निवेशकों का बदला मिजाज: इक्विटी फंड्स की ओर बढ़ा रुझान
पिछले कुछ महीनों में निवेशकों का ध्यान शेयर बाजार के फंड्स यानी इक्विटी फंड्स (Equity Funds) पर बढ़ा है। फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच, इन फंड्स में लगभग 15 लाख नए निवेशक जुड़े हैं। यह ट्रेंड सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के दौरान देखा गया था, जब सोने और चांदी जैसे कमोडिटी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में रिकॉर्ड इनफ्लो (inflow) देखा गया था। तब कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेजी और शेयर बाजारों की बढ़ी हुई अस्थिरता (volatility) के कारण निवेशक कमोडिटी ईटीएफ की ओर आकर्षित हुए थे।
बाजार में गिरावट का फायदा, इक्विटी फंड्स में लाखों का निवेश
लेकिन अब हालात बदल गए हैं। यह नया ट्रेंड बताता है कि निवेशक बाजार में आई गिरावट को इक्विटी में निवेश करने या अपनी मौजूदा होल्डिंग्स (holdings) बढ़ाने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं। फ्लेक्सीकैप (Flexicap), मिडकैप (Midcap), और स्मॉलकैप (Smallcap) फंड्स इस तेजी का नेतृत्व कर रहे हैं और सबसे ज़्यादा नए अकाउंट इन्हीं में खुले हैं। यह रणनीति विविधीकरण (diversification) और ग्रोथ की संभावनाओं पर केंद्रित है, खासकर छोटी कंपनियों में, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहे।
अप्रैल 2026 अकेले में, इक्विटी फंड्स में ₹38,440 करोड़ का नेट इनफ्लो (net inflow) आया। यह पिछले महीने यानी मार्च से थोड़ा कम है, लेकिन यह सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और स्ट्रैटेजिक कैपिटल डिप्लॉयमेंट (strategic capital deployment) के ज़रिए लगातार मजबूत रिटेल निवेश को दर्शाता है। अकेले फ्लेक्सी-कैप फंड्स में अप्रैल में ₹10,147 करोड़ का रिकॉर्ड इनफ्लो देखा गया, जो फंड मैनेजर्स की विभिन्न मार्केट साइज़ (market sizes) में ढलने की क्षमता में विश्वास को दिखाता है।
कमोडिटी ईटीएफ से दूरी, निकली 20,000 अकाउंट
इसके विपरीत, कमोडिटी ईटीएफ (Commodity ETFs), जो पहले निवेशकों की पहली पसंद थे, अब धीमी गति का सामना कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में कमोडिटी ईटीएफ ने लगभग 20,000 अकाउंट गंवाए, जो हाल की लोकप्रियता से एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में सोने और चांदी के ईटीएफ ने ₹99,280 करोड़ का इनफ्लो आकर्षित किया था, जो कुल ईटीएफ इनफ्लो का 55% था। यह मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं के दौरान सुरक्षा चाहने वाले निवेशकों और प्राइस ट्रेंड (price trends) को फॉलो करने वालों की वजह से था, न कि इक्विटी से बड़े पैमाने पर बदलाव की वजह से।
सोने और चांदी के ईटीएफ के टैक्स फायदे (long-term capital gains पर 12 महीने बाद 12.5% टैक्स) ने भी फिजिकल होल्डिंग्स की तुलना में उनकी अपील बढ़ाई थी। हाल की गिरावट बताती है कि स्टॉक मार्केट वैल्यूएशन (stock market valuations) अधिक आकर्षक लगने के कारण मांग अब स्थिर हो रही है या उलट रही है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक कमोडिटी ईटीएफ का औसत दैनिक टर्नओवर (average daily turnover) ₹2,700 करोड़ था, जबकि इक्विटी ईटीएफ का टर्नओवर ₹745 करोड़ था।
आर्थिक माहौल और सेक्टर आउटलुक
यह इक्विटी की ओर वापसी एक जटिल आर्थिक माहौल में हो रही है। अप्रैल 2026 में महंगाई (inflation) 3.48% थी, जो पिछले महीने से थोड़ी ज़्यादा, लेकिन उम्मीद से कम थी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फरवरी 2026 से रेपो रेट (repo rate) को 5.25% पर बनाए रखा है। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्री महंगाई की चिंताओं और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में दरें बढ़ने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) बाजार में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
भारत के शेयर बाजार अब डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) पर ज़्यादा निर्भर कर रहे हैं, जो फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के आउटफ्लो को ऑफसेट (offset) करने में मदद कर रहे हैं। इस मजबूत घरेलू खरीदारी ने बाजारों को अधिक लचीला बनाया है। सेक्टरों की बात करें तो, डिफेंस, रियल्टी और मेटल्स ने 2026 की शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन विश्लेषकों को बैंकिंग, आईटी/एआई, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) में सरकारी नीतियों और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ट्रेंड्स (long-term growth trends) के समर्थन से पूरे साल मजबूती की उम्मीद है।
एक्टिव फंड्स की वैल्यू और सावधानियां
सक्रिय इक्विटी फंड्स (Active equity funds), जिनमें एक्सपेंस रेश्यो (TERs) 0.64% से 0.82% तक होता है, पैसिव ईटीएफ (passive ETFs) (जो अक्सर 0.20% से कम होते हैं) की तुलना में महंगे हैं। फिर भी, वे अस्थिर बाजारों में लचीलापन प्रदान करके अपना मूल्य साबित कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, HDFC Flexi Cap Fund ने 2020-2025 के बीच 33.97% का सीएजीआर (CAGR) हासिल किया, जो कई पैसिव फंडों से बेहतर है, हालांकि पैसिव विकल्प अधिक पूर्वानुमानित होते हैं।
हालांकि इक्विटी फंड्स में इनफ्लो बताता है कि निवेशक टैक्टिकल प्ले (tactical plays) में अवसर देख रहे हैं, बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति सावधानी बरतने का भी संकेत देती है। यह माना जा रहा है कि वर्तमान इनफ्लो मजबूत आर्थिक सुधार में विश्वास से ज़्यादा, सस्ते दाम पर खरीदारी का नतीजा है। भारत का शेयर बाजार अभी भी वैश्विक बाजारों की तुलना में महंगा दिखता है। छोटे-कैप स्टॉक्स (small-cap stocks) भी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। बाजार की स्थिरता घरेलू इनफ्लो पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिति बिगड़ने या भू-राजनीतिक जोखिमों के बढ़ने पर कमजोर हो सकती है।
भविष्य की ओर: इक्विटी के लिए सकारात्मक आउटलुक
विश्लेषकों को 2026 में भारतीय इक्विटी के लिए सकारात्मक आउटलुक (positive outlook) की उम्मीद है, जिसमें फाइनेंशियल ईयर 27 (FY27) के लिए आय में लगभग 16% की वृद्धि का अनुमान है। सरकारी नीतियां, आरबीआई का सतर्क मौद्रिक दृष्टिकोण (cautious monetary approach), और मजबूत घरेलू मांग बाजार के प्रदर्शन को बढ़ावा देगी। मुख्य निवेश क्षेत्रों में बैंकिंग, आईटी (विशेष रूप से AI के साथ), रिन्यूएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं। जबकि घरेलू निवेश स्थिरता प्रदान करता है, निवेशकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से अवगत रहना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए।