15 सितंबर 2026 को भारतीय बाजार में जोरदार बिकवाली देखी गई। क्रूड ऑयल के **$100** के पार जाने के कारण Nifty और Sensex में **1%** से ज्यादा की गिरावट आई, जहाँ FIIs ने **₹2,978 करोड़** निकाले, वहीं DIIs ने **₹2,686 करोड़** की खरीदारी का सहारा दिया।
ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव दिखा। 15 सितंबर 2026 को Nifty 50 1.19% गिरकर 23,118.60 पर, जबकि BSE Sensex 1.04% की कमजोरी के साथ 74,003.82 पर बंद हुआ। क्रूड ऑयल के $100 प्रति बैरल के स्तर को पार करने से महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है।
FIIs का रुख और DIIs का बचाव
बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) का सेंटिमेंट काफी कमजोर दिखा और उन्होंने कैश मार्केट में ₹2,977.86 करोड़ के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने का काम किया और ₹2,686.05 करोड़ की नेट खरीदारी की। यह घरेलू निवेशकों का भरोसा ही है जो विदेशी बिकवाली के बीच मार्केट को ज्यादा गिरने से बचा रहा है।
सेक्टर का हाल
महंगाई और ब्याज दरों की चिंता के चलते फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट दिखी। इन सेक्टर्स पर ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ, IT सेक्टर ने मजबूती दिखाई और Nifty IT इंडेक्स करीब 2% की बढ़त के साथ बंद हुआ। निवेशक अनिश्चितता के दौर में IT शेयरों को 'डिफेंसिव बेट' मान रहे हैं।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर सेंट्रल बैंक की पॉलिसी मीटिंग्स पर रहेगी। अगर ब्याज दरों को लेकर कोई सख्ती (Hawkish Stance) दिखाई जाती है, तो मार्केट में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
