंडरवैल्यूड बताता है। वहीं, Nifty Financial Services इंडेक्स का P/E 17.9-18.0 पर है, जिसे फेयरली वैल्यूड माना जा रहा है। इसके विपरीत, Nifty IT इंडेक्स, हाल की गिरावट के बावजूद, अभी भी लगभग 22-25x के P/E पर ट्रेड कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, IT इंडेक्स में करेक्शन कई क्वार्टर्स तक चलता है, और यह संकेत देता है कि मौजूदा गिरावट, जो अपने ऐतिहासिक औसत टॉप-से-ट्रफ डिक्लाइन 30% के करीब है, शायद एक छोटा-मोटा बदलाव न हो।
जोखिम और भविष्य का नज़रिया
सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री, जिससे लगभग ₹4,470 करोड़ जुटाए गए, सफलतापूर्वक पूरी हो गई। US-India ट्रेड डील से लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वैलरी के साथ-साथ मशीनरी और फार्मास्युटिकल्स को भी लगातार फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भारतीय बाज़ार के लिए सबसे बड़ा जोखिम IT सेक्टर में AI-संचालित डिसरप्शन का बना हुआ है। अगर इसे ठीक से मैनेज नहीं किया गया, तो यह एक्सपोर्ट ग्रोथ और निवेशक सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है। एनालिस्ट्स IT सेक्टर के भविष्य को लेकर बंटे हुए हैं; कुछ लंबी अवधि के वैल्यूएशन कंसर्न की वजह से सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, जबकि दूसरे अडैप्टेशन स्ट्रेटेजी और AI से नए बिज़नेस जनरेट होने की संभावना पर ज़ोर दे रहे हैं। FPIs के मौजूदा इनफ्लो की सस्टेनेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय IT कंपनियां कितनी प्रभावी ढंग से अपने बिज़नेस मॉडल को बदलते हुए AI क्रांति का सामना करती हैं।