EPFO की इन्वेस्टमेंट कमेटी 10 फरवरी को एक अहम मीटिंग करने वाली है, जिसमें फंड के इक्विटी पोर्टफोलियो को नई दिशा देने पर चर्चा होगी। यह ₹31 लाख करोड़ की एसेट मैनेज करने वाली संस्था, अपनी इक्विटी होल्डिंग को मौजूदा बेंचमार्क वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से आगे ले जाने की तैयारी में है। फंड का फोकस अब सेक्टोरल, फैक्टर-आधारित और 'सनराइज' सेक्टर्स जैसे रेअर अर्थ, रेलवे और डिफेंस में निवेश के नए अवसरों को खोजना है।
एक नई स्ट्रैटेजी की ओर
यह डाइवर्सिफिकेशन की कोशिश 2016 के बाद फिर से शुरू हुई है, जब उस वक्त भी BSE और NSE के नैक्स्ट 50 और मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स जैसे विकल्पों पर विचार किया गया था, लेकिन वे पूरी तरह अमल में नहीं आ पाए थे। नवंबर 2024 में EPFO की इन्वेस्टमेंट कमेटी ने कंसल्टेंट CRISIL को इन नए निवेश अवसरों का विश्लेषण करने का जिम्मा सौंपा था। CRISIL ने अपनी रिपोर्ट में बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, IT, FMCG, डिफेंस, रेलवे और सर्विसेज जैसे सेक्टर्स के इंडेक्स का सुझाव दिया है।
नए सेक्टर्स और इंडेक्स पर नजर
इसके अलावा, ESG (एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस) सिद्धांतों और उभरते सेक्टर्स पर फंड के बढ़ते फोकस को देखते हुए, CRISIL ने Nifty EV and New Age Automotive, Nifty 100 ESG Sector Leaders, और Nifty India Defence जैसे इंडेक्स को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। कंसल्टेंट ने मोमेंटम (momentum) या वैल्यू (value) स्टॉक्स को ट्रैक करने वाले फैक्टर-आधारित इंडेक्स का भी मूल्यांकन किया है और उनके रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न्स (risk-adjusted returns) का अनुमान लगाने के लिए शार्प रेशियो (Sharpe Ratio) के आधार पर उन्हें रैंक किया है। 31 दिसंबर 2025 तक, EPFO के इक्विटी इनवेस्टमेंट्स उसके कुल एसेट्स का 10.57% थे, और उम्मीद है कि इन डाइवर्सिफिकेशन प्लान्स के परिपक्व होने पर इस हिस्से में रणनीतिक फेरबदल किया जाएगा।
डेट पोर्टफोलियो का भी होगा रिव्यू
साथ ही, EPFO अपने डेट पोर्टफोलियो, जो कि कुल निवेश का 89% से अधिक है, के लिए भी एक नया बेंचमार्क तय करने पर विचार कर रहा है। CRISIL ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के लिए अलग-अलग बेंचमार्क सुझाए हैं, खासकर EPS के लंबे निवेश होराइजन को ध्यान में रखते हुए। यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उस रिपोर्ट से भी प्रेरित है, जिसमें EPFO की विभिन्न स्कीम्स के लिए अलग-अलग इनवेस्टमेंट पैटर्न और बेंचमार्क की सलाह दी गई थी। आने वाली कमेटी मीटिंग में इन प्रस्तावों पर गौर किया जाएगा, जो भारत के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक की भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।