विदेशी पूंजी की नई शुरुआत
साल 2025 में भारतीय बाजारों से बड़ी मात्रा में पैसा निकालने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने फरवरी 2026 में अपना रुख बदल लिया है। अब तक वे लगभग ₹4,900.17 करोड़ का शुद्ध निवेश कर चुके हैं। यह उस दौर के विपरीत है जब FIIs ने अक्टूबर 2021 से मार्च 2023 के बीच ₹2.4 लाख करोड़ से अधिक की बिकवाली की थी।
कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते का अंतिम रूप लेना इस वापसी का मुख्य कारण है। इस समझौते से भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम हुई है और टैरिफ (Tariffs) कम होने की उम्मीद है। यह नया निवेश उन पहले के समय से अलग है जब भारत के ऊंचे वैल्यूएशन (Valuations) और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते निवेशकों का झुकाव "Buy China, Sell India" की ओर था।
हालांकि, FIIs की यह खरीदारी व्यापक बाजार में जोश भरने वाली नहीं, बल्कि काफी चुनिंदा दिख रही है। इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2025 में ₹3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश करके बाजार को सहारा दिया है और अपना भरोसा बनाए रखा है।
सेक्टरों का हाल: मिक्स सिग्नल
बाजार में समग्र भावना में सुधार हुआ है, लेकिन कुछ खास सेक्टरों में तस्वीर मिली-जुली है।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर अच्छी खबर है। रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को देखते हुए इस सेक्टर को स्थिर आउटलुक (Stable Outlook) दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में लोन ग्रोथ (Loan Growth) में मामूली बढ़ोतरी होकर 11-13% तक पहुँचने का अनुमान है, जो मजबूत GDP अनुमानों और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) में सुधार से प्रेरित है। हालांकि, जमाओं (Deposits) के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आईटी (IT) सेक्टर, जो भारतीय बाजार की एक पारंपरिक ताकत रहा है, अब बदलती गतिशीलता का सामना कर रहा है। भारतीय आईटी कंपनियां अभी भी आक्रामक मूल्य निर्धारण (Aggressive Pricing) और कम लागत के कारण वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं। विदेशी कंपनियों की तुलना में वैल्यूएशन भी आकर्षक हैं। लेकिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव से इस सेक्टर पर दबाव बन रहा है, जिससे शेयर के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, डीप-टेक R&D (Deep-tech R&D) फंडिंग और वैश्विक स्तर पर अग्रणी उत्पाद बनाने में कथित पिछड़ापन भी चुनौतियों का हिस्सा हैं।
फार्मास्युटिकल (Pharmaceutical) सेक्टर में, डोमेस्टिक (घरेलू) मांग और यूरोपीय देशों में मजबूत एक्सपोर्ट (Exports) के कारण फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में राजस्व वृद्धि 7-9% रहने की उम्मीद है। लेकिन, अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण बाजार में ग्रोथ धीमी पड़ने की आशंका है। यहां जहां FY25 में करीब 10% की वृद्धि देखी गई थी, वहीं FY26 में यह घटकर 3-5% रह जाने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण लगातार मूल्य दबाव, नियामक जांच और अमेरिकी टैरिफ का संभावित जोखिम है।
इमर्जिंग मार्केट (EMs) और ग्लोबल आउटलुक
2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि का नेतृत्व इमर्जिंग मार्केट्स (EMs) द्वारा करने का अनुमान है, जिनकी वृद्धि दर लगभग 4% रहने की उम्मीद है, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाएं (Advanced Economies) केवल 1.5% की दर से बढ़ेंगी। भारत एक ऐसा बाजार है जो डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Ecosystems) के विस्तार से लाभान्वित होने की स्थिति में है। वैश्विक उत्पादन में 2.7% की अनुमानित मंदी के बीच यह ग्रोथ भारत को अनुकूल स्थिति में रखती है।
हालांकि, वैश्विक व्यापार तनाव, राजकोषीय दबाव और अनिश्चितता बनी हुई है। भारत के अपने बाजार का वैल्यूएशन भी महंगा है, BSE Sensex का P/E ratio 23.1 और Nifty 50 का P/E ratio करीब 22.8 है, जो लगातार आय वृद्धि से उचित ठहराया जाना चाहिए।
जोखिम और सतर्कता (Forensic Bear Case)
भारत को लेकर सतर्क आशावाद के बीच कुछ जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। FIIs का पैसा चुनिंदा क्षेत्रों में आ रहा है, न कि पूरे बाजार में, जिससे अगर सेंटीमेंट (Sentiment) बदला तो अस्थिरता बढ़ सकती है। फार्मा सेक्टर का अमेरिका पर निर्भर रहना टैरिफ और नियामक चुनौतियों के कारण बड़ा जोखिम पैदा करता है। आईटी सेक्टर में AI क्रांति और सेवा-केंद्रित नवाचार (Service-led Innovation) से आगे बढ़कर उत्पाद नवाचार (Product Innovation) पर जोर देने की जरूरत है, ताकि वैश्विक दिग्गजों से मुकाबला किया जा सके।
बैंकिंग सेक्टर स्थिर है, लेकिन जमाओं पर तीव्र प्रतिस्पर्धा मार्जिन को दबा सकती है। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में लगभग $10 बिलियन का बड़ा आउटफ्लो (Outflow) दिखाता है कि भारतीय बाजार वैल्यूएशन को लेकर वैश्विक तरलता (Liquidity) में कमी और बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में वृद्धि के प्रति संवेदनशील है।
आगे की राह
भारत की अर्थव्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) में G-20 देशों में सबसे तेज 6.4% की GDP ग्रोथ दर्ज करने का अनुमान है। यह मजबूत घरेलू ग्रोथ बाजार के प्रदर्शन की नींव है, और EMs से 2026 में लगभग 14% की अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) की उम्मीद है।
विशिष्ट सेक्टरों की चुनौतियां और वैश्विक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन अंतर्निहित संरचनात्मक मजबूती, विदेशी निवेशकों की वापसी और मजबूत घरेलू मांग मिलकर बाजार में लचीलापन बनाए रख सकते हैं। निवेशकों को एक लंबी अवधि के दृष्टिकोण (Long-term Perspective) के साथ, आय-संचालित अवसरों (Earnings-driven Opportunities) और सावधानीपूर्वक जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।