DSP MF: भारतीय शेयरों में दिखी 'फेयर वैल्यू', DSP MF ने कहा - धीरे-धीरे खरीदें इक्विटी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
DSP MF: भारतीय शेयरों में दिखी 'फेयर वैल्यू', DSP MF ने कहा - धीरे-धीरे खरीदें इक्विटी
Overview

DSP Mutual Fund की मानें तो भारतीय शेयर बाजार में अब 'फेयर और एवरेज' वैल्यूएशन देखने को मिल रहा है। यह समय धीरे-धीरे इक्विटी में निवेश बढ़ाने का है, खासकर लार्ज-कैप शेयरों में। हालांकि, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों को लेकर अभी भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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DSP Mutual Fund के विश्लेषण के अनुसार, हालिया बाजार गिरावट ने वैल्यूएशन को एक उचित दायरे में ला दिया है। फंड का मानना है कि अब धीरे-धीरे इक्विटी निवेश बढ़ाने का अच्छा मौका है। यह कदम उन संकेतकों (contrarian signals) से भी पुष्ट होता है जो अक्सर लंबी गिरावट के बाद मजबूत रिकवरी का इशारा करते हैं। हालांकि, यह बाजार का निचला स्तर (market bottom) नहीं है, लेकिन अनुशासित और क्रमिक निवेश के लिए यह एक अच्छा समय प्रस्तुत करता है।

लार्ज कैप पर दांव

DSP Mutual Fund के मुताबिक, लार्ज-कैप शेयर अब काफी आकर्षक दिख रहे हैं। इसकी वजह कम कीमतें, बेहतर रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और छोटी कंपनियों की तुलना में स्थिर आय (earnings) है। बैंकिंग और आईटी सेक्टर पर खास ध्यान दिया गया है। Infosys और TCS जैसी दिग्गज कंपनियां अपने 10-year के औसत P/E मल्टीपल से नीचे कारोबार कर रही हैं। इसी तरह, HDFC Bank और SBI जैसे बैंकों का P/E भी ऐतिहासिक औसत से कम है, जो वैल्यूएशन की संभावनाओं को दर्शाता है। अनिश्चित बाजारों में स्थिरता और स्थिर रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए लार्ज कैप एक अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं।

मिड और स्मॉल कैप में सतर्कता

दूसरी ओर, DSP Mutual Fund मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों को लेकर सतर्क है। हालांकि उनके वैल्यूएशन में कुछ नरमी आई है, लेकिन वे अभी भी लंबी अवधि के औसत से ऊंचे हैं। छोटी कंपनियों को बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों जैसे आर्थिक दबावों का अधिक खतरा है, जो मुनाफे को नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि उनके पास कीमतें बढ़ाने और परिचालन चुनौतियों से निपटने की शक्ति कम होती है। ऐतिहासिक रूप से, स्मॉल कैप ज्यादा तेजी से गिरते हैं, 40-55% तक की गिरावट असामान्य नहीं है, हालांकि वे तेजी से वापसी भी कर सकते हैं। फंड इन क्षेत्रों में सोच-समझकर निवेश करने का सुझाव देता है, खासकर क्वालिटी और वैल्यू पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक्टिवली मैनेज्ड फंड (actively managed funds) या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) के जरिए।

वैल्यूएशन: ठीक है, लेकिन सस्ता नहीं

Nifty 50 इंडेक्स में वैल्यूएशन में अच्छी नरमी दिख रही है। April 2026 के मध्य तक इसका ट्रेलिंग P/E मल्टीपल करीब 21.38-21.46 के आसपास आ गया है। DSP MF की रिपोर्ट में 20x से कम P/E का जिक्र है, जो इसके 10-year के औसत 18.9x के करीब है, लेकिन मौजूदा डेटा इसे 21.4 के करीब रखता है। DSP MF का कहना है कि ये स्तर 'फेयर और एवरेज के बीच' हैं, न कि पूरी तरह सस्ते। उनका अनुमान है कि मौजूदा ROE और आय वृद्धि (earnings growth) के आधार पर एक फेयर मल्टीपल 16.5x-18x के बीच हो सकता है। विश्लेषण से पता चलता है कि 22x से ऊपर का P/E अगले three years में औसतन नकारात्मक रिटर्न की ओर ले जाता है। यह इस बात का संकेत है कि एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे और लगातार खरीदना बेहतर रणनीति है।

प्रमुख जोखिम (Key Risks)

बेहतर वैल्यूएशन के बावजूद, कुछ जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। रुपये में गिरावट के कारण भारत की नॉमिनल जीडीपी रैंकिंग गिरकर छठी वैश्विक पायदान पर आ गई है, हालांकि रियल जीडीपी ग्रोथ मजबूत है। तेल आयात पर निर्भरता देश को भू-राजनीतिक मुद्दों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और ब्याज दर कटौती में देरी हो सकती है। 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का अनुमान है, जो कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है। मौजूदा बाजार P/E में अभी भी जोखिम है। over 100% का मार्केट कैप टू जीडीपी रेशियो कुछ ओवरवैल्यूएशन का संकेत देता है। बड़ी बाजार गिरावट के बाद लंबी रिकवरी अवधि, जैसे 2008 के बाद 71 months, निवेशकों के धैर्य की आवश्यकता पर जोर देती है। S&P Global Ratings का कहना है कि भारत झटकों को झेल सकता है, लेकिन लगातार ऊर्जा झटके ग्रोथ को 0.8% तक धीमा कर सकते हैं।

भविष्य का अनुमान और कंट्रेरियन संकेत (Future Outlook & Contrarian Indicators)

March 2026 में Nifty 50 इंडेक्स का four-month की गिरावट का सिलसिला तोड़ना एक दुर्लभ घटना है, जिसने ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रैलियों का मार्ग प्रशस्त किया है, जिसमें अगले साल औसतन 40.7% का रिटर्न मिला है। वोलैटिलिटी (volatility) और ओवरसोल्ड (oversold) इंडिकेटर्स भी भविष्य में बेहतर रिटर्न की ओर इशारा करते हैं। Quant Mutual Fund इसे कोविड-19 के बाद सबसे बड़ा खरीदारी का अवसर मान रहा है। हालांकि वैश्विक विकास धीमा होने की उम्मीद है, भारत की विकास कहानी मौलिक रूप से मजबूत है। फिर भी, मौजूदा वैल्यूएशन इक्विटी में सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण अपनाने और क्वालिटी लार्ज कैप पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं। निवेशकों के लिए मुख्य सलाह यह है कि वे अनुशासित रहें और लंबी अवधि की संपत्ति बनाने के लिए बिकवाली (sell-offs) का उपयोग मौके के तौर पर करें।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.