साल **2026** में 'दिवाली पोर्टफोलियो' यानी फेस्टिव सीजन से जुड़े शेयरों के बास्केट ने निफ्टी बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया है। ज्वैलरी और फाइनेंस जैसे सेक्टर की मजबूती ने निवेशकों की चांदी की है, लेकिन इसमें छुपे जोखिमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
अक्टूबर 2026 के फेस्टिव सीजन की दस्तक के साथ ही 'दिवाली पोर्टफोलियो' की धूम मची है। जहाँ निफ्टी 50 जैसे बड़े इंडेक्स बाहरी आर्थिक दबावों के बीच संघर्ष करते नजर आए, वहीं कंजम्पशन-ड्रिवेन सेक्टर यानी ज्वैलरी, रिटेल बैंकिंग और टेक्सटाइल पर आधारित शेयरों के बास्केट ने इस साल बेहतरीन रिटर्न दिया है।
इस बार क्या रहा सक्सेस मंत्र?
इन थीमेटिक स्ट्रैटेजी की सफलता की मुख्य वजह यूटिलिटी और पावर जैसे रेगुलेटेड सेक्टर से दूरी बनाना रही है। इसके बजाय, पोर्टफोलियो ने घरेलू खपत (Domestic Consumption) पर दांव लगाया। खासकर ज्वैलरी सेक्टर में Sky Gold & Diamonds और Thangamayil Jewellery जैसे शेयरों में निवेशकों की भारी रुचि देखी गई। यह ट्रेंड ब्रांडेड रिटेल की ओर बढ़ते उपभोक्ताओं के झुकाव को दर्शाता है।
इसके अलावा, फाइनेंस सेक्टर में State Bank of India और PNB Housing Finance जैसे शेयरों ने क्रेडिट डिमांड का फायदा उठाया है। साथ ही, Pearl Global और Sai Life Sciences जैसे दिग्गजों ने पोर्टफोलियो में विविधता लाकर मार्केट की वोलैटिलिटी (Volatility) को झेलने में मदद की है।
सावधानी भी है जरूरी (Investment Risks)
फेस्टिव सीजन के नाम पर किए जा रहे निवेश में कुछ बड़े जोखिम भी हैं। सबसे बड़ा खतरा 'सेक्टर कंसंट्रेशन' का है। किसी एक इंडस्ट्री पर हद से ज्यादा फोकस करने से पोर्टफोलियो का रिस्क बढ़ जाता है। अगर उस सेक्टर में कोई रेगुलेटरी बदलाव आता है, तो निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है।
इसके साथ ही, मार्किट में उतार-चढ़ाव के दौरान कैश रिजर्व बनाए रखने की रणनीति कभी-कभी घातक हो सकती है। अगर मार्केट अचानक तेजी से उछलता है, तो सही एंट्री न ले पाने के कारण बड़े मौके हाथ से निकल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ फेस्टिव थीम के भरोसे न रहें, कंपनियों के फंडामेंटल्स की जांच करना और डिमांड को ट्रैक करना लॉन्ग-टर्म रिटर्न के लिए बहुत जरूरी है।
